चंद्रबाबू नायडू : न खुदा ही मिला न, विसाले सनम, पीएम पद के फेर में सीएम की कुर्सी भी गई

  • 24 May,2019
  • 164 Views
चंद्रबाबू नायडू : न खुदा ही मिला न, विसाले सनम, पीएम पद के फेर में सीएम की कुर्सी भी गई

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश में जुटे टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू को न तो खुदा ही मिला और न ही विसाले सनम. कहां तो चंद्रबाबू नायडू मन ही मन तीसरे मोर्चे की कवायद में खुद के पीएम बनने का ख्वाब संजो रहे थे और कहां उन्हें आंध्रप्रदेश में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी से इस्तीफा देना पड़ गया.

 

 

चुनाव शुरू होने से पहले और एग्ज़िट पोल आने के बावजूद चंद्रबाबू नायडू के उत्साह और आशावादी सोच पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ा था. वो सिर्फ मोदी विरोधी मोर्चा तैयार करने के एक सूत्री कार्यक्रम में इस कदर जुटे हुए थे कि आंध्रप्रदेश के चुनाव में अपनी ही सरकार नहीं बचा पाए. दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ की दौड़ के पीछे नायडू की कोशिश वो मोर्चा तैयार करना था जिसे कांग्रेस के समर्थन से सत्ता के दरवाजे तक पहुंचाया जा सके. दरअसल, नायडू को उम्मीद थी कि नतीजों में एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा और ऐसे में वो विपक्षी दलों को एकजुट कर एनडीए का विकल्प तैयार कर सकेंगे. लेकिन मोदी-लहर में चंद्रबाबू नायडू के केंद्र की सत्ता का ख्वाब अधूरा रह गया. जबकि बाकी काम विधानसभा चुनाव में जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने कर दिया।

 

चंद्रबाबू के अरमानों पर ‌फिरा पानी

लगातार देश की सियासत के केंद्र में बने रहने के लिए चंद्रबाबू नायडू सक्रिय दिखाई दे रहे थे. कभी वो ईवीएम पर सवाल उठाने वाले मोर्चे की झंडाबरदारी करते तो कभी ममता, मायावती, अखिलेश यादव, शरद पवार और राहुल गांधी से मुलाकात करते. एग्ज़िट पोल के अनुमान जब एनडीए को 350 से ज्यादा सीटें दे रहे थे तब चंद्रबाबू नायडू दिल्ली की दौड़ लगाकर चुनाव बाद गठबंधन की कवायद में जुटे थे. लेकिन 23 मई की तारीख ने सभी विपक्षी दलों के अरमानों पर पानी फेर दिया.

 

 

उल्टा पड़ा एनडीए से अलग होने का दांव

 

चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र के स्पेशल स्टेटस के नाम पर अपनी समझ से सबसे बड़ा सियासी दांव खेला था. पिछले साल आंध्रप्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हुए टीडीपी ने खुद को एनडीए से अलग कर लिया था. उस वक्त नायडू को ये लगा था कि उनके इस दांव से आंध्र की जनता में मसीहा बनकर उभरेंगे. लेकिन उनके विरोधी जगनमोहन रेड्डी ने 1 साल में तकरीबन साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी पद-यात्रा कर नायडू से आंध्र का मुद्दा हाईजैक कर लिया. नतीजतन लोकसभा और विधानसभा चुनाव में टीडीपी की करारी हार हुई.

 

 

आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद अब नायडू ये जरूर सोचेंगे कि काश एनडीए से अलग होने का फैसला न किया होता. कुछ इसी तरह का काम नीतीश-शरद की जोड़ी वाली जेडीयू ने भी साल 2014 में तब किया था जब बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में सियासत का चक्का ऐसा पलटा कि आज नीतीश और शरद यादव ही एक साथ नहीं हैं और नीतीश कुमार अपनी जेडीयू को लेकर वापस एनडीए में आ गए.

Author : Ashok Chaudhary

Share With

Tag With

आपके लिए

You may like

Leave A Reply

Follow us on

आपके लिए

TRENDING