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जीवन की मूलभूत आवश्यकता;

  • 23 January,2019
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जीवन की मूलभूत आवश्यकता;

समय, पैसा और स्वभाव

वैसे तो कहा जाता है जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ रोटी, कपड़ा और मकान है| लेकिन इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमें साधन चाहिए और वह साधन है पैसा| माना कि पैसा सब कुछ नहीं है| लेकिन पैसा बहुत कुछ है| यदि आपके पास पैसा है, और समय नहीं है, तो उस पैसे का क्या फायदा जिसका आप समय ना होने की वजह से उपयोग ही नहीं कर सकते और यदि आपके पास समय हे और पैसा नहीं है तो उस समय का क्या फायदा जिसे आप पैसा न होने की वजह से गुजार ही नहीं पा रहे हैं|

 

तीसरी बात यदि आपके पास पैसा भी है समय भी है लेकिन यदि आप कंजूस प्रवृति के है, क्रोधी है , इर्षालु है, झगड़ालू है, अनैतिक है, अत्याचारी है , बेईमान है दूसरों का अहित चाहते हैं तो आपके इस स्वभाव की वजह से यही पैसा आपके लिए मुसीबत बन सकता है|

 

पैसे की वजह से हर पल आपके दुश्मनों की संख्या बढ़ती जाएगी| और सारा समय आप इन्हीं चिंताओं में व्यर्थ गवा देंगे कि कहीं कोई आपकी खिलाफत तो नहीं कर रहा है? कहीं कोई आपके विरुद्ध षड़यंत्र तो नहीं रच रहा है? कहीं आपके साथ विश्वासघात तो नहीं होने जा रहा है? कई सारी बातें आपके दिमाग को तनाव ग्रस्त करती रहेंगी | और आपका समय और पैसा इन चिंताओं, परेशानियों , मुसीबतों का समाधान निकलने में व्यर्थ खर्च होगा| और धीरे-धीरे आपका पैसा और समय दोनों नष्ट हो जाएंगें| और यदि आप अपने समय और पैसों का सदुपयोग अपने स्वभाव के सद्गुणों यथा, मानवता , दया , प्रेम, ईमानदारी , विनम्रता से करेंगें तो आपको जीवन में कभी पछताने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

 

आप अपने लिए तो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कर ही लेंगें| हो सकता है आप दूसरों के लिए भी रोटी, कपडा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में सहयोग प्रदान करने लायक बन सकेंगे | यह सब आप तब ही कर पाएंगें जब आप समय , पैसा , और स्वभाव का प्रबंधन सही प्रकार से कर पाएंगें | इसलिए समय, पैसा , और स्वभाव को भी रोटी कपड़ा और मकान की तरह जीवन की मूलभूत आवश्यकता मानें और अपने जीवन को जीते – जी जिन्दा रखें |

Author : Ashok Chaudhary
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