देवरिया में चुनावी मुद्दा: 30 वर्ष से अनुआपार ढाला के लिए संघर्ष कर रहे हैं हजारों लोग

  • Author : Ashok Chaudhary
  • 25 April,2019
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देवरिया में चुनावी मुद्दा:  30 वर्ष से अनुआपार ढाला के लिए संघर्ष कर रहे हैं हजारों लोग

देवरिया: परिसीमन के बाद लोकसभा क्षेत्र का भूगोल बदल गया, लेकिन एक दर्जन गांव के लोगों को अनुआपार ढाला के संघर्ष का फल तीन दशक बाद भी नहीं मिला। पहले सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने वाली जनता अब देवरिया के जनप्रतिनिधियों की राह ताकती है परन्तु एक अदद रेलवे क्रासिंग की समस्या जस की तस खड़ी है।

 

हो चुका है लाठीचार्ज, क्रमिक अनशन और भूख हड़ताल
सलेमपुर की यह समस्या अब देवरिया के लिए है बड़ा मुद्दा

भटनी वाराणसी रेल खंड को वर्ष 1991 में गेज लाइन को बड़ी लाइन में पविर्तित कर दिया गया। इसके बाद से इस रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की संख्या बढ़ गई। इसी रूट पर पिवकोल -भटनी रेलवे स्टेशन के बीच अनुआपार गांव के समीप अनमैन रेलवे क्रासिंग है। ट्रेनों की संख्या बढ़ते ही इस क्रासिंग पर अक्सर हादसे होने लगे। अंत में लोग अंडर क्रासिंग की मांग को लेकर सड़क पर उतर गए।

 

तब यह क्षेत्र सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में आता था। जनभावनाओं को देखते हुए कई नेता भी आंदोलन में शामिल हो गए। 1991 से शुरू हुए इस आंदोलन का नेतृत्व हरिकेवल प्रसाद, हरीवंश सहाय, राजनाथ यादव और धनश्याम मिश्र ने किया। इस दौरान कई बार लोगों ने जहां लाठियां खाई वही आश्वासन की घुट्टी भी मिली परन्तु समस्या जस की तस बनी रही। वर्ष 2009 में हुए परिसीमन में अनुआपार रेलवे क्रासिंग सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र की जगह देवरिया में आ गया। तब से देवरिया के सांसद चुने गए जनप्रतिनिधियों ने भी आश्वासन तो दिया लेकिन क्षेत्र के लोगों को इस पर गंभीर पहल का आज भी इंतजार है।

 

चुनाव बीतते ही इसे भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि
तीन दशक से गांव के लोग और जनप्रतिनिधि समय-समय पर अनुआपार ढाला के लिए आंदोलन कर चुके हैं। 1991 से अब तक हुए चुनावों में यह बड़ा मुद्दा रहा। चुनाव के दौरान नेताओं ने आश्वासन की घुट्टी भी खूब पिलाई लेकिन चुनाव के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

 

 

रेलवे के मानकों में अनमैन क्रासिंग में दर्ज है अनुआपार
अनुआपार अनमैन रेलवे क्रासिंग के नाम रेलवे के रिकार्ड में दर्ज है। इस रेलवे क्रासिंग पर प्रतिदिन सैकड़ो वाहनों का आना-जाना होता है। सड़क मार्ग से होकर सलेमपुर जाने में लोगों को 12 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। इस रेलवे क्रासिंग से जाने में लोगों को दूरी और समय की बचत होती है। यह क्षेत्र गोरखपुर जोन में वाराणसी डिविजन के अंतर्गत आता है। इसे बनवाने के लिए रेलवे ने भी कभी कोई पत्राचार नहीं किया।

 

 

दो दर्जन से अधिक लोगों की जा चुकी है जान
हादसों के कारण अनुआपार रेलवे क्रासिंग को खूनी रेलवे क्रासिंग के नाम से ग्रामीण पुकारते हैं। अब तक यहां दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। हादसों में अनुआपार के राजाराम पुत्र शिवदत्त, मुनेश्वर पुत्र पलटन, पारसनाथ तिवारी पुत्र मुशन तिवारी, बसंती पत्नी जगरनाथ पाण्डेय, दिनेश पुत्र नरसिंग प्रसाद, फूलन देवी पत्नी परमानंद और सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के टीचर कालोनी के रहने वाले प्रदुमन तिवारी की जान जा चुकी है।

पीड़ित बोले
अनुआपार रेलेवे क्रासिंग पर ढाला बनाने वाले सांसद और विधायक बन गए। लेकिन अभी तक किसी ने इसके लिए पहल नहीं की। हर चुनाव में नेताओं के मुंह से ढाला बनाने की बात कहीं जाती है लेकिन कोई भी इसके लिए प्रयास नहीं करता है।
रमाकांत कुशवाहा

गांव के दर्जनों की संख्या में लोगों की मौत अनमैन रेलवे क्रासिंग पर हो चुका है। जिससे लोग आने जाने से डरते हैं। रेलवे क्रासिंग के दोनों तरफ सड़़क है। विभाग को रेलवे ढाला नहीं बनाना है तो अंडर पास ही बना दे।
लाल मोहन कुशवाहा

 

गांव में आने जाने का यह रेलवे क्रासिंग मुख्य रास्ता है। यहां ढाला बनाने के लिए काफी आंदोलन हुआ लेकिन नहीं बन सका। गांव की कई महिला, पुरुष और बच्चे असमय इस ढाले पर ट्रेन के चपेट में आ कर अपनी जान गवां चुके हैं।
बीना देवी

 

अनुआपार ढाला के लिए दर्जनों बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पत्राचारकिया गया, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसके लिए दर्जनों बार आंदोलन किया गया। तीन दशक से यह मांग चली आ रही है। लेकिन अभी तक ढाला या अंडर पास भी स्वीकृत नहीं हुआ है। आने वाले दिनों भी एक बार फिर आंदोलन किया जाएगा।

शंख बाबा अनुआपार ढाला बनाओ समिति के अध्यक्ष

ढाला के लिए अनुआपार के साथ ही आस पास के गांव के प्रधान के साथ रेलवे और डीएम को पत्राचार किया गया। लेकिन अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया। जनप्रतिनिधि तो चुनाव के बाद ढाला के बारे में सुनना भी नहीं चाहते हैं। चुनाव में यह फिर मुद्दा बनेगा।
संजय कुमार मिश्र ग्राम प्रधान अनुआपार

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