loading...

नई दिल्ली: थाई मांगुर मछली का पालन और बिक्री करने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर

  • 12 February,2019
  • 215 Views
नई दिल्ली: थाई मांगुर मछली का पालन और बिक्री करने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली द्वारा थाई मांगुर मछली के पालन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। न्यायाधिकरण के आदेशों के अनुपालन पर जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन ने टास्क फोर्स गठित कर इन मछलियों का पालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मत्स्य निरीक्षक साधना सिंह ने बताया कि एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में जनपद के समस्त मत्स्य पालको, मत्स्य बीज उत्पादको, मत्स्य बीज हैचरियो के स्वामियो को नोटिस दी गई है। उन्हें बताया गया है कि जनपद में थाई मांगुर का उत्पादन और एवं संवर्धन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। निर्देश दिया गया है कि ऐसी प्रजाति की मछलियों को तत्काल नष्ट करें अन्यथा निरीक्षण के दौरान थाई मांगुर मछली मिलने पर मछली और उसके बीज को नष्ट किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा इस प्रक्रिया में हुए व्यय की धनराशि भी मछली पालक एवं हैचरी के स्वामी द्वारा वसूल किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया जाएगा।
थाई मांगुर का पालन करने वालों की पहचान शुरू
जिन क्षेत्रों में लोगों द्वारा थाई मांगुर का पालन किया जाना है, ऐसे स्थलों का चिन्हांकन कराया जा रहा है। उसके बाद युद्ध स्तर पर अभियान चला कर उक्त प्रतिबंधित प्रजाति की मछलियो को नष्ट करने की कार्यवाही की जाएगी।

इसलिए पालते हैं थाई मांगुर
मांसाहारी होने के कारण थाई मांगुर तालाबों की देशी प्रजातियों की मछलियों सहित वनस्पतियों को भी खा जाती है। यह मछली त्वचा से सांस लेती है इसलिए पानी से बाहर भी ज्यादा देर तक जिवित रहती है। इसके पालन के लिए पालक मीट बिक्रेताओं के यहां से मांस का अवशेष तालाब में डालते हैं। इन मछलियों को छोटे तालाब में भी कम खर्च में ज्यादा संख्या में पाला जा सकता है। आक्सीजन, तापमान, अमोनिया की बढ़ती मात्रा सरीखी समस्याएं इनके साथ उतनी नहीं होती जितनी दूसरी मछलियों के साथ, इसलिए इन्हें पालना आसान होता है।

 

इन मछलियों से यह है दिक्कत
यह मछली चूंकि तालाब के तल में नहीं रहती, इसलिए मछलियों से बचा मांस तल में सड़ता रहता है जिससे वातावरण के साथ जल भी प्रदूषित होता है। थाई मांगुर में हैवी मेटल मिलता है जिससे मनुष्यों में हृदय रोग, डायबिटीज, आर्थराटिस के अलावा कैंसर जैसा गंभीर रोग होने का खतरा रहता है। थाई मांगुर 5 माह में एक किलोग्राम से अधिक वजन की हो जाती है। बाजार में 100 से 125 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर सहज ही उपलब्ध है।

Author : Ashok Chaudhary
Loading...

Share With

You may like

Leave A Reply

Follow us on

Loading...

आपके लिए

TRENDING