नौकरी गई, मकान बिका नहीं, कर्ज नहीं चुका सकीं तो पत्नी और बेटी ने जलकर दे दी जान

  • 15 May,2019
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नौकरी गई, मकान बिका नहीं, कर्ज नहीं चुका सकीं तो पत्नी और बेटी ने जलकर दे दी जान

नई दिल्ली: करीब 7 लाख रुपए का होम लोन नहीं चुका पाने के चलते मकान खोने के डर से एक महिला और उसकी बेटी ने खुद को आग लगा ली। दोनों की मौत हो गई। मामला केरल के तिरुवनंतपुरम का है, जहां यह दर्दनाक हादसा मंगलवार (14 मई) को हुआ। बताया जा रहा है कि मां-बेटी ने कर्ज से निजात पाने के लिए मकान बेचने की भी कोशिश की थी, लेकिन खरीदार ने ऐन वक्त पर मकान लेने से इनकार कर दिया, जिससे बैंक को दी गई आखिरी समयसीमा भी समाप्त हो गई। ऐसे में मां-बेटी ने यह खतरनाक कदम उठा लिया।

पुलिस के मुताबिक, मां लेखा (42) और बेटी वैष्णवी (19) अपने मकान के एक कमरे में गंभीर हालत में जली हुई मिलीं। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। नेय्यत्तिकारा में हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद लोगों ने केनरा बैंक की स्थानीय शाखा के बाहर प्रदर्शन किया। साथ ही, बैंक के उन कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की, जिन्होंने मां-बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाया। केरल के राजस्व मंत्री ई चंद्रशेखरन ने इस मामले में बैंक की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। साथ ही, जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।

 

बैंक के एक कर्मचारी ने बताया कि मां-बेटी को लोन चुकाने के लिए वक्त दिया गया था। यह कर्ज उन्होंने 2003 में लिया था। वहीं, मामला अदालत में पहुंचने के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू की गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में वैष्णवी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। वहीं, लेखा की मौत स्थानीय अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।

 

 

लेखा के पति और मकान मालिक चंद्रन की नौकरी कुछ समय पहले ही छूटी थी। वह खाड़ी देशों में कारपेंटर की जॉब करते थे। उन्होंने बताया कि बैंक की डेडलाइन खत्म होने के बाद उनकी पत्नी व बेटी टूट गई थीं। चंद्रन और लेखा ने इस मकान का नाम अपनी बेटी वैष्णवी के नाम पर ‘वैष्णवम’ रखा था। वैष्णवी इस वक्त कॉलेज से डिग्री कोर्स कर रही थी।

 

 

चंद्रन ने बताया, ‘‘मैंने यह मकान बनवाने के लिए 2003 में लोन लिया था। मैं अब तक 5 लाख रुपए दे चुका हूं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते पूरा लोन नहीं चुका सका। बैंक मुझसे 6.80 लाख रुपए की और मांग कर रहा था। मैंने बैंक से कुछ वक्त मांगा था, जिससे मैं यह मकान बेचकर लोन चुका सकूं, लेकिन बैंक कर्मचारियों से मिल रही धमकी से मेरी पत्नी व बेटी काफी ज्यादा डर गई थीं। ऐसे में उन्होंने यह खतरनाक कदम उठा लिया।’’

 

 

हालांकि, स्थानीय कोलायिल पंचायत की अध्यक्ष वाई लेखा ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मचारी पीड़ित परिवार को कर्ज चुकाने के लिए मजबूर कर रहे थे। करीब एक महीने पहले हमने इस मामले में हस्तक्षेप किया था। साथ ही, बैंक के कर्मचारियों से तब तक कार्यवाही रोकने के लिए कहा था, तब तक चंद्रन अपना मकान बेचकर लोन न चुका दे। बता दें कि चंद्रन के मकान का मार्केट प्राइस इस वक्त करीब 50 लाख रुपए है, लेकिन कर्ज चुकाने के लिए वह इसे 24 लाख में भी बेचने को तैयार था। पहले एक खरीदार सामने आया, लेकिन बाद में वह पीछे हट गया।

 

 

पुलिस का कहना है कि उन्हें कोर्ट की ओर से नियुक्त पैनल को चंद्रन की ओर से सौंपा गया सहमति पत्र मिला है। इसमें उसने 14 मई तक बैंक को 6.80 लाख रुपए लौटाने का वादा किया था। इस पत्र के मुताबिक, अगर चंद्रन रकम लौटाने में असफल होता तो बैंक वसूली की कार्रवाई शुरू कर सकती थी। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि चंद्रन 2010 में डिफॉल्टर घोषित हो गया था। ऐसे में बैंक ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए हम कोर्ट गए थे और कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। हमने उससे लोन का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए भी कहा था।

Author : Ashok Chaudhary

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