पुण्यतिथि:राजीव गांधी के पांव छूने के बहाने झुकी थी मानव बम धनु, जानिए रोकने पर क्यों नहीं माने पूर्व पीएम

  • 21 May,2019
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पुण्यतिथि:राजीव गांधी के पांव छूने के बहाने झुकी थी मानव बम धनु, जानिए रोकने पर क्यों नहीं माने पूर्व पीएम

नई दिल्ली: 

आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई, 1991 की रात एक आत्मघाती बम धमाके में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि राजीव गांधी ने 21 मई को दिनभर तमिलनाडु में कई सभाएं कीं।

 

 

विशाखापट्टनम में उन्होंने शानदार चुनाव प्रचार किया। प्रचार के बाद वे गाड़ियों के काफिले के साथ सफेद एम्बेसडर कार में श्रीपेरुम्बुदूर के लिए रवाना हुए। राजीव गांधी रास्ते में रुक-रुक कर लोगों से मिल रहे थे। श्रीपेरुम्बुदूर पहुंचने तक रात के दस बज गए थे।

 

रात में राजीव गांधी लोगों को संबोधित करने के लिए मंच की तरफ जा रहे थे। कुछ लोग राजीव गांधी को फूलों की माला पहनाकर स्वागत कर रहे थे जिनमें स्कूल के बच्चे भी शामिल थे। पूर्व पीएम लोगों से मिलते हुए मंच की तरफ बढ़ रहे थे।

 

करीब 10 बजकर 10 मिनट पर एक लड़की राजीव गांधी के पास आई। उस लड़की ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया और पांव छूकर आशीर्वाद लेने के लिए नीचे झुकी। तभी धनु नाम की लिट्टे की इस मानव बम ने अपने शरीर पर पहनी हुई आरडीएक्स लगी हुई बेल्ट में धमाका कर दिया।

 

इस आत्मघाती हमले में धनु ने राजीव गांधी सहित 15 लोगों को मार डाला। इस धमाके में 43 अन्य भी लोग घायल हो गए। धमाका इतना जोरदार था कि वहां पर हाहाकार मच गया। हरिबाबू नाम के एक फोटोग्राफर ने अपने कैमरे में इस हत्याकांड को कैद कर लिया।

 

 

हरिबाबू विस्फोट के समय राजीव की फोटो खींच रहे थे। हालांकि इस धमाके में हरिबाबू की भी मौत हो गई पर उनका कैमरे व फिल्म को घटनास्थल से बरामद किया गया था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर के रख दिया। पूरा देश स्तब्ध था।

 

 

केंद्र में सत्तारूढ़ चंद्रशेखर सरकार ने मामले की जांच तुरंत सीबीआई को सौंप दी। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया कि यह काम श्रीलंका के कुख्यात आतंकी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का है। सीबीआई की विशेष जांच टीम ने भी इसमें लिट्टे का हाथ होने की पुष्टि कर दी।

इस हत्याकांड को थेनमोई राजारत्नम उर्फ धनु ने अंजाम दिया था। सीबीआई की विशेष जांच टीम ने इस मामले में साजिश रचने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर टाडा (आतंकवाद और विध्वंसात्मक गतिविधियां) अदालत में पेश किया।

 

केंद्र में सत्तारूढ़ चंद्रशेखर सरकार ने मामले की जांच तुरंत सीबीआई को सौंप दी। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया कि यह काम श्रीलंका के कुख्यात आतंकी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का है। सीबीआई की विशेष जांच टीम ने भी इसमें लिट्टे का हाथ होने की पुष्टि कर दी।

इस हत्याकांड को थेनमोई राजारत्नम उर्फ धनु ने अंजाम दिया था। सीबीआई की विशेष जांच टीम ने इस मामले में साजिश रचने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर टाडा (आतंकवाद और विध्वंसात्मक गतिविधियां) अदालत में पेश किया।

 

28 जनवरी, 1998 को चेन्नई की टाडा कोर्ट ने सभी 26 आरोपियों को दोषी करार देकर मौत की सजा सुनाई। टाडा कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ चार लोगों की ही मौत की सजा को बरकरार रखा और बाकी को अलग-अलग अवधि के लिए जेल की सजा सुनाई।

राजीव गांधी की हत्या में सीधे तौर पर शामिल पांच लोगों में नलिनी ही अभी जिंदा है। नलिनी ने जेल में ही एक बेटी को जन्म दिया था। नलिनी को भी मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नलिनी की बेटी के लिए उस पर दया के लिए याचिका दायर की, जिसके बाद उसकी मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया गया।

 

 

मामले में साजिश के पहलू की जांच जस्टिस मिलापचंद जैन को सौंपी गई। जबकि राजीव गांधी की सुरक्षा में चूक की जांच जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग ने की। जस्टिस जैन की रिपोर्ट में राजीव की हत्या के लिए परोक्ष तौर पर डीएमके को दोषी माना गया।

रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य की डीएमके सरकार ने लिट्टे विद्रोहियों के लिए राज्य को पनाहगाह बना दिया था, जिससे उसे इस हत्याकांड को अंजाम देने में मदद मिली। इस रिपोर्ट का असर यह रहा कि कांग्रेस ने नवंबर 1998 में इंद्रकुमार गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार से समर्थन वापस लेकर उसे गिरा दिया।

 

 

राजीव गांधी को उनकी जान के खतरे के बारे में कई बार आगाह किया गया था। साथ में उन्हें तमिलनाडु न जाने की सलाह भी दी गई थी। डॉ. सुब्रमण्यन स्वामी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि राजीव गांधी से 5 मार्च 1991 और 14 मार्च 1991 को दिल्ली में लिट्टे के दो प्रतिनिधिमंडल मिले थे।

 

इसका उद्देश्य राजीव को यह आश्वस्त करना था कि उनकी जान को कोई खतरा नहीं है और वह तमिलनाडु का दौरा कर सकते हैं। इन बैठकों के बाद राजीव गांधी भी अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ लापरवाह हो गए थे और वे कई बार सुरक्षा घेरा छोड़कर लोगों से मिल लेते थे।

Author : Ashok Chaudhary

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