बलरामपुर:जिले में संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की शुरूआत, 31 जुलाई तक घर घर जाएंगे स्वास्थ्य कार्यकर्ता

  • Author : TVL Team
  • 01 July,2019
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बलरामपुर:जिले में संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की  शुरूआत, 31 जुलाई तक घर घर जाएंगे स्वास्थ्य कार्यकर्ता

जिले में संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की

शुरूआत, 31 जुलाई तक घर घर जाएंगे स्वास्थ्य कार्यकर्ता

-सदर विधायक पल्टूराम व गैसड़ी विधायक शैलेश कुमार सिंह ने फीता काटकर किया शुभारम्भ

– दिमागी बुखार से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास करने की दिलाई ‘दस्तक शपथ’

 

बलरामपुर 01 जुलाई। दिमागी बुखार से जंग की दस्तक के लिए जिले में संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की शुरूआत की गई। सदर विधायक पल्टूराम व गैसड़ी विधायक शैलेश प्रताप सिंह शैलू ने फीता काटकर जिले में अभियान की शुरूआत की। जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान 31 जुलाई तक तथा दस्तक अभियान 15 जुलाई तक चलेगा लेकिन आशा कार्यकर्ताओं की कमी के कारण सदर में भी ये अभियान भी 31 जुलाई तक चलेगा।
सोमवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित शुभारम्भ समारोह में शिरकत करने पहुंचे सदर विधायक पल्टूराम ने कहा कि सरकार दिमागी बुखार के प्रति गम्भीर है। पूर्वांचल के कई जिलों में इसका प्रकोप है। पहले लोग मानकर चलते थे कि इस बीमारी से उन्हे निजाद नहीं मिलेगी लेकिन सरकार ने इस बीमारी को खत्म करने की ठान ली है। यूपी में योगी सरकार के बनने के बाद किये गये प्रयासों से दिमागी बुखार से होने वाली मौतों में कमी आई है। इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों में आपसी समन्वय होना बहुत जरूरी है।

 

गैसड़ी विधायक शैलेश प्रताप सिंह शैलू ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की समाज पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होने कहा कि जितनी जिम्मेदारी परिवार के मुखिया की होती है उतनी ही लोगों के प्रति स्वास्थ्य विभाग की भी है। विधायक ने बिहार के मुजफ्फरपुर से सीख लेते हुए सभी विभागों से अपील की कि स्वास्थ्य विभाग के इस मुहिम में बढ़ चढ़ के हिस्सा लें जिससे यूपी से जेई एईएस जैसी बीमारी का खात्मा हो सके।

 

नोडल अधिकारी व प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष डा. ए.के. पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश में पहले से जेई के केस में कमी आई है और एईएस केस को काबू में करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होने बताया कि मच्छर साफ पानी और ठहरे हुए पानी में पैदा होते हैं इसीलिए पानी को बदलते रहना चाहिए। जिले में शुरू हुए अभियान के लिए आशा व आॅगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पहले से ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। सभी विद्यालयों में प्रार्थना के समय और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को बचाव व उपचार की जानकारी दी जा रही है।

 

डीएमओ मंजुला आनंद ने कहा कि एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम यानि दिमागी बुखार बहुत ही गंभीर बीमारी है। जिसके कारण मृत्यु या अपंगता भी हो सकती है। कोई भी बुखार दिमागी बुखार हो सकता है, इसलिए बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल जे जाना चाहिए। जागरूकता से ही इस बीमारी से लड़ा जा सकता है।

 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने अभियान में लगे सभी 12 विभागों से सहयोगी की अपील की। उन्होने कहा कि विभागों के सहयोग से ही जेई एईएस बीमारी के वायरस को बढ़ने से रोका जा सकता है।

इससे पहले सीएमओ डा. घनश्याम सिंह ने सदर विधायक पल्टूराम व एसीएमओ डा. कमाल अशरफ ने गैसड़ी विधायक शैलेश प्रताप सिंह शैलू को पौधा देकर सम्मानित किया। सभी विधायकों व अधिकारियों ने मौजूद लोगों दिमागी बुखार से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास करने की दस्तक शपथ दिलाई और विधायकों ने फाॅगिंग मशीन को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र के लिए रवाना भी किया। समारोह के दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अरूण कुमार, डीपीएम शिवेन्द्र मणि, डीएचईआईओ अरविंद मिश्रा, आशुतोष, शिताॅशु रजत, अमित कुमार, बृजेन्द तिवारी, राकेश गुप्ता, दयाराम प्रजापति व अजीज अहमद आदि लोग मौजूद रहे।

 

कैसे हो एईएस की पहचान
-तेज बुखार आना, लगातार बुखार बने रहना, शरीर में सुस्ती बने रहना, दांत पर दांत बैठना, शरीर में झटके आना, पूरे शरीर या फिर किसी अंग में ऐठन होना, बोल न पाना और चिकोटी काटने पर भी असर ना होना इस बीमारी के लक्षण हैं।

 

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