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‘मानव मिशन 2022’ की तैयारी जोरों पर:- इसरो प्रमुख

  • 11 January,2019
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‘मानव मिशन 2022’ की तैयारी जोरों पर:- इसरो प्रमुख

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी पहली बार किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने बुधवार को कहा कि यह अभियान इसरो के मानव मिशन 2022 का हिस्सा है और अंतरिक्ष यात्री के इस प्रयाण पर 10,000 करोड़ रुपये से भी कम खर्च होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए चार साल का समय दिया है। सिवन ने कहा, “हमारी योजना है कि मानव (अंतरिक्षयात्री) सात दिनों तक अंतरिक्ष में रहे, उससे कम नहीं।”
इसरो प्रमुख ने कहा, “वह धरती से 300-400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्षयान में रहेंगे।” उन्होंने बताया कि मानव मिशन में इस्तेमाल किया जाने वाला रॉकेट जियोसिन्क्रोमस सैटेलाइट लांच व्हीकल मार्क-3 (जीएसएलवी-एमके-3) होगा।
उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष अभियान के हिस्से के रूप में पहला मानवरहित उड़ान संचालित करने में अभी दो साल लगेगा।
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सिवन ने कहा, “वास्तविक मानव मिशन से पहले दो मानव रहित अंतरिक्ष अभियान होंगे।”
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में हमारे कुछ सपने हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने कुछ सपने देखे हैं। यह घोषणा करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि स्वतंत्रता के 75वें साल यानी 2022 तक हम मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहे हैं।”
मोदी ने कहा, “हम 2022 तक या उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजेंगे।”
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मानव अंतरिक्ष अभियान से पहले अंतरिक्ष यान में पशु को पहली बार भेजने के बारे में पूछे जाने पर सिवन ने कहा कि इसपर अभी विचार-विमर्श किया जाएगा।
मोदी द्वारा तय लक्ष्य और इस दिशा में इसरो द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर सिवन ने कहा, “हमें परियोजना के लिए औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। मानव मिशन परियोजना पर 10,000 करोड़ रुपये से भी कम खर्च होगा।”
उन्होंने कहा, “हम कुछ प्रौद्योगिकी विकसित करने की प्रक्रिया में हैं और कुछ पहले ही विकसित हो चुकी है। हमारी परिकल्पना है कि सब कुछ भारत में ही विकसित किया जाए।”
सिवन के अनुसार, इसरो ने पहले ही क्रू मॉड्यूल और स्केप सिस्टम का परीक्षण कर लिया है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यान में उड़ान भरने वाले अंतरिक्ष यात्री का चयन भारतीय वायुसेना द्वारा किया जाएगा और उनको स्पेसलाइट का प्रशिक्षण विदेशों में दिया जाएगा।
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सिवन ने कहा कि प्रस्तावित मानव अंतरिक्ष यात्रा अभियान के लिए नियंत्रण केंद्रों जैसी कुछ जरूरी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि मोदी की घोषणा एक बड़ी शुरुआत है और इससे पूरे देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ने अंतरिक्ष में मानव को भेजा है।

Author : Ashok Chaudhary
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