वर्ल्ड कप 2019: धोनी के दस्तानों का विवाद शांति से निपटा

  • 09 June,2019
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वर्ल्ड कप 2019: धोनी के दस्तानों का विवाद शांति से निपटा

नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें रविवार को जब ओवल के मैदान पर उतरीं तो सबकी उत्सुकता महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों में भी.

लेकिन यह विवाद बहुत शांति से ख़त्म हो गया है.

कई भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की इच्छा के बावजूद महेंद्र सिंह धोनी इस मैच में ‘रेजिमेंटल डैगर’ के निशान वाले दस्ताने आईसीसी की आपत्ति के कारण नहीं पहन पाए.

यह निशान भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज़ का है और इसे बलिदान का प्रतीक माना जाता है.

हालांकि धोनी ने रविवार सुबह ही संकेत दे दिया था कि वह आईसीसी के नियमों का सम्मान करते हुए दस्ताने बदलने वाले हैं. सुबह जब वह अभ्यास के लिए बाहर आए तो उन्होंने हरे रंग के नए दस्ताने पहने हुए थे. इन पर वह निशान नहीं था.

 

धोनी को भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक दी गई है.

दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ मैच में धोनी ‘रेजिमेंटल डैगर’ के निशान वाले दस्ताने पहनकर उतरे थे. लेकिन आईसीसी ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया था.

हालांकि इस विवाद पर बीसीसीआई की शुरुआती प्रतिक्रिया यह थी कि वह आईसीसी से इसकी इजाज़त लेने की कोशिश करेगा.

 

क्या कहते हैं आईसीसी के नियम

आईसीसी के नियम D.1 के मुताबिकः
खिलाड़ी के कपड़ों और खेल की अन्य वस्तुओं पर राष्ट्रीय चिह्न, व्यवसायिक लोगो, प्रतियोगिता का लोगो, उत्पाद को बनाने वाली कंपनी का लोगो, बल्ले के स्पॉन्सर का लोगो, किसी चैरिटी या गैर-व्यवसायिक लोगो को तय नियमों के आधार पर ही लगाने की अनुमति मिलती है.

अगर कोई भी खिलाड़ी इन तय नियमों से बाहर कोई अन्य प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन करता है तो मैच के अधिकारी, जैसे ही उस पर ग़ौर करेंगे, वो उस प्रतीक चिह्न को हटाने या छिपाने का आदेश दे सकते हैं.

 

 

आईसीसी के नियम L के मुताबिक
अगर तय नियमों के बाहर किसी विशेष प्रतियोगिता या मैच के लिए कोई टीम अलग से प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल करना चाहती है तो इसके लिए उस टीम के क्रिकेट बोर्ड को मैच या सिरीज़ शुरू होने से पहले आईसीसी से उसकी अनुमति लेनी होगी.

 

 

आईसीसी के नियम G.1 के मुताबिकः
किसी खिलाड़ी या टीम के अधिकारी को ऐसा कोई भी संदेश दर्शाने वाला कपड़ा या अन्य चीज़ मैच के दौरान अपने पास रखने की इजाज़त नहीं है जिसके बारे में आईसीसी को नहीं पता हो. इसके अलावा आईसीसी किसी भी खिलाड़ी या अधिकारी को ऐसा उत्पाद मैदान में ले जाने की इजाज़त नहीं दे सकता जिससे किसी तरह का राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश दिया जा रहा हो.

इस मामले में आईसीसी के पास अंतिम निर्णय करने का अधिकार रहेगा. अगर किसी भी तरह के प्रतीक चिह्न को देश का क्रिकेट बोर्ड इजाज़त दे देता है लेकिन आईसीसी उस पर आपत्ति दर्ज करवाता है तो उस प्रतीक चिह्न के साथ अंतरराष्ट्रीय मैच में उतरने की इजाज़त नहीं मिलेगी.”

Author : Ashok Chaudhary

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