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वेनेजुएला की गिरती अर्थव्यवस्था से हाहाकार;

  • 30 January,2019
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वेनेजुएला की गिरती अर्थव्यवस्था से हाहाकार;

नई दिल्ली: 

वेनेजुएला के हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। वहां की मौजूदा राजनीतिक स्थिति ने भी हालात को बेकाबू करने का काम किया है। वर्तमान में वहां पर निकोलस मादुरो और जुआन गुएडो के बीच जबरदस्‍त खींचतान चल रही है। वहीं अमेरिका ने यहां के राजनी‍तिक संकट की आग को भड़काने में घी का काम किया है। आपको बता दें कि गुएडो ने यहां पर खुद को राष्‍ट्रपति घोषित कर सेना से मादुरो का हुक्‍म मानने से इंकार करने की अपील की है। यहां के बिगड़े हालात का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि राजधानी में जगह-जगह राष्‍ट्रपति मादुरो के खिलाफ लोग लामबंद होकर सड़क पर उतर रहे हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान इसको लेकर हुई झड़पों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इस तरह की झड़पें वेनेजुएला में पहली बार देखने को नहीं मिल रही है। 2017 में भी अप्रैल से जुलाई के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच हुई झड़पों में 125 लोगों की मौत हो गई थी। विपक्ष के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। विपक्ष के नेता तो गुएडो को भी गिरफ्तार किए जाने की आशंका जता रहे हैं।

 

 

वेनेजुएला पर बंटे हैं देश

देश में उभरे राजनीतिक संकट में अमेरिका ने वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में विपक्षी नेता जुआन गुएडो को मान्यता दी, जिसके बाद मादुरो ने अमेरिका से सभी संबंध तोड़ लिए हैं। उन्‍होंने अमेरिकी राजदूत को देश छोड़ने के लिए 72 घंटे का वक्‍त भी दिया है। इसके अलावा सात दक्षिण अमेरिकी देश-ब्राजील, कोलंबिया, चिली, पेरू, इक्वेडोर, अर्जेंटीना और पराग्वे ने भी जुआन को अंतरिम राष्ट्रपति माना है। वहीं कनाडा ने भी उन्‍हें ही समर्थन देने का एलान कर दिया है। इसके अलावा यूरोपीय संघ वहां पर दोबारा चुनाव करवाने के पक्ष में है। ‘द ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ अमेरिकन स्टेट’ ने भी गुएडो के राष्ट्रपति पद की दावेदारी को समर्थन दिया है। हालांकि साल 2017 में वेनेजुएला इस संगठन से ख़ुद को अलग कर चुका है। मादुरो के समर्थक देशों की बात करें तो इसमें मेक्सिको, बोलिविया और क्यूबा शामिल है।

 

कौन है जुआन गुएडो

आपको यहां बता दें कि खुद को राष्‍ट्रप‍ति घोषित करने वाले जुआन को इससे पहले कोई नहीं जानता था। वह इसी माह संसद में विपक्ष के नेता बने हैं। जुआन के मुताबिक, उनके पास देश में दोबारा चुनाव होने तक अंतरिम राष्‍ट्रपति बने रहने का संवैधानिक अधिकार है। जहां तक जुआन की बात है, तो उन्‍होंने छात्र राजनीति के दौरान मादुरो के राजनीतिक गुरू ह्यूगो चावेज के खिलाफ़ प्रदर्शन किया था। ह्यूगो चावेज ने ही निकोलस मादुरो को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर चुना था।

 

 

गिर रही अर्थव्‍यवस्‍था
बहरहाल, वेनेजुएला में व्‍याप्‍त अराजकता के बीच वहां की अर्थव्‍यवस्‍था लगातार गिर रही है। आलम ये है कि वहां पर लोगों को खाने के भी लाले पड़ रहे हैं। तेल पर टिकी इस देश की अर्थव्‍यवस्‍था का हाल पिछले काफी समय से खराब चल रहा है। वर्तमान में यहां के एक हजार वेनेजुएला बोलवियर की कीमत यदि ब्रिटेन के पाउंड से आंकी जाए तो यह महज 76 पाउंड ही रह गई है। वहीं यूरो में इसकी कीमत 8888, आस्‍ट्रेलियन डॉलर में 141 और अमेरिकी डॉलर में इसकी कीमत महज 100 डॉलर है। यहां के बिगड़ते मौजूदा हालात का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि साढ़े पांच हजार रुपये में एक किलो लहसुन, सात हजार रुपये किलो शकरकंद मिल रही है। ऐसा ही हाल दूसरी खाने की चीजों का भी है। सभी की कीमत आसमान छू रही हैं।

 

 

13 लाख तक पहुंची मुद्रास्फिति की दर
वेनेजुएला में मौजूदा समय में खराब होती अर्थव्‍यवस्‍था के बीच लोगों के पास या तो खाने का पैसा नहीं है या फिर इतने हैं कि उनसे वह कुछ खरीद नहीं पा रहे हैं। मौजूदा समय में यहां पर मामूली ब्रेड की कीमत भी सैकड़ों में चली गई है। बीते समय में कुछ जगहों पर खाने को लेकर भी संघर्ष साफतौर पर देखा गया है। वहीं बीते कुछ वर्षों के दौरान वेनेजुएला से लाखों लोग पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। वेनेजुएला की सीमा पश्चिम में कोलंबिया, पूर्व में गुयाना और दक्षिण में ब्राजील से मिलती है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात तेल भंडार है और यह तेल के दुनिया के अग्रणी निर्यातकों में से एक है। इसके बाद ही इसको 2017 तक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने दिवालिया घोषित कर दिया था। हाल ये है कि बीते वर्ष दिसंबर में यहां पर मुद्रास्‍फीति की दर करीब दस लाख फीसद तक पहुंच गई है। इसका अंदाजा अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने अगस्‍त में ही लगा लिया था। वर्तमान में यह 13 लाख फीसद है। दरअसल पिछले वर्ष अगस्‍त में राष्‍ट्रपति मादुरो ने देश की मुद्रा बोलवियर का नाम बदलकर ‘सॉवरेन बोलवियर’ कर दिया था। इसके अलावा इसका 95 फीसद अवमूल्यन भी किया गया था। इसके बाद से ही लगातार देश में मुद्रास्‍फीति की दर बेतहाशा बढ़ रही है।

Author : Ashok Chaudhary
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