संतकबीरनगर में सद्गुरु कबीर का 621वां प्राकट्योत्सव मनाया

  • Author : Ashok Chaudhary
  • 17 June,2019
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संतकबीरनगर में सद्गुरु कबीर का 621वां प्राकट्योत्सव मनाया

संतकबीरनगर: मगहर स्थित निर्वाण स्थली कबीर चौरा मठ में रविवार को सदगुरु कबीर साहेब का 621वां प्राकट्य दिवस मनाया गया। प्राकट्योत्सव का शुभारम्भ का बीजक पाठ व ध्वाजारोहण से किया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने उनके बताए मार्गों पर चलने का संकल्प लिया।

 

प्राकट्योत्सव दिवस पर प्रात: काल मठ पर जुटे संत-महंत व भक्तों ने बीजक पाठ किया। हवन करने के बाद उनकी समाधि पर नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर महन्त विचार दास ने कहा कि कबीर के पद चिन्हों और उनके बताए हुए मार्गों का अनुशरण कर देश व समाज को सुधारा जा सकता है। कबीर साहेब ने ऊंच-नीच, भेदभाव, जात-पात व छुआछूत की भावनाओ से इतर लोगों को मानवता का सन्देश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का जीवन एक स्वरूप है। उसे परमात्मा को अपने अन्दर ढूंढ़ना चाहिए। ऐसे करने वाले व्यक्ति को सुख व शान्ति की प्राप्ति होती है और वह सुखमय जीवन व्यतीत करता है। कबीर साहेब ने कभी लोगों को बांटने का कार्य नहीं किया। बल्कि पूरा जीवन लोगों को एक सूत्र में बांधने का प्रयत्न करते रहे।

 

कथनी नहीं करनी में विश्वास करते थे कबीर :
पूर्व सेवानिवृत्त अधिषाशी अधिकारी पारसनाथ ने कहा कि सदगुरु कबीर कथनी में नही, करनी में विश्वास करते थे। जब समाज में पूर्णरूप से अंधविश्वास का बोलबाला था। उस समय भ्रान्ति थी कि काशी में मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती और मगहर में मरने पर नरक में स्थान मिलता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए संत कबीर ने अपना शरीर मगहर में त्यागा और निर्वाण को प्राप्त हुए। इस अवसर पर केशव दास, अरविन्द दास सहित तमाम संतजन व श्रद्धालु मौजूद रहे।

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