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Bhai Duj 2018: भाई दूज को क्यों कहते हैं यम द्वितीया, जानिए इस दिन क्या करें, क्या न करें

  • 08 November,2018
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Bhai Duj 2018: भाई दूज को क्यों कहते हैं यम द्वितीया, जानिए इस दिन क्या करें, क्या न करें

नई दिल्ली: पौराणिक कथा अनुसार सूर्य पुत्री यमी अर्थात् यमुना ने अपने भाई यम को कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपने घर निमन्त्रित कर अपने हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन कराया। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपनी बहन यमुना से एक वरदान मांगने को कहा।

 

तब यमुना ने अपने भाई यम से यही वरदान मांगा कि आज के दिन जो बहन अपने भाई को निमन्त्रण कर अपने घर बुलाएं, उन्हें भोजन कराएं और उनके माथे पर तिलक करें तो उन्हें आपका अर्थात् यम का भय ना हो। ऐसा कहने पर यमराज ने अपनी बहन को तथास्तु कहकर यह वरदान प्रदान किया। अत: आज के दिन जो भाई अपनी बहन के यहां भोजन करता है उन भाई-बहनों को यम का भय नहीं होता।

 

 

क्या करें:
भाईदूज के दिन बहनें अपने भाई को निमन्त्रित कर उन्हें अपने हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन कराएं और तिलक करें। भोजन के उपरान्त अपने भाई को ताम्बूल (पान) भेंट करें। मान्यता है कि ताम्बूल भेंट करने से बहनों का सौभाग्य अखण्ड रहता है।

 

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क्या ना करें:
शास्त्रानुसार आज के दिन जो भाई अपने घर पर ही भोजन करता है उसे दोष लगता है। यदि बहन के घर जाना सम्भव ना हो सके तो किसी नदी के तट या गाय को अपनी बहिन मानकर उसके समीप भोजन करना श्रेयस्कर रहता है।

 

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यमुना स्नान:
ऐसी मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन जो भाई-बहन यमुना स्नान करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं होता एवं उन्हें यमलोक नहीं जाना पड़ता।

 

 

 

भैया दूज के दिन ऐसे करें पूजा: भैया दूज वाले दिन बहने आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। इस चौक पर अपने भाई को बिठाकर उनके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले बहन अपने भाई के हाथों पर चावलों का घोल लगाए। उसके ऊपर सिंदूर लगाकर फूल, पान, सुपारी तथा मुद्रा रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोले ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’

 

 

इसके उपरांत बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर कलावा बांधे और भाई के मुंह में मिठाई, मिश्री और माखन लगाएं। घर पर भाई सभी प्रकार से प्रसन्नचित्त जीवन व्यतीत करें, ऐसी मंगल कामना करें। उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करें। उसके उपरांत यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर घर की दहलीज के बाहर रखें। जिससे भाई के घर में किसी प्रकार का विघ्न-बाधां न आए और वह सुखमय जीवन व्यतीत करें।

 

 

Author : kapil patel
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