छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल, जानें कौन हैं भूपेश बघेल

  • Author : kapil patel
  • 16 December,2018
  • 583 Views
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल, जानें कौन हैं भूपेश बघेल

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र बघेल राज्य के मुख्यमंत्री होंगे|रायपुर में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, पर्यवेक्षक बनाए गए मल्लिकार्जुन खड़गे ने भूपेश बघेल के नाम का औपचारिक एलान किया। कांग्रेस विधायक दल ने भूपेश बघेल को सदन का नेता चुना है। आइए जानते हैं कि आखिर किन वजहों से वह सीएम की रेस के बने सिकंदर……

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का सबसे ज्यादा श्रेय बघेल को दिया गया। बघेल ने नगरीय निकाय से लेकर विधानसभा चुनाव तक जिस तरह रणनीति बनाने का काम किया उसका फायदा कांग्रेस को प्रचंड जीत के रूप में मिला। भूपेश बघेल ने प्रदेश में संगठन के मजबूत करने का काम किया है। 17 दिसंबर को राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह होना तय है।

 

 

 

 

अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया

भूपेश बघेल को ऐसे वक्त में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली, जब राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं का अभाव था| झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला. एक समय बीजेपी की बी टीम कही जाने वाले अजीत जोगी  और उनके बेटे अजीत जोगी तक को उन्होंने पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा कर अपने रुख से स्पष्ट कर दिया था कि वह कांग्रेस को मजबूत करने में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे|

 

 

 

रमन सिंह सरकार के खिलाफ कड़े तेवर

भूपेश बघेल अपने आक्रामक तेवर के लिए पहचाने जाते रहे हैं| यही वजह है कि एक ओर जहां अजीत जोगी रमन सिंह के प्रति नरम रुख अपनाकर रहा करते तो, भूपेश इसके ठीक उलट. इसी नरम रुख की वजह से भूपेश ने अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया. छत्तीसगढ़ के कई मुद्दों को लेकर भूपेश बघेल सड़कों पर उतरे और रमन सिंह सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की. रमन सरकार के कई कथित घोटालों के खिलाफ कई हिस्सों में बघेल ने पदयात्रा निकालकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा

 

 

 

 

पार्टी में फूंकी जान 

भूपेश बघेल ने झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला. विधानसभा चुनाव से पहले बघेल ने प्रदेश के कई हिस्सों में पदयात्रा की, कार्यकर्ताओं को जोड़ा, कांर्यकर्ताओं में जान फूंकी और रमन सरकार के खिलाफ में हवा बनाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरा. जब एक वक्त लग रहा था कि रमन सिंह सरकार आसान से सत्ता से बाहर नहीं हो पाएगी, ऐसी स्थिति में उन्होंने सरकार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा.

 

 

 

 

जातिगत समीकरण

भूपेश बघेल के पक्ष में जातिगत समीकरण भी बैठा क्योंकि बघेल कुर्मी जाति से आते हैं, जिनकी हिस्सेदारी राज्य की ओबीसी आबादी में लगभग 36 फीसद है. इतना ही नहीं, इस बार के चुनाव में उनकी भागीदारी भी अच्छी रही है. यही वजह है कि अन्य दावेदारों में बघेल आगे निकल गए|

 

 

 

भूपेश बघेल का सियासी सफर

 

भूपेश बघेल मूल रूप से किसान हैं| भूपेश बघेल का जन्म 23 August 1961 को हुआ था| भूपेश बघेल कुर्मी समाज से आते हैं। राजनीति  शुरुआत हुई यूथ कांग्रेस के साथ। 1990 से 94 तक वह जिला युवक कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे। 1993 से 2001 तक मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के निदेशक रहे। भूपेश बघेल 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने पर पाटन से विधानसभा पहुंचे।

 

 

 

भूपेश बघेल मध्यप्रदेश में दिग्विजय सरकार  मंत्री रह चुके है। छत्तीसगढ़ गठन के बाद जोगी सरकार में मंत्री रह चुके है| 2003 में सत्ता से बाहर होने पर उन्हें विपक्ष का उप नेता बनाया गया। 2014 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।  इस बार बघेल ने पाटन सीट से बीजेपी के मोतीलाल साहू को 26.477 मतों से पराजित किया। 2013 में 9343 वोट से भाजपा के विजय बघेल से जीते थे।  बघेल को ओबीसी का बड़ा नेता माना जाता है।

 

 

 

 

 

 

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