Time:
Login Register

एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी के नाम को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस का आरोप—MEA का कड़ा खंडन

By tvlnews January 31, 2026
एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी के नाम को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस का आरोप—MEA का कड़ा खंडन

नई दिल्ली: एपस्टीन फाइल्स को लेकर भारत की राजनीति में उबाल

अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी तथाकथित “एपस्टीन फाइल्स” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के कथित उल्लेख को लेकर भारत की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन्हें “एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत बातें” बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।

यह विवाद उस समय सामने आया जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) से संबंधित दस्तावेज़ों में एपस्टीन के एक ई-मेल में प्रधानमंत्री मोदी का उल्लेख है।


कांग्रेस का आरोप: “राष्ट्रीय गरिमा का सवाल”

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा कि 9 जुलाई 2017 को लिखे गए एक ई-मेल में एपस्टीन ने दावा किया था—

“The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president… IT WORKED!”

कांग्रेस का कहना है कि यह ई-मेल प्रधानमंत्री मोदी की जुलाई 2017 की इज़राइल यात्रा के ठीक तीन दिन बाद लिखा गया था। पार्टी ने यह भी जोड़ा कि इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी 25–26 जून 2017 को अमेरिका में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे।

कांग्रेस के अनुसार, इन तारीख़ों को जोड़ने पर यह “संकेत” मिलता है कि प्रधानमंत्री ने जून 2017 की अमेरिका यात्रा के दौरान एपस्टीन से मुलाकात की और कथित रूप से सलाह ली। पार्टी ने इसे “भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर मामला” बताते हुए प्रधानमंत्री से सार्वजनिक जवाब की मांग की।


सवालों की लंबी सूची

कांग्रेस ने तीन मुख्य सवाल उठाए हैं:

  1. प्रधानमंत्री मोदी, जेफरी एपस्टीन से किस प्रकार की सलाह ले रहे थे?

  2. अमेरिकी राष्ट्रपति के “फायदे” के लिए इज़राइल यात्रा में ऐसा क्या किया गया, जैसा ई-मेल में दावा किया गया?

  3. एपस्टीन के शब्दों में “IT WORKED!” का क्या अर्थ है?

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि किसी ऐसे व्यक्ति—जिसे अमेरिकी अदालतों ने गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया—के साथ किसी भी तरह का निकट संबंध भारत के लिए “शर्मनाक” है।


विदेश मंत्रालय का स्पष्ट खंडन

इन आरोपों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि उसने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े ई-मेल पर आधारित खबरें देखी हैं, लेकिन:

“जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री का इज़राइल दौरा पूरी तरह आधिकारिक और सार्वजनिक था। ई-मेल में इसके अलावा कही गई बातें एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत और बेकार रुमिनेशन हैं, जिन्हें पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।”

MEA ने यह भी रेखांकित किया कि किसी अपराधी के निजी दावे या ई-मेल को आधिकारिक तथ्य मानना न तो उचित है और न ही जिम्मेदार पत्रकारिता के अनुरूप।


तथ्य बनाम दावा: क्या कहती है पृष्ठभूमि?

  • इज़राइल यात्रा 2017: प्रधानमंत्री मोदी की 4–6 जुलाई 2017 की इज़राइल यात्रा ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थी। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक इज़राइल यात्रा थी, जिसकी व्यापक कवरेज अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हुई।

  • एपस्टीन का रिकॉर्ड: जेफरी एपस्टीन को अमेरिका में यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया जा चुका है। उसकी विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

  • दस्तावेज़ों की प्रकृति: अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए कई दस्तावेज़ प्राथमिक साक्ष्य नहीं, बल्कि ई-मेल, नोट्स और अनवेरिफ़ाइड कम्युनिकेशन का संग्रह हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होती है।



कानूनी और कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी ऐसे ई-मेल को—जो एक दोषी अपराधी द्वारा लिखा गया हो—सीधे तथ्य मान लेना जोखिम भरा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों में किसी भी आरोप की पुष्टि स्वतंत्र, ठोस और बहुस्तरीय जांच से ही हो सकती है।

मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला राजनीति, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सूचना की सत्यता—तीनों के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील है, इसलिए निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक तथ्यों पर टिके रहना आवश्यक है।



फिलहाल, यह विवाद सियासी बयानबाज़ी और आधिकारिक खंडन के बीच अटका हुआ है। कांग्रेस ने जहां प्रधानमंत्री से जवाब की मांग की है, वहीं सरकार ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक विमर्श में यह मुद्दा और तेज़ होने की संभावना है।

एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के कथित उल्लेख को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि 2017 के एक ई-मेल में एपस्टीन ने प्रधानमंत्री से मुलाकात और सलाह का जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत बातें बताया है। मामला अब तथ्य, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के बीच बहस का विषय बन गया है।

नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक बयानों, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित है। किसी भी आरोप को तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए जब तक उसकी स्वतंत्र पुष्टि न हो।



Powered by Froala Editor

You May Also Like