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FATF की वो सिफारिशें, जिनसे आतंकियों पर कार्रवाई को मजबूर हुआ PAK

  • 07 March,2019
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FATF की वो सिफारिशें, जिनसे आतंकियों पर कार्रवाई को मजबूर हुआ PAK

नई दिल्ली:भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सिफारिशों को लागू करने के मामले में पाकिस्तान में डर कायम हुआ है. इस वजह से ही पाकिस्तान आतंकियों पर कुछ कार्रवाई के लिए मजबूर हुआ है. पाकिस्तान के वित्त सचिव आरिफ अहमद खान ने चेतावनी दी है कि अगर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया तो पाकिस्तान को कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों से गुजरना होगा.
पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक उन्होंने कहा कि एफएटीएफ की सिफारिशों के आधार पर पाकिस्तान को आगे कार्रवाई करनी होगी. उन्होंने इस बात की आशंका जाहिर की कि यदि एफएटीएफ की सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया और लागू नहीं किया गया तो वह आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर सकता है.

 

 

गौरतलब है कि एफएटीएफ दुनिया में आतंकवादी फंडिंग पर नजर रखने वाली एक संस्था है जिसका मुख्यालय पेरिस में हैं. भारत यह चाहता है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की ब्लैकलिस्ट में रखा जाए. अगर ऐसा हुआ तो पहले से ही बदहाल पाकिस्तान पर तगड़ी आर्थ‍िक चोट पड़ेगी. एफएटीएफ के इंटरनेशनल कोऑपरेशन रीव्यू ग्रुप (ICRG) ने हाल की एक बैठक में आतंकियों पर पाक के एक्शन प्लान की समीक्षा की है. लेकिन समूह जनवरी 2019 तक तय डेडलाइन में पाकिस्तार के कार्य से संतुष्ट नहीं हुआ. पाकिस्तान का दावा है कि उसने एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने (AML/CFT) जैसी कार्रवाई का दावा किया है.
एफएटीएफ ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि वह, ‘सहजता से अपने एक्शन प्लान को पूरा करे, खासकर जिनका टाइमलाइन मई 2019 तक है.’ FATF जून 2019 में पाकिस्तान की प्रगति की अगली समीक्षा करेगा.
पाकिस्तान इस एक्शन प्लान को कितनी सफलता से लागू करता है इसके फिजिकल वैरिफिकेशन के द्वारा एफएटीएफ सितंबर तक यह निर्णय लेगा कि पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर करना है या ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखना है.

पाकिस्तान के लिए ये हैं 10 टारगेट
एफएटीएफ ने पाकिस्तान के लिए 10 बिंदुओं वाला टारगेट सेट कर रखा है. पाकिस्तान को इन टारगेट को पूरा करने के लिए मई 2019 तक का टाइम दिया गया है. पुलवामा हमले के बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भारी दबाव की वजह से एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में बरकरार रखा है. पाकिस्तान के लिए दस बिंदु वाले टारगेट इस प्रकार हैं-
1. इस बात को प्रदर्श‍ित करें कि आतंकवाद के फंडिंग के जोखिम को समुचित तरीके से पहचाना गया है, उसका आकलन किया गया है और जोखिम-संवेदनशीलता के आधार पर उनका निरीक्षण किया गया है.
2. यह दिखाएं कि एंटी मनी लॉड्रिंग ऐंड काउंटरिंग फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म एक्ट 2009 (AML/CFT Act) का उल्लंघन के मामलों में उपचरात्मक कार्रवाई और प्रतिबंध लागू किए गए हैं और इन कार्यों का वित्तीय संस्थाओं के द्वारा AML/CFT के अनुपालन पर कोई असर पड़ा है.
3. यह दिखाएं कि अवैध धन या वैल्यू ट्रांसफर सर्विस की पहचान और प्रवर्तन कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी सहयोग कर रहे हैं और एक्शन ले रहे हैं.
4. यह सुनिश्चित करें कि करेंसी की अवैध आवाजाही और कैश कोरियर्स की पहचान सुनिश्चित हो.
5. आतंकी वित्तपोषण से निपटने के मामले में प्रांतीय और संघीय अथॉरिटीज के बीच इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन सुनिश्चित करें.
6. यह सुनिश्चित करें कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां टेरर फाइनेंसिंग की गतिविधियों को पकड़ रही हैं.
7. यह सुनिश्चित करें कि टेरर फाइनेंसिंग मुकदमों के द्वारा टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लग सके.
8. ऐसी संपत्तियों की पहचान करें और उन्हें जब्त करें जो टेरर फंडिंग को बढ़ावा देते हों.
9. यह सुनिश्चित करें कि जो भी इन प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें आपराधिक मुकदमों के द्वारा दंड मिले.
10. फंडिंग से चल रहे आतंकियों के अड्डों या संस्थानों को उनके संसाधनों से वंचित करें.

Author : Ashok Chaudhary
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