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अदालत की शख्ती के बाद पुलिस ने वापस की गाड़ी

  • 10 February,2019
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अदालत की शख्ती के बाद पुलिस ने वापस की गाड़ी

गोरखपुर: अपनी बाइक रिलीज कराने के लिए दोबारा अदालत पहुंचे मो. राशिद को शनिवार को उनकी बाइक मिल गई। अदालत की सख्ती के बाद इंस्पेक्टर नीरज कुमार राय ने उन्हें थाने पर बुलाकर बाइक दी। अदालत के सख्त तेवर के बाद बाइक तो मिल गई पर अभी दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई की तलवार लटक ही रही है। अदालत ने तीन दिन में कार्रवाई के साथ एसएसपी से रिपोर्ट मांगी है।

 

झंगहा के दुबौली गांव निवासी मो. राशिद की हिम्मत की लोग दाद दे रहे हैं। उन्होंने पुलिस के रिश्वतखोरी और रंगबाजी के खिलाफ लड़ाई लड़कर बिना एक रुपये घूस दिए अपनी बाइक हासिल की और सबको एहसास भी कराया कि अगर सच्चाई हो तो फिर विरोधी कितना भी मजबूत क्यों न हो जीत सच की ही होती है।

 

मो. राशिद के मामले में अदालत की सख्ती के बाद शनिवार को चौरीचौरा थाने पर हड़कम्प मचा रहा। नतीजा यह हुआ कि इंस्पेक्टर ने मो. राशिद को फोन कर थाने पर बुलाया और बाइक ले जाने के लिए कहा। शाम चार बजे मो. राशिद अपने भाई के साथ थाने पहुंचे और बाइक रिलीज कराई। इससे पहले जब कोर्ट का आदेश लेकर वे थाने गए थे तब आदेश की मूल कापी न होने की बात कहते हुए इंस्पेक्टर ने लौटा दिया था।

 

यह था पूरा मामला

मो. राशिद की बाइक से 19 जनवरी को सरैया के पास हर्षिता नामक छात्रा को चोट लग गई थी। स्थानीय लोगों ने बाइक अपने कब्जे में ले लिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की जांच के बाद कहीं अंदरूनी चोट नहीं मिली। राशिद ने हर्षिता के इलाज का पूरा खर्च उठाया। इसलिए उसने एफआईआर नहीं कराई। थाने पर पहुंचे हर्षिता के पिता प्रमोद ने राशिद से समझौते की बात कही। पुलिसवालों ने हर्षिता के घर से थाने पर बाइक मंगवाई। यहीं से खेल शुरू हुआ और बाइक छोड़ने के बदले उनसे 5000 रुपए रिश्वत मांगी जाने लगी। उन्होंने यह रिकॉर्ड कर लिया और एसएसपी को सुना दिया। एसएसपी ने 25 जनवरी को इस मामले में लिप्त दीवान सुनील यादव को लाइन हाजिर और 100 के सिपाही शत्रुघन को निलम्बित करते हुए मामले की सीओ से जांच शुरू करा दी। मो. राशिद का आरोप है उसी के बाद से पूरे थाने की पुलिस नाराज हो गई। बाइक छोड़ने की जगह उसे लावारिस में दाखिल कर दी।

 

 

पुलिस के खिलाफ लड़ाई लड़कर छुड़ाई बाइक

 

तब राशिद कोर्ट गए और वहां से 31 जनवरी को रिलीज आर्डर ले आए पर थाने वालों ने फिर भी बाइक नहीं छोड़ी और यह कह दिया कि अब बाइक सड़ जाएगी पर छोड़ेंगे नहीं। राशिद फिर भिड़ गए और दोबारा अदालत पहुंच गए। उन्होंने पांच फरवरी को बाकायदा शपथ पत्र देकर पूरा वाक्या बयान किया। अदालत को भी यह नागवार गुजरा कि उसके आदेश को नहीं माना गया। शुक्रवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी यासमीन अकबर की कोर्ट ने इस मामले में सख्त आदेश दिया।

 

कोर्ट ने एसएसपी से कहा कि अपने स्तर से प्रकरण की जांच कराते हुए जांच आख्या न्यायालय में तीन दिन के अंदर प्रस्तुत करें तथा संबंधित दोषी कर्मचारी के विरूद्ध कार्रवाई करें और मो. राशिद की मोटरसाइकिल उनके पक्ष में अवमुक्त करें। कानून के रखवाले अंधे हो सकतें हैं लेकिन कानून नहीं।

 

 

 

 

Author : Ashok Chaudhary
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