इन सवालों का जवाब देने पर अस्थमा का चल जाएगा पता, जानें कैसे……

  • Author : kapil patel
  • 20 December,2018
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इन सवालों का जवाब देने पर अस्थमा का चल जाएगा पता, जानें कैसे……

नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: वैज्ञानिकों की खोज ने जीवन को सरल बनाया है। इन अविष्‍कारों के चलते आज कई जटिल और गंभीर बीमारियां का बेहतरीन इलाज संभव और सुलभ हुआ है। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने एक एसे एप की खोज की है, जो बच्‍चों में पनप रहे अस्‍थमा के जाखिम को कम करेगा।

यह एप पलक झपकते ही बच्‍चे के अंदर पनप रहे अस्‍थमा की सूचना देगा। इससे आप अस्‍थमा अटैक के खतरे से पहले से सजग हो सकते हैं। यह एप ‘गूगल प्‍ले स्‍टोर’ या ‘एपल प्‍ले स्‍टोर’ पर उपलब्‍ध है। अगर आप इस एप के लिए इच्‍छुक हैं तो आप ‘गूगल प्‍ले स्‍टोर’ या ‘एपल प्‍ले स्‍टोर’ पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस एप का नाम PARS (PARS) रखा है। इस एप को आपआसनी से अपने स्‍मार्टफोन में डाउनलोड कर सकते हैं। यह एप आपसे छह सवाल पूछेगा, जिसका उत्‍तर आपको हां या नहीं में देना है। आपके छह उत्‍तरों के बाद यह एप अस्‍थमा के बारे में आपका स्‍कोर बोर्ड तैयार करेगा। इस स्‍कोर बोर्ड से आप तय कर सकेंगे कि आप में अस्‍थमा है कि नहीं। ये सवाल मौसम, एक्जिमा और सांस में होने वाली खरखराहट से संबंधित होंगे। सवालों में माता-पिता की अस्‍थमा प्रोफाइल की जानकारी भी शामिल है। इन जानकारियों के बाद ये टूल आपको एक स्‍कोर कार्ड दिखाएगा।

इस स्‍कोर से यह तय होगा कि अस्‍थमा किस स्‍टेज में है। इससे यह भी ये सूचना मिलेगी कि सात वर्ष की उम्र में यह अस्‍थमा किस स्‍टेज में होगा। इस एप को साउथेम्प्टन अस्पताल और सिनसिनाटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।

इस एप को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों के दल में साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ रमेश कुरुकुलार्ची भी शामिल हैं। इसकी खास बात यह है कि इसमें रक्त परीक्षण की जरूरत नहीं होती है। इसमें कम जोखिम के साथ बच्चों में अस्थमा के विकास की भविष्यवाणी करने की बेहतर क्षमता है।

स्‍कोर से तय होता है अस्‍थमा

दरअसल, एप में पूछे गए छह सवाल ही आपके स्‍कोर का निर्धारण करते हैं। यानी इस स्‍कोर के आधार पर यह तय किया जाता है कि आपमें अस्‍थमा होने के कितने फीसद चांस हैं। शून्य के स्कोर वाले बच्चों को सात साल की उम्र से पहले अस्थमा होने की आंशका प्रबल होती है। इसी तरह से अगर कोई बच्‍चा सभी छह मानदंडों को पूरा करता है तो उसमें अस्‍थमा विकसित होने के 79 फीसद ज्‍यादा चांस रहते हैं। यदि छह जोखिमों में से दो को पूरा करते हैं उन्हें पांच का स्कोर दिया जाता है यानी अस्थमा के विकास का 15 फीसद चांस रहता है।

 

 

 

दुनिया में अस्‍थमा के बड़े मरीज हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में प्रत्‍येक दस सेकंड में 54 लाख मरीजों को अस्‍थमा का जानलेवा अटैक पड़ता है। इस अटैक के चलते प्रत्‍येक दिन तीन लोगों की मौत हो रही है। ब्रिटेन में हर 12 व्‍यवस्‍कों में एक अस्‍थमा की चपेट में है। इसी तरह से 11 बच्‍चों में से एक अस्‍थमा से प्रभावित है।

अमेरिका में 13 में से एक व्‍यक्ति इसकी चपेट में है। इसी तरह से 12 बच्‍चों में से एक अस्‍थमा से प्रभावित है। यदि अस्‍थमा पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह आपके वायुमार्ग को प्रभावित करता है। लंबे समय तक इसकी चपेट में रहने से वायुमार्ग में सूजन आ जाती है। इससे श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

दरअसल, अस्‍थमा फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति को श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। दमा सिर्फ युवाओं और व्यस्कों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। अस्‍थमा के कई प्रकार के होता है। बच्चों और बड़ों में होने वाला अस्थमा एक ही प्रकार का होता है। आइए जाने दमा के तमाम प्रकारों के बारे में। सांस लेने में खरखराहट, छाती में दर्द रहना, निरंतर खासी आना अस्‍थमा के मूल लक्ष्‍ण हैं।

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