कर्नाटक में सियासी नाटक एक बार फिर पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस ने दायर की याचिका 

  • Line : kapil patel
  • 19 July,2019
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कर्नाटक में सियासी नाटक एक बार फिर पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस ने दायर की याचिका 

नई दिल्ली: कर्नाटक में चल रहे सियासी नाटक अभी ख़त्म नही हुआ है। कांग्रेस-जेडीएस सरकार का बहुमत परीक्षण होने से बृहस्पतिवार को स्थिति साफ होने की उम्मीद थी लेकिन भारी हंगामे के बीच स्पीकर ने बिना वोटिंग करवाए विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक स्थगित कर दी। विधानसभा में विश्वास मत पर कांग्रेस सिद्धारमैया ने कहा कि, ​​चर्चा अभी भी पूरी नहीं हुई है और 20 सदस्यों को भाग लेना बाकी है। मुझे नहीं लगता कि यह आज समाप्त होगा और यह सोमवार को भी जारी रहेगा।

 

 

कर्नाटक का राजनीतिक संकट एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। कर्नाटक कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। राव ने अपनी याचिका में दावा किया कि SC आदेश (बागी विधायकों पर) ने अपने विधायकों को व्हिप जारी करने के पार्टी के अधिकार का उल्लंघन किया था।

 

 

बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि विधायकों को भी विधानसभा में मौजूद होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा यानी कि विधायकों को विश्वास मत में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बागी विधायकों के इस्तीफों पर विधानसभा अध्यक्ष फैसला ले सकते हैं| सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को एक समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

 

 

कर्नाटक में चल रहे सियासी नाटक को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने  भाजपा पर निशाना साधा था|  भाजपा पर हमला करते हुए उन्होने कहा था कि कर्नाटका में भाजपा प्रजातंत्र को अगवा करने का षडयंत्र खेल रही है|

 

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि संवैधानिक परम्पराओं, विधानसभा की मर्यादाओं, संसदीय कार्यप्रणाली और संविधान की परिपाटी का चिरहरण येद्दियुरप्पा जी और भाजपा नेताओं द्वारा कर्नाटका में चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए किया जा रहा है| उन्होने कहा कि ऐसे में कांग्रेस-जेडीएस सरकार के विधायकों की निष्ठा को धनबल-बाहुबल और सत्ताबल के आधार पर खरीदने का दिन-दहाड़े प्रयास किया जा रहा है|

 

 

सुरजेवाला ने कहा कि इस संदर्भ में कल माननीय उच्चतम न्यायालय का भी निर्णय आया। इस परिप्रेक्ष्य में आज जब कर्नाटका विधानसभा में विश्वास मत चल रहा है, तो कई सवाल उभर कर सामने आते हैं| क्या भारतीय संविधान की अनुसूची 10 की अनुपस्थिति में स्थापित संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप विश्वास प्रस्ताव हो सकता है| माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद समाधान से अधिक प्रश्न पैदा हुए हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करने के दौरान पांच मुख्य चिंताएं सामने आई|

 

 

 

I. जब व्हिप को निष्क्रिय कर दिया गया है, तो क्या मत परीक्षण हो सकता है…? कांग्रेस या कोई भी दल अपने विधायक या सांसद पर व्हिप जारी करने के अपने अधिकार को कैसे लागू कर सकता है, जब व्हिप जारी करने का अधिकार ही रद्द कर दिया गया है|

 

 

II. क्या पक्षकार न होने के बावजूद भी कांग्रेस ऐसे निर्णय से बाध्य हो सकती है? माननीय उच्चतम न्यायालय का आदेश सीधे संविधान की अनुसूची X के तहत शक्तियों के प्रयोग में व्हिप जारी करने के कांग्रेस पार्टी के अधिकार को प्रभावित करता है

 

 

III. जब अनुसूची 10 को अक्षम किया गया है, तो क्या मत परीक्षण हो सकता है….? यह उन विधायकों को दंडित करने के लिए है, जो सार्वजनिक जनादेश के साथ विश्वासघात करते हैं। क्या प्रावधानों को लागू किए बिना एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विश्वास मत हो सकता है..?

 

 

IV. क्या हमने शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को अपवाद स्वरूप अनुमति दी है। यह सिद्धांत न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को एक-दूसरे के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोकता है और प्रतिबंधित करता है। क्या न्यायपालिका मत परीक्षण पर अपने नियम और शर्तें लगा सकती है

 

 

V. क्या माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश को पारित करते समय जानबूझकर पैदा किए गए दोषों के संदर्भ और इतिहास पर विचार किया। यह पहली बार नहीं है कि भाजपा ने सार्वजनिक जनादेश को पलटने के लिए धनबल और बाहुबल का उपयोग किया है, ऐसा पहले भी हुआ है और लगातार हो रहा है| सुरजेवाला ने कहा कि गोवा, मणिपुर, त्रिपुरा, उत्तराखंड, मेघालय, बिहार और जम्मू-कश्मीर के बाद, कर्नाटका इन राज्यों की कड़ी में भाजपा का नया शिकार है|

 

 

 

 

 

 

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