कुमारस्वामी सरकार गिरी: HD कुमारस्वामी ने सौंपा अपना इस्तीफा, राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार किया

  • Line : kapil patel
  • 23 July,2019
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कुमारस्वामी सरकार गिरी:  HD कुमारस्वामी ने सौंपा अपना इस्तीफा, राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार किया

नई दिल्ली:  कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के विश्वास मत हारने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को अपना इस्तीफा सौंपा। कर्नाटक में बीते कई दिनों से जारी खींचतानी के बीच 14 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस (Congress-JDS) सरकार गिर गई है. कर्नाटका में कुमार स्वामी तमाम कोशिशों के बावजूद अपनी सरकार नही बचा सके ।

 

 

कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विरोध में 105 वोट डाले गए. विधानसभा में कांग्रेस-जद (एस) सरकार का विश्वास मत खोने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को अपना इस्तीफा सौंपा।कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने एचडी कुमारस्वामी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया.

 

 

 

 

 

 

त्यागपत्र में कहा गया, ‘अपनी कैबिनेट के साथ मैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं और मैं आपसे इसे स्वीकार करने का आग्रह करता हूं|’ त्यागपत्र में कहा गया, ‘मैं इस मौके पर कार्यकाल के दौरान मुझे और मेरे सहयोगियों को मिले सहयोग के लिए मैं आभारी हूं| कुमारस्वामी को अपने पत्र में राज्यपाल ने कहा, ‘मैंने तत्काल प्रभाव से आपका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है| वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहिए| यह कहने की जरूरत नहीं है कि इस दौरान कोई  कार्यकारी फैसले नहीं लिए जाने चाहिए|

 

 

 

विधानसभा में CM एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि-‘मैं कर्नाटक की जनता और स्पीकर से माफी मांगता हूं, चर्चा के लिए लगा ज्यादा समय, उम्मीद थी कि कुछ लोग बदल सकते हैं,लेकिन विपक्ष को सत्ता में आने की जल्दी है, मैंने अच्छे और गलत कई काम किए’

 

 

सीएम कुमारस्वामी के भाषण के बाद विधानसभा में विश्वासमत पर वोटिंग हुई। सभी विधायकों की गिनती हुई। बहुमत साबित नहीं कर पाए कुमारस्वामी। गिनती के बाद विश्वासमत के पक्ष में 99 वोट पड़े यानी कुमारस्वामी की सरकार गिर गई। विश्वासमत के खिलाफ 105 वोट पड़े। कुमारस्वामी बहुमत साबित नहीं कर पाए और इसी के साथ उनकी सरकार गिर गई। इस दौरान 19 विधायक गैरहाजिर रहे। सदन की संख्या 204 है। येदियुरप्पा ने विधायकों को बधाई दी।

 

 

 

मायावती ने BSP विधायक को निकाला

बसपा प्रमुख मायावती ने बसपा विधायक एन महेश को पार्टी से निकाला। निर्देश के बावजूद विश्वासमत के दौरान विधानसभा नहीं पहुंचे महेश। BSP मायावती ने कहा- कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के समर्थन में वोट देने के पार्टी हाईकमान के निर्देश का उल्लंघन करके बीएसपी विधायक एन महेश आज विश्वास मत में अनुपस्थित रहे जो अनुशासनहीनता है जिसे पार्टी ने अति गंभीरता से लिया है और इसलिए श्री महेश को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

 

 

 

इससे पहले एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के विश्वास मत हारने के बाद बीएस येदियुरप्पा और अन्य कर्नाटक भाजपा विधायकों ने विधानसभा में विक्ट्री साइन दिखाते हुए नजर आए. भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि, यह लोकतंत्र की जीत है। कुमारस्वामी सरकार से लोग तंग आ चुके थे। मैं कर्नाटक के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि विकास का एक नया युग अब शुरू होगा। हम किसानों को आश्वस्त करते हैं कि आने वाले दिनों में हम उन्हें और अधिक महत्व देंगे। हम जल्द से जल्द उचित निर्णय लेंगे।

 

 

 

जगदीश शेट्टार, भाजपा: उनके (बागी विधायकों के) इस्तीफे अभी तक स्पीकर द्वारा स्वीकार नहीं किए गए हैं, इस्तीफे की स्वीकृति के बाद उन्हें यह निर्णय लेना है कि उन्हें भाजपा में शामिल होना है या नहीं। वर्तमान परिदृश्य में हमारे पास 105 विधायक हैं, यह भाजपा के लिए बहुमत है, हम एक स्थिर सरकार बनाएंगे।

 

 

 

दो बार मुख्यमंत्री बने कुमारस्वामी, लेकिन दोनों ही बार धोखा दे गया नसीब

एचडी कुमारस्वामी की किस्मत ने एक बार फिर उनका साथ छोड़ दिया। विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर मतदान में कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार के गिर गई और दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने एचडी कुमारस्वामी एक बार फिर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इससे पहले कुमारस्वामी फरवरी 2006 से अक्तूबर 2007 तक यानी 21 महीने के लिए मुख्यमंत्री रहे थे। इस बार वह 14 महीने ही सरकार चला पाए।

 

 

विश्वास प्रस्ताव पर मतदान में सरकार गिरने के बाद कुमारस्वामी ने मंगलवार रात अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। विश्वास मत पर चर्चा के दौरान कुमारस्वामी ने कहा था, ‘मैं एक्सीडेंटल सीएम हूं, नसीब मुझे यहां खींच लाया।’ दो बार कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाने वाला उनका नसीब दोनों ही बार उन्हें बीच राह में धोखा दे गया।

 

 

साल 2006 में भी कर्नाटक में कांग्रेस-जदएस की गठबंधन सरकार थी और मुख्यमंत्री थे कांग्रेस के धर्म सिंह। जिस तरह आज विधायकों ने बागी रुख अपनाते हुए सरकार को बेदखल किया, वैसे ही साल 2006 में कुमारस्वामी ने 42 विधायकों के साथ बागी रुख दिखाते हुए सरकार से अलग हो गए थे और सरकार गिर गई थी।

 

 

इसके बाद कर्नाटक के राज्यपाल टीएन चतुर्वेदी ने 28 जनवरी 2006 को कुमारस्वामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इसके साथ ही कर्नाटक में कुमारस्वामी के नेतृत्व में जदएस और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी। चार फरवरी 2006 को मुख्यमंत्री बने कुमारस्वामी ने 27 सितंबर को एलान किया कि गठबंधन सरकार के समझौते के अनुसार तीन अक्तूबर को वह पद छोड़ देंगे। लेकिन, चार अक्तूबर को उन्होंने पद छोड़ने से मना कर दिया और आठ अक्तूबर को इस्तीफा दे दिया था।

 

 

साल 2018 में कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनाते-बनाते रह गई थी। भाजपा के खाते 104 सीटें आई थीं औऱ बहुमत साबित करने के लिए केवल नौ और सीटों की जरूरत थी। कांग्रेस को 80 सीटें मिली थीं और जदएस को 37। भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई 2018 को सरकार बनाने का दावा पेश किया और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, येदियुरप्पा बहुमत साबित नहीं कर सके और 19 मई 2018 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वहीं, कांग्रेस और जदएस ने एकबार फिर गठबंधन किया और कुमारस्वामी को कर्नाटक की बागडोर संभालने का एक और अवसर मिला।

 

 

साल 2006 का वाकया होने के बावजूद जदएस के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस नेतृत्व के फैसले से कांग्रेस के कई नेता सहमत नहीं थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से इसपर नाखुशी जताते हुए कहा था कि वह गठबंधन समाप्त कर दें। लेकिन राहुल ने उनकी बात नहीं मानी।

 

 

 

 

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