सुप्रीम कोर्ट ने Rafale मामले में लीक हुए दस्तावेजों पर विशेषाधिकार दावे पर फैसला सुरक्षित रखा

  • 14 March,2019
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सुप्रीम कोर्ट ने Rafale मामले में लीक हुए दस्तावेजों पर विशेषाधिकार दावे पर फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली: Rafale Deal Review Petitions Case: सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों पर सुनवाई पूरी की। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में लीक हुए दस्‍तावेजों को लेकर केंद्र सरका के विशेषाधिकार के दावे पर फैसला सुरक्षित रखा|

 

राफेल सौदे की समीक्षा याचिका मामले में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल (Attorney General KK Venugopal) ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट को समीक्षा याचिकाओं से लीक पृष्ठों को हटाने का निर्देश देना चाहिए क्योंकि सरकार इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा करती है|

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, आप (अटॉर्नी जनरल) क्या विशेषाधिकार का दावा करते हैं…? वे उन्हें पहले ही अदालत में पेश कर चुके हैं।इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने कहा कि, उन्होंने इसे चोरी करने के बाद उत्पादित किया है। राज्य के दस्तावेजों को बिना स्पष्ट अनुमति के प्रकाशित नहीं किया जा सकता है।

 

SC ने RTI अधिनियम का उल्लेख करते हुए धारा 22 के अनुसार आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम पर प्रभाव को खत्म कर दिया है और धारा 24 RTI अधिनियम कहता है कि ‘यहां तक ​​कि खुफिया और सुरक्षा प्रतिष्ठान भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य हैं।’ AG ने कहा कि, राज्य की सुरक्षा में सब कुछ खत्म हो गया| AG ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- साक्ष्य अधिनियम के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बिना अदालत में गोपनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सकता|

 

 

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने जो दस्तावेज दाखिल किए हैं या जिन्हें आधार बनाया है, उनका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।  राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है जिसकी कैग रिपोर्ट में कीमतों का विवरण संपादित किया गया हो। भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच कोई करार नहीं है, क्योंकि फ्रांस ने इसमें कोई संप्रभु गारंटी नहीं दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं|

 

 

प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं। भूषण ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता।

 

 

 

Author : kapil patel

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