कजरी तीज आज, कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • Author : tvl7
  • 29 August,2018
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कजरी तीज आज, कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद यानी कि भादो माह के कृष्‍ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज मनाई जाती है इस साल यह पर्व 29 अगस्त, बुधवार को है। कजरी तीज में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और रक्षा के लिए इस व्रत को रखती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसलिए महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है।

 

कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथ‍ि आरंभ: 28 अगस्त 2018 को रात 8 बजकर 39 मिनट
तृतीया तिथि समाप्‍त: 29 अगस्त 2018 को रात 9 बजकर 38 मिनट

 

यह त्योहार उत्तर प्रदेश, राजस्थान  और मध्य प्रदेश राज्यों में प्रमुखता से मनाया जाता है। इस व्रत में  महिलाएं पूरे दिन उपवास रखकर अपने पति की लंबी आयु के लिए कामना करती हैं। इस दिन विशेष रूप से गाय माता की पूजा की जाती है।  इस दिन सुहागिन महिलाएं और कन्याएं एक साथ कजरी गीत गाती है और गीत संगीत का कार्यक्रम करती हैं। साल भर में कुल चार तीज मनाई जाती हैं, जिनमें कजरी तीज का विशेष महत्‍व है| हिन्‍दू धर्म में तीज पर्व का विशेष स्‍थान है| यह पर्व पति-पत्‍नी के प्रेम का प्रतीक है| कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से पति-पत्‍नी के बीच प्‍यार बढ़ता है और जनम-जनम तक उनका साथ बना रहता है

 

माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी इसके लिए उन्होनें 108 साल तक कठोर तपस्या की थी और भवगाव शिव को प्रसन्न किया था। शिवजी ने पार्वती से खुश होकर इसी तीज के दिन अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा करते हैं। इस दिन नीम की पूजा की जाती है, कजरी तीज पर सुहागिनें पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वे तीज माता की कथा सुनती हैं। मन्दिरों में देवों के दर्शन करती हैं। इसके बाद व्रत तोड़ती है। कजरी तीज पर नीमड़ी माता की पूजा की जाती है। पूजन से पहले मिट्टी व गोबर से दीवार के सहारे एक तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है और उसके पास नीम की टहनी को रोप देते हैं। फिर किनारे पर एक दीया जलाकर रखते हैं

 

कजरी तीज कथा
कथा सुने बिना कजरी तीज का व्रत अधूरा है| कजरी तीथ की दो कथाएं प्रचलित हैं. पहली कथा इस प्रकार है- पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक गांव में गरीब ब्राह्मण का परिवार रहता था. ब्राह्मण की पत्नी ने भाद्रपद महीने में आने वाली कजरी तीज का व्रत रखा और ब्राह्मण से कहा, ‘हे स्वामी आज मेरा तीज व्रत है. कहीं से मेरे लिए चने का सत्तू ले आइए.’ लेकिन ब्राह्मण ने परेशान होकर कहा, ‘मैं सत्तू कहां से लेकर आऊं भाग्यवान!’ इस पर ब्राहमण की पत्नी ने कहा, ‘मुझे किसी भी कीमत पर चने का सत्तू चाहिए.’ इतना सुनकर ब्राह्मण रात के समय घर से निकल पड़ा. वह सीधे साहूकार की दुकान में गया और चने की दाल, घी और शक्कर मिलाकर उसने सवा किलो सत्तू बना लिया. इतना करने के बाद ब्राह्मण अपनी पोटली बांधकर जाने लगा. तभी खटपट की आवाज सुनकर साहूकार के नौकर जाग गए और वह चोर-चोर आवाज लगाने लगे|

 

ब्राह्मण को उन्होंने पकड़ लिया. साहूकार भी वहां पहुंच गया. ब्राह्मण ने कहा, ‘मैं बहुत गरीब हूं और मेरी पत्नी ने आज तीज का व्रत रखा है. इसलिए मैंने यहां से सिर्फ सवा किलो का सत्तू बनाकर लिया है.’ ब्राह्मण की तलाशी ली गई तो सत्तू के अलावा कुछ भी नहीं निकला. साहूकार ने कहा, ‘आज तुम्हारी पत्नी को मैं अपनी धर्म बहन मानूंगा.’ उसने ब्राह्मण को सातु, गहने, रुपये, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर अच्छे से विदा किया| सबने मिलकर कजरी माता की पूजा की|जिस तरह ब्राह्मण के दिन फिरे वैसे सबके दिन फिरे. कजली माता अपनी कृपा सब पर करें|

 

दूसरी कथा इस प्रकार है- पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक साहूकार के सात बेटे थे. सतुदी तीज के दिन उसकी बड़ी बहू नीम के पेड़ की पूजा कर रही होती है तभी उसका पति मर जाता है. कुछ समय बाद उसके दूसरे बेटे की शादी होती है. वह भी सतुदी तीज के दिन नीम के पेड़ की पूजा करती है और उसका पति भी मर जाता है. इस तरह साहूकार के छह बेटे मर जाते हैं. फिर सातवें बेटे की शादी होती है|

 

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सतुदी तीज के दिन उसकी पत्‍नी अपनी सास से कहती है कि वह आज नीम के पेड़ की जगह उसकी टहनी तोड़कर पूजा करेगी. जब वह पूजा करती है तब साहूकार के छह बेटे अचानक आ जाते हैं, लेकिन वे किसी को दिखाई नहीं देते. तब वह अपनी जेठानियों से नीम की टहनी की पूजा करने के लिए कहती है. तब वे सब बोलती हैं कि उनके पति जिंदा नहीं हैं इसलिए वे पूजा नहीं कर सकतीं. यह सुनकर छोटी बहू कहती है कि आप सबके पति जिंदा हैं. सभी महिलाएं प्रसन्‍न होकर अपने पति के साथ पूजा करती हैं. इसके बाद यह बात सब जगह फैल गई कि इस तीज पर नीम के पेड़ की नहीं बल्‍कि उसकी टहनी की पूजा करनी चाहिए|

 

 

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