loading...

CBI चीफ पद से हटाकर आलोक वर्मा को फायर सर्विसेस का डीजी बनाया गया, एम. नागेश्वर राव दोबारा बने अतिरिक्त निदेशक

  • 10 January,2019
  • 110 Views
CBI चीफ पद से हटाकर आलोक वर्मा को फायर सर्विसेस का डीजी बनाया गया, एम. नागेश्वर राव दोबारा बने अतिरिक्त निदेशक

नई दिल्ली:  सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ( CBI Chief Alok Verma ) को उनके पद से हटा दिया गया है| वह बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 77 दिन बाद अपने काम पर लौटे थे। पीएम मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में सेलेक्शन पैनल ( Selection Panel) ने सीबीआई प्रमुख के रूप में आलोक वर्मा के स्थानांतरण की सिफारिश की है।  सीबीआई प्रमुख पद से हटाकर आलोक वर्मा को फायर सर्विसेस का डीजी बनाया गया| दोबारा पदभार संभालते ही उन्होंने तबादले के पुराने आदेश रद्द कर दिए थे। इसके अलावा गुरुवार को ही 5 अफसरों के तबादले का आदेश दिया था। करीब 36 घंटे बाद ही उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। अब नागेश्वर राव दोबारा सीबीआई प्रमुख का पद संभाल सकते हैं।

 

 

पीएम की अगुवाई वाली सेलेक्ट कमेटी ने आलोक वर्मा पर 2-1 के बहुमत से फैसला लिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने वर्मा को हटाने का विरोध किया था। लेकिन पीएम मोदी और जस्टिस सीकरी उन्हें हटाने के पक्ष में थे।

 

पीएम मोदी के नेतृत्व में सेलेक्शन कमेटी (Select Panel Meeting) की हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया| सेलेक्शन पैनल की बैठक (Select Panel Meeting) के बाद आलोक वर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है|कमेटी को एक हफ़्ते में तय करना था कि आलोक वर्मा को हटाया जाएं या नहीं, लेकिन उसने आज ही अपना फैसला सुना दिया|

 

 

CBI निदेशक आलोक वर्मा को किया गया बर्खास्त,पीएम मोदी के नेतृत्व में सेलेक्शन कमेटी की हुई बैठक के बाद यह फैसला किया गया

 

पीएम मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में सेलेक्शन पैनल ( Selection Panel) ने सीबीआई प्रमुख के रूप में आलोक वर्मा के स्थानांतरण की सिफारिश की है। एसीसी (ACC) ने बाद में आलोक वर्मा को महानिदेशक, अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड के रूप में तैनात किया है|

 

पैनल ने आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी द्वारा की गई टिप्पणियों की अत्यंत गंभीर प्रकृति को ध्यान में रखा। पैनल का विचार था, कि एक बहुत ही संवेदनशील संगठन का मुखिया होने के नाते, वर्मा उसकी ईमानदारी के साथ काम नहीं कर रहे थे।

 

 

सीवीसी(CVC) को मोइन कुरैशी मामले में जांच को प्रभावित करने के सबूत मिले। 2 करोड़ रु. रुपये की रिश्वत लेने का सबूत भी था  सीवीसी(CVC) ने कहा कि, मामले में आलोक वर्मा का आचरण संदेहास्पद है, और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मुकदमा चल रहा है।

 

 

IRCTC मामले में, CVC ने महसूस किया कि, यह उचित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि, आलोक वर्मा ने जानबूझकर एफआईआर(FIR)  से एक नाम को बाहर कर दिया था, जो उन कारणों के लिए जाना जाता था। सीवीसी ने उनके खिलाफ कई अन्य मामलों में भी सबूत पाया। CVC ने रिकॉर्ड के विलफुल गैर-उत्पादन के उदाहरण भी पाए|

 

 

समिति ने आलोक वर्मा की संदिग्ध निष्ठा के अधिकारियों को हटाने के प्रयासों पर भी ध्यान दिया। इस आग्रह के जवाब में कि उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था, उन्हें रिटेल की मौजूदगी में CVC के समक्ष अपना मामला पेश करने का मौका दिया गया: जस्टिस पटनायक

 

 

सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव(M. Nageshwar Rao) निदेशक के कर्तव्यों का पालन करेंगे, नए निदेशक की नियुक्ति तक, या जब तक सी.बी.आई. आगे के आदेश :भारत सरकार

 

 

पीएम मोदी की अध्यक्षता में चयन पैनल का जनादेश सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति और सीबीआई प्रमुख के स्थानांतरण तक सीमित है। समिति ने महसूस किया कि, आपराधिक जांच सहित एक विस्तृत जांच आवश्यक थी, वर्मा का सीबीआई निदेशक के रूप में जारी रहना(Desirable) वांछनीय नहीं था|

 

 

वहीं, बैठक से पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया था कि, “CBI निदेशक आलोक वर्मा के मामले में सेलेक्शन कमेटी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जस्टिस एके सीकरी के साथ) की बैठक आज गुरुवार को होगी| कल (बुधवार को) हमें CVC की रिपोर्ट नहीं मिल पाई थी| बता दें कि कल (बुधवार को) भी पीएम आवास पर सेलेक्शन कमेटी की बैठक हुई थी, लेकिन इस पर फैसला नहीं हो सका था

 

 

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहते थे कि आलोक वर्मा सेलेक्ट कमेटी के सामने अपनी बात रखें…

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहते थे कि आलोक वर्मा सेलेक्ट कमेटी के सामने अपनी बात रखें। उन्होंने बुधवार को हुई बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और जस्टिस सीकरी को अपने पक्ष से अवगत करा दिया था। उनका तर्क था कि सेलेक्ट कमेटी केवल सीवीसी की रिपोर्ट पर चर्चा कर रही है।

 

इसी आधार पर आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला नहीं हो सकता इसके लिए जरुरी है कि आलोक वर्मा को कमेटी के सामने बुलाया जाए। उधर, राहुल गांधी ने भी अपने एक बयान में कहा था कि मोदी आलोक वर्मा केस को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं। कहीं न कहीं, इसके पीछे राफेल तो वजह नहीं है।

 

दूसरी ओर, आलोक वर्मा ने ज्वाइनिंग के पहले ही दिन अपने चहेते अफसर एके बस्सी, अश्वनी गुप्ता, एसपी ग्रुम और ज्वाइंट डायरेक्टर एके शर्मा को वापस बुला लिया है। वर्मा के छुट्टी पर जाने के बाद इनमें किसी अफसर का दिल्ली से बाहर तबादला कर दिया गया तो अन्य अफसर दूसरी ब्रांच में तैनात कर दिए गए।

 

इनमें डीएसपी एके बस्सी को अंडमान भेजने के आदेश जारी हुए थे। अपने तबादला आदेश के ख़िलाफ़ वे अदालत भी गए थे। बस्सी को आलोक वर्मा का विश्वासपात्र माना जाता है। राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार मामले की जांच बस्सी को ही सौंपी गई थी।

 

 

 

 

 

Author : kapil patel
Loading...

Share With

You may like

Leave A Reply

Follow us on

Loading...

आपके लिए

TRENDING