loading...

नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर अरुण जेटली ने दी सफाई, कहा- कैश को जब्त करना नहीं अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना था मकसद

  • 08 November,2018
  • 40 Views
नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर अरुण जेटली ने दी सफाई, कहा- कैश को जब्त करना नहीं अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना था मकसद

नई दिल्ली:  8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में नोटबंदी लागू की थी। जिसमें 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया गया था। मोदी सरकार के इस फैसले को आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा और कहा कि अर्थव्यवस्था की ‘तबाही’ वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है और इससे देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने कहा, ‘नोटबंदी से हर व्यक्ति प्रभावित हुआ, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, किसी लैंगिक समूह का हो, किसी धर्म का हो, किसी पेशे का हो। हर किसी पर इसका असर पड़ा।’

 

 

मनमोहन सिंह की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि,  जैसा कि हम आज दो साल के नोटबंदी को पूरा करते हैं, यह स्थापित किया गया है कि सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की एक श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कदम रहा| जेटली ने कहा, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में एक बड़ा प्रभाव पड़ा। सरकार ने पहले भारत के बाहर काले धन को लक्षित किया था। संपत्ति धारकों से उन्हें दंड कर के भुगतान पर वापस लाने के लिए कहा गया था, ऐसा करने में विफलता पर उन्हें ब्लैक मनी एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।

 

इस तरह के सभी विवरणों के परिणामस्वरूप उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। व्यक्तिगत आयकर के संग्रह पर नोटबंदी का प्रभाव महसूस किया गया है।पिछले वर्ष की तुलना में 20.2% तक वित्तीय वर्ष 2018-19 (31-10-2018 तक) में इसका संग्रह अधिक था। कॉर्पोरेट कर में भी संग्रह 1 9 .5% अधिक है।

 

 

जेटली ने कहा, Demonetisation बैंकों में जमा करने के लिए नकद धारकों को मजबूर किया। जमा किए गए नकद की विशालता और मालिक के साथ पहचाने जाने के परिणामस्वरूप 17.42 लाख खाता धारक संदिग्ध हुए| जिनसे प्रतिक्रिया गैर-आक्रामक विधि के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त हुई है|बड़े पैमाने पर Demonetisation और जीएसटी नकद लेनदेन का प्रदर्शन और कार्यान्वयन है| डिजिटल लेनदेन में दृश्य वृद्धि के साथ, अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण से करदाता आधार में पूर्व-जीएसटी शासन में 6.4 मिलियन से बढ़कर 12 मिलियन हो गया है।

 

 

मई, 2014 में, जब वर्तमान सरकार चुने गए तो आयकर रिटर्न के फाइलर्स की कुल संख्या 3.8 करोड़ थी। इस सरकार के पहले चार वर्षों में, यह 6.86 करोड़ हो गया है। जब इस सरकार ने अधिग्रहण किया, तो 130 करोड़ रुपये के देश में आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या केवल 3.8 करोड़ थी और सभी करों का भुगतान नहीं कर रहे थे। अप्रत्यक्ष करों के संबंध में भी यही स्थिति थी| इसलिए करदाता को न केवल अपने करों का भुगतान करना पड़ता था बल्कि शासन की व्यवस्था चलाने के लिए भी evaders के हिस्से का भुगतान करना पड़ता था। इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने की आवश्यकता थी|

 

 

रुपये की वार्षिक आयकर राहत के बावजूद छोटे करदाताओं को 9 7,000 करोड़ रुपये और जीएसटी आकलन के लिए 80,000 करोड़ राहत दी गई, कर संग्रह बढ़ गया है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों की दरें कम कर दी गई हैं, लेकिन कर संग्रह बढ़ गए हैं।

 

सरकार ने बेहतर बुनियादी ढांचा निर्माण, सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण भारत के लिए इन संसाधनों का उपयोग किया है। हम सड़क से जुड़े गांवों को कैसे देख सकते हैं, हर घर में बिजली, ग्रामीण स्वच्छता के लिए 92% कवरेज, एक सफल आवास योजना, एक खाना पकाने गैस कनेक्शन। यह अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण है जिसने 13 करोड़ उद्यमियों को मुद्रा ऋण प्राप्त कर लिया है। अधिक औपचारिकता, अधिक राजस्व, गरीबों के लिए अधिक संसाधन, बेहतर बुनियादी ढांचा, और हमारे नागरिकों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता।

 

 

अरुण जेटली ने आगे कहा, ‘उल्लंघन करने वालो को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बैंकों में जमा हुई बड़ी राशियों की वजह से बैंक की उधार देने की क्षमता में सुधार हुआ। इसमें से बहुत सी राशि को आगे के निवेश के लिए म्यूचुअल फंड्स में लगाया गया। यह औपचारिक प्रणाली का हिस्सा बन गया है। वित्त वर्ष 2018-19 में व्यक्तिगत आयकर पिछले साल की तुलना में 20.2 प्रतिशत ज्यादा रहा। वहीं कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.5 प्रतिशत ज्यादा रहा। नोटबंदी से दो साल पहले प्रत्यक्ष कर संग्रह में क्रमशः 6.6 और 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।’

 

 

उन्होंने कहा कि बैंकों में लगभग पूरी नकदी जमा हो जाने पर भले आलोचना हो रही है, मगर नोटबंदी का फैसले के पीछे नोटों को जब्त करने का ऐसा कोई उद्देश्य था ही नहीं , बल्कि सभी कैश को बैंक खातों के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने का मकसद था. इस नाते नोटबंदी की आलोचना का कोई आधार ही नहीं है.

 

Author : kapil patel
Loading...

Share With

You may like

Leave A Reply

Follow us on

आपके लिए

TRENDING