जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370: अमित शाह बोले- हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते , POK और अक्साई चीन के लिए जान दे देंगे,  पढ़ें पूरा भाषण….

  • Line : kapil patel
  • 06 August,2019
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जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370: अमित शाह बोले- हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते , POK और अक्साई चीन के लिए जान दे देंगे,  पढ़ें पूरा भाषण….

नई दिल्ली:  राज्यसभा से पास होने के बाद लोकसभा में भी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने का प्रस्ताव लोकसभा में पास हो गया है साथ ही जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 को भी लोकसभा में पास कर दिया गया| राज्यसभा से इस अनुच्छेद 370 को रद्द करने का प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी जिसके पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़े थे| उच्च सदन से जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 भी पास हो गया है |

 

 

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने का प्रस्ताव लोकसभा द्वारा पारित किया गया| इसके पक्ष में 351 और विपक्ष में 72 वोट पड़े हैं| एक सांसद गैर मौजूद रहा जबकि कुल 424 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया है| जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 भी लोकसभा  पास हो गया है |इसके पक्ष में 370 और विपक्ष में 70 वोट पड़े हैं |

 

 

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल को लोकसभा से वापस ले लिया है| उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद जम्मू कश्मीर से धारा 370 अपने आप हट जाएगी और फिर वहां यह आरक्षण लागू जाएगा, इसलिए बिल को वापस लेता हूं| गृह मंत्री ने कहा कि राज्यसभा से भी यह बिल वापस लेने की अपील करूंगा| सदन ने गृह मंत्री को आरक्षण बिल वापस लेने की इजाजत दे दी|

 

 

बोले अमित शाह – कनपटी पर बंदूक रख फारूक को बाहर नहीं ला सकते हम

 

 

चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आप पीओके के बारे में सोच रहे हैं, आपने सभी नियमों का उल्लंघन किया और एक राज्य को रातोंरात केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया।

 

 

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि, आप कहते हैं कि यह एक आंतरिक मामला है। लेकिन 1948 से संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी निगरानी की जा रही है, क्या यह आंतरिक मामला है..? हमने शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जो एक आंतरिक मामला या द्विपक्षीय है..?

 

 

फारूक अब्दुल्ला बोले-  हमारी हत्या करना चाहती है सरकार, घर में ही हिरासत में रखा गया था, झूठ बोल रहे है अमित शाह

 

 

चौधरी ने कहा कि,एस जयशंकर ने माइक पोम्पेओ से कहा कि कुछ दिन पहले कश्मीर एक द्विपक्षीय मामला है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप न करें। क्या J & K अभी भी आंतरिक मामला हो सकता है…? हम जानना चाहते हैं। पूरी कांग्रेस पार्टी आपके द्वारा प्रबुद्ध होना चाहती है। उन्होंने कहा कि, हम सरकार ने जानना चाहते हैं और यह हमारा अधिकार है. कांग्रेस देश का हित नहीं चाहती, ऐसे माहौल आप न बनाएं

 

 

 

दो हिस्सों में बंटा जम्मू कश्मीर:लोकसभा में अमित शाह ने चर्चा के दौरान क्या-क्या कहा ,पूरा भाषण पढ़ें.

 

 

PoK और अक्साई चीन के लिए जान दे देंगे: शाह

 

लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि, जम्मू और कश्मीर भारत संघ का अभिन्न अंग है। कश्मीर की सीमा में POK भी आता है…जान दे देंगे इसके लिए! कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, कश्मीर पर संसद ही सर्वोच्च है। कश्मीर को लेकर नियम-कानून और संविधान में बदलाव से कोई नहीं रोक सकता..

 

 

उन्होंने कहा कि जब मैं जम्मू कश्मीर कहता हूं तो उसमें पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन भी शामिल है और दोनों भारत के अभिन्न अंग हैं| संसद को जम्मू-कश्मीर पर कानून बनाने का अधिकार है| कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कश्मीर का मसला UN में है, और UN इसे मॉनिटर कर रहा है तो इस मामले में सरकार कैसे बिल बना रही है….? कांग्रेस को बताना चाहिए कि क्या कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र (UN) मॉनिटर करे….?

 

 

हिरासत में नहीं फारूक अब्दुल्ला: अमित शाह

 

लोकसभा में Article-370 Revoked पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि , पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला न तो हिरासत में हैं और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है| शाह ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला उनके बराबर में बैठते हैं| वह आज सदन में मौजूद नहीं हैं और उनकी आवाज सुनी नहीं जा रही|

 

 

 

राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “मैं सीट न. 462 पर बैठती हूं। फारूक अब्दुल्ला सीट संख्या 461 पर बैठते हैं। वह जम्मू-कश्मीर से चुने गए हैं। हम उन्हें आज नहीं सुन सकते। अगर आप मुझसे पूछेंगे तो यह बहस अधूरी रह जाएगी। इस पर गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं,” फारूक अब्दुल्ला न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया। वह अपने घर पर है, अपनी मर्जी से बाहर आ जा सकते है..

 

 

कनपटी पर बंदूक रख फारूक को बाहर नहीं ला सकते- अमित शाह

अमित शाह ने कहा हैं, मैंने इसे तीन बार स्पष्ट किया है। फारूक अब्दुल्ला जी अपने घर पर हैं, वह नजरबंद नहीं हैं, वे गिरफ्तार नहीं हैं। वह अच्छे स्वास्थ्य में है, मौज-मस्ती में हैं, उनको नही आना है तो गन पट्टी पर रख कर बाहर नही ला सकते हम….

 

 

शाह ने कहा हैं, मैं इसे 4 वीं बार कह रहा हूं, और मुझे 10 वीं बार कहने का धैर्य है, फारूक अब्दुल्ला को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। यदि वह ठीक नहीं है, तो डॉक्टर उसे अस्पताल ले जाएंगे। सदन को चिंता नहीं करनी चाहिए। मैं डॉक्टर नहीं हूं और तबियत मैं ठीक नहीं कर सकता|  अगर वह ठीक नहीं होता, तो वह बाहर नहीं आता

 

 

 

 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ,असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हम एक ऐतिहासिक गलती करने जा रहे हैं। हम एक ऐतिहासिक गलती नहीं करने जा रहे हैं, हम एक सही करने जा रहे हैं। 5 साल के बाद, पीएम मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास को देखते हुए घाटी की लोग धारा 370 की कमियों को समझेगी…

 

 

 

अमित शाह  ने लोकसभा में कहा कि,  कानून व्यवस्था बिगड़ने के कारण कर्फ्यू नहीं लगाया गया। यह एहतियाती है, इसे लागू कर दिया गया है ताकि स्थिति न बिगड़े…सुप्रिया सुले ने पूछा कि जम्मू कश्मीर के पर्यावरण और सौंदर्य का क्या होगा। राष्ट्र में पर्यावरण के लिए कानून हैं और अनुच्छेद 370 के निरस्त होते ही उन्हें वहां लागू किया जाएगा। जम्मू और कश्मीर पृथ्वी पर स्वर्ग था, यह पृथ्वी पर स्वर्ग है और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा….

 

 

 

देश का बच्चा-बच्चा बोलता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम ये क्यों नहीं बोलते कि यूपी देश का अभिन्न अंग है, तमिलनाडु देश का अभिन्न अंग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 370 ने इस देश और दुनिया के मन में एक शंका पैदा कर दी थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं| यहां उपस्थित एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया। वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोटबैंक का प्रश्न आ जाता है: अमित शाह

 

 

 

भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी निर्णय लेने के लिए भारत के संसद के दोनों सदनों को पूरा संवैधानिक अधिकार है| जहां तक केंद्र शासित राज्य का सवाल है तो मैं देश और मुख्य रूप से घाटी के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि स्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में हमें कोई संकोच नहीं होगा: अमित शाह

 

 

 

जब भारत-पाकिस्तान ने UN के प्रस्ताव को स्वीकार किया तब किसी भी देश की सेना को सीमाओं के उल्लंघन का अधिकार नहीं था। लेकिन 1965 में पाकिस्तान की ओर से सीमा का उल्लंघन करने पर यह प्रस्ताव खारिज हो गया था| 370 हटाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वह देश की संसद के महत्व को कम करता है। देश का कानून वहां तक नहीं पहुंचता है। जिसकी वजह से पाकिस्तान वहां के लोगों के मन में अलगाववाद को बढ़ाता है:  अमित शाह

 

 

 

1989 से 1995 तक जम्मू कश्मीर में आतंकवाद इतना बढ़ा कि वहां सालों तक कर्फ्यू लगाया गया। वहां खाना-पीना तो छोड़िए ब्रेड-बटर तक नहीं मिलता था। हमने J&K में सुरक्षाबल इसलिए रखे हैं कि अगर वहां की कानून व्यवस्था को बिगाड़ना भी चाहे तो उसको मौका नहीं मिलेगा: अमित शाह

 

 

371 महाराष्ट्र के विकास से जुड़ा है उसे हम क्यों निकालेंगे, इससे कहीं भी देश की अखंडता और एकता बाधित नहीं होती। इसकी 370 से कोई तुलना नहीं की जा सकती। विभिन्न राज्यों की कुछ समस्याओं को 371 में रखा गया है। हम इसे कतई हटाने नहीं जा रहे हैं:अमित शाह

 

 

हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते। घाटी के लोग हमारे हैं, हम उनको सीने से लगाएंगे, उनको प्यार से रखेंगे, पूरा हिन्‍दुस्‍तान उन्हें प्यार से रखेगा। अगर उनके मन में कोई आशंका है तो जरूर चर्चा करेंगे, हमें कोई आपत्ति नहीं है: अमित शाह

 

 

नेहरू जी ने कहा था कि 370 Temporary है, उचित समय आने पर हटाएंगे। 70 साल लगे लेकिन नहीं हटा पाए, मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमें इतना समय नहीं लगेगा: अमित शाह

 

 

370 हटाना कैसे सांप्रदायिक एजेंडा हो सकता है? क्या वहां हिन्दू, सिख और जैन नहीं रहते हैं? आज तक वहां अल्पसंख्यक आयोग नहीं बनाया गया। यह सिर्फ अनुच्छेद 370 की वजह से हुआ| 1989 से लेकर अबतक 41 हजार लोग मारे गए फिर भी क्या हम उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं। 70 साल इसी रास्ते पर चले हैं अब क्या रास्ता बदलना नहीं चाहिए। कब तक वोट बैंक की राजनीति करते रहेंगे, कब देश हित और घाटी के हित के बारे में सोचेंगे: अमित शाह

 

 

जम्मू-कश्मीर में आज तक अल्पसंख्यक आयोग क्यों नहीं बनाया गया..? वहां शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं है, जम्मू-कश्मीर के बच्चों को यह अधिकार नहीं मिला। शिक्षकों को ट्रेनिंग नहीं मिलती है। इन सबका एकमात्र कारण अनुच्छेद 370 है|मुझे विश्वास है कि 5 साल के बाद जम्मू और कश्मीर में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जो विकास होने वाला है, वो देखकर घाटी की जनता भी कहेगी कि 370 का झुनझुना जो हमें पकड़ाया गया उससे हमारा बहुत अहित हुआ: अमित शाह

 

 

भारतीय जनता पार्टी की परंपरा है कि ऐसे फैसले व्यक्तित्व को बढ़ाने के लिए, वोटबैंक के लिए या चुनाव में फायदा हो इसलिए नहीं लेते। ऐसे फैसले देश का भला किसमें है वो देखकर लेते हैं। ऐसे फैसले देश की सुरक्षा किसमें है वो देखकर लिया जाता है: अमित शाह

 

 

पहले यहां केवल 3 परिवारों का शासन था, लेकिन आज जम्मू -कश्मीर में 40 हजार पंच-सरपंच अपने गांव के विकास का खाका खुद खींच रहे हैं। 3500 करोड़ रूपये, इन पंच-सरपंचो को डायरेक्ट RTGS के माध्यम से भेजने का काम मोदी सरकार ने किया है: अमित शाह

 

 

 

किसने क्या कहा….

 

 

चुनावी वादा पूरा लेकिन संविधान को नहीं माना: ओवैसी

लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि ,यह इतिहास की तीसरे बड़ी गलती है| मैं बिल का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। निश्चित रूप से भाजपा अपने घोषणा पत्र में चुनावी वादे पर कायम है, लेकिन आप अपने संवैधानिक कर्तव्यों पर खरे नहीं उतरे हैं। आपने एक संवैधानिक वचन अनुच्छेद 370 का उल्लंघन किया है |उन्होंने कहा कि क्या सरकार लोगों को इंप्लांट करने जा रही है|

 

 

 

ओवैसी ने कहा कि सरकार का कहना है कि यह अस्थाई प्रावधान है लेकिन कोर्ट इसे अस्थाई नहीं बल्कि विशेष दर्जा बता चुका है|नाजियों से प्रेरणा लेकर बीजेपी यह कदम उठाने जा रही है| कश्मीर की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लंबे वक्त से लड़ रहे हैं. पूर्वोत्तर में नागा के लोगों को आप तेल और गैस देने के लिए तैयार हैं, उनसे बातचीत के लिए तैयार हैं जबकि वह हथियार उठाए हुए हैं| सरकार बताए कि कब ओवैसी हिमालच में जमीन खरीद सकेगा| अगर सरकार इसे दिवाली बता रही है तो कश्मीरियों को घर से निकलकर जश्न क्यों नहीं मनाने दे रही है…? क्यों लोगों को जेल में बंद रखा गया…?

 

 

कश्मीरी बकरे की बलि देने की बजाय खुद की बलि देंगे: ओवैसी

 

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि, ईद पर क्या होगा…? सोमवार को ईद है। क्या आप यह मान रहे हैं कि  कश्मीरी बकरे की बलि देने के बजाय कश्मीरियों को अपना बलिदान देना चाहिए…? यदि आप चाहते हैं कि मुझे यकीन है कि वे ऐसा करेंगे, तो वे ऐसा कर रहे हैं

 

 

 

सरकार बताए PoK को लेकर क्या है स्थिति : अखिलेश

 

लोकसभा में सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि  हम देश के साथ हैं। लेकिन अब मेरा सवाल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति को लेकर है। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। यादव ने कहा कि ,सुप्रिया जी के पड़ोसी भी उनके बगल में नहीं और मेरे पड़ोसी भी नहीं है. मंत्री कह रहे थे कि संविधान सभा से पारित कर यह प्रस्ताव लाए हैं, इस पर शाह ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा है आपने गलत समझा| अमित शाह ने कहा कि संविधान सभा मतलब जम्मू कश्मीर की विधानसभा की ओर से राष्ट्रपति यह प्रस्ताव लेकर आए हैं. अखिलेश यादव ने कहा कि जिस प्रदेश के लिए यह फैसला लिया गया है वहां की जनता का क्या मत है यह तो जान लेना चाहिए, वहां के लोग इस फैसले से खुश हैं या नहीं हैं.

 

 

 

अखिलेश यादव ने कहा कि कश्मीर में हमने भी बहुत कुछ खोया है, मेरे सैनिक स्कूल से जाने कितने लोग वहां शहीद हुए हैं. राष्ट्रपति के साथ एडीसी रहा शख्स वहां शहीद हो गया. क्या हमारे देश का कश्मीर नहीं है क्या, क्या हमारे लिए कश्मीर नहीं है. आप लोग 70 साल की बात करते हैं 11 साल अपने क्यों नहीं गिना करते.

 

 

उन्होंने  कहा कि आपने सिर्फ 20 करोड़ लोगों के लिए काम किया है, बाकी 110 करोड़ लोगों के लिए कोई काम नहीं किया. सरकार बताए PoK किसका हिस्सा है, संविधान सभा में 24 सीटें क्यों खाली हैं. यादव ने कहा कि हम भी देश के साथ हैं क्या नगालैंड और मिजोरम वाली भी खुशी मिलेगा. सरकार ने लोकतंत्र में छल-कपट किया है, धोखा दिया है, वहां बल का प्रयोग किया गया है, गलियों की तस्वीर क्यों नहीं दिखाते हैं, हम भी स्वर्ग की तस्वीर देखना चाहते हैं जब आप वहां के लिए इतना बड़ा फैसला ले रहे हैं

 

 

 

जदयू ने किया विरोध, JDU ने J&K री-ऑर्गनाइजेशन बिल को लेकर लोकसभा से वॉकआउट किया

लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया है. जदयू ने इस दौरान लोकसभा से वॉकआउट कर दिया. जदयू की तरफ से ललन सिंह ने सदन में कहा कि हम एक दूसरे की विचारधारा को जानते हैं, लेकिन धारा 370 पर सरकार के फैसले का विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि जब NDA की बात हुई थी, तो इसको लेकर चर्चा हुई थी और धारा 370 को हटाने की बात नहीं थी. अगर वहां पर इस तरह का माहौल बनता और फिर कुछ ऐसी स्थिति बनती तब सोचा जा सकता था. लेकिन अभी आपको आतंकवाद से लड़ना चाहिए था, इस तरह का फैसला नहीं लेना चाहिए था.

 

 

 

प्रस्ताव के समर्थन में YSRCP

लोकसभा में YSRCP सांसद आर आर राजू कानुमुरू ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश विधानसभा ने राज्य के बंटवारे के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और दिल्ली को भेजा था. अनुच्छेद 3 का उल्लंघन हुआ और राज्य को दो हिस्सों में बांटा गया था, हमारे मुख्यमंत्री ने इसके बाद इस्तीफा भी दे दिया था. इसके खिलाफ एक केस भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उन्होंने कहा कि देश में एक संविधान और एक झंडा होना चाहिए जो सिर्फ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव है

 

 

370 की वजह से पाक को दाखिल होने का मौका मिला और युवाओं में अलगाववाद को बढ़ावा मिला: बीजेपी सांसद जितेंद्र सिंह

 

बीजेपी सांसद जितेंद्र सिंह ने कहा कि नरसिम्हा राव की सरकार एक प्रस्ताव लेकर आई जिसमें PoK और जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग माना गया और उसका हमने समर्थन भी किया. यह बात तो होनी ही नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि संवैधानिक दृष्टि से इस प्रस्ताव में कुछ भी गलत नहीं है. जम्मू कश्मीर की विधानसभा में शेख अब्दुल्ला ने कहा था कि धारा 370 को हटाया जा सकता है और 70 के दशक तक राय बन चुकी थी कि 370 को जाना चाहिए क्योंकि उनके अपने हित इसमें निहित थे

 

 

कांग्रेस बताए कि 35A और 370 पर उसकी प्रतिबद्धता क्या है. कश्मीर के स्टेक होल्डर्स सिर्फ वो 3 नेता नहीं बल्कि भारत की जनता भी है. हमारे लिए कश्मीरी पंडित और पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी भी स्टेक होल्डर हैं. अलगाव 370 हटाने से नहीं होगा बल्कि 370 के रहते हुआ है. बेरोजगारी अन्य राज्यों में भी लेकिन वहां आतंकवागद क्यों नहीं आया, इस 370 की वजह से पाकिस्तान को वहां दाखिल होने का मौका मिला और युवाओं में अलगाववाद को बढ़ावा मिला

 

 

 

लोकसभा में बीजेपी सांसद जितेंद्र सिंह ने कहा कि धारा 370 आजाद के बाद सबसे बड़ी गलती थी और आज प्राश्यचित की घड़ी आई है. उन्होंने कहा कि विधाता को यही मंजूर था कि जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और अमित शाह गृह मंत्री बने तब इसे हटाया जाए. अगर नेहरू ने अलग भूमिका निभाई होती तो आज इतिसाह कुछ होता. उन्होंने गृह मंत्री सरदार पटेल को जम्मू कश्मीर के केस में दखल देने दी होती तो कुछ और नतीजे होते.

 

 

जितेंद्र सिंह ने कहा कि पटेल ने ही जूनागढ़ और हैदराबाद को डील किया था लेकिन नेहरू मानते थे वह जम्मू कश्मीर को सरदार से ज्यादा जानते हैं इसलिए उन्हें अलग रखा गया. नेहरू ने सामूहित जिम्मेदारी नहीं निभाई और सरदार पटेल को गृह मंत्री रहते हुए भी जम्मू कश्मीर के मामले से उन्हें अलग कर दिया. नेहरू अगर जम्मू कश्मीर के विषय में दखल न देते तो ये पखेड़ा होता और न ये बिल लाना पड़ता. भारत की सेनाएं मीरपुर तक पहुंच चुकी थी तो मंत्रिमंडल के बगैर बताए उन्होंने सीजफायर का ऐलान कर दिया, नहीं तो PoK भी भारत का हिस्सा होता.

 

 

 

पुनर्गठन बिल पर TMC का वॉक आउट

टीएमसी सांसद ने कहा कि इस विभाजन के बाद आतंकवादी घटनाओं में इजाफा हो सकता है क्योंकि मौजूदा हालात अनिश्चितता लेकर आएंगे. सरकार बताए कि ऐसे हालात पनपने पर क्या कदम उठाए जाएंगे. सुदीप ने कहा कि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को क्यों गिरफ्तार किया गया, हमें इस बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है. अगर हम इस बिल पर वोटिंग का हिस्सा बनते हैं तो हम भी इसके लिए भागीदारी होंगे और इस वजह से हमने इसके खिलाफ वॉक आउट का फैसला किया है

 

 

नेहरू की वजह से कश्मीर भारत का अभिन्न अंग: तिवारी

 

चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि आजादी के बाद 2 मुल्क बने एक भारत और दूसरा पाकिस्तान, इसके बाद  562 रियासतें बनीं जिन्हें कहीं भी जाने की आजादी थी. तीन रियासतों को लेकर संवेदनशील स्थिति बनी वह तीन जम्मू कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ थी.

 

 

महात्मा गांधी तक ने महाराजा हरि सिंह से कश्मीर का विलय भारत में करने की अपील की थी, लेकिन महाराजा असमंजस में थे.  फिर पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया और श्रीनगर की ओर बढ़ने लगे. महाराजा के सामने अब पाकिस्तान में विलय और भारत के साथ आने का विकल्प था. लेकिन महाराजा ने पाकिस्तानी घुसपैठियों का सामना किया और भारत से मदद की अपील की. महाराजा ने इसके बाद नेहरू की अगुवाई में भारत से संधि साइन की और फौज को कश्मीर बचाने के आदेश दिए गए.

 

 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कि बगैर संविधान सभा की इजाजत के धारा 370 को खारिज नहीं किया जा सकता जो आज मौजूद नहीं है. तिवारी ने कहा कि जम्मू कश्मीर विधानसभा-विधान परिषद का मतलब यह संसद नहीं है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का अलग संविधान है जो 1957 को लागू हुआ था क्या अब प्रदेश के बंटवारे के बाद उस संविधान को खारिज करने का बिल भी सरकार लेकर आएगी

 

 

उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे के ऊपर इससे बड़ा आघात नहीं हो सकता, साथ ही आज अगर जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है तो उसके पीछे पंडित नेहरू ही वजह थे. अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस बताए कि वह धारा 370 के पक्ष में हैं या इसके खिलाफ हैं. तिवारी ने कहा कि बगैर जम्मू कश्मीर संविधान सभा की मंजूरी के धारा 370 को खारिज नहीं किया जा सकता.

 

 

 

मनीष तिवारी ने कहा कि पंडित नेहरू ने कदम उठाकर उसे भारत का अभिन्न अंग बनाया. उस विलय के साथ कुछ वादे में किए गए थे, जिसमें दिल्ली का करार भी शामिल है. साल 1952 में भारत के संविधान में धारा 370 को शामिल किया गया. उसी बीच जम्मू कश्मीर में संविधान सभा का गठन हुआ और वहां के लिए अलग संविधान की संरचना की. इसके बाद तय हुआ कि वहां का हर फैसला संविधान सभा, विधानसभा की राय लेने के बाद ही किया जाएगा

 

 

तिवारी ने कहा कि आज इस सदन में संवैधानिक त्रासदी हो रही है. अनुच्छेद 3 की स्प्रिट संसद को खुद राय लेने का अधिकार नहीं देती न ही अनुच्छेद 3 किसी सूबे को तोड़ने की बात कहती है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के गठन के वक्त राय ली गई थी और यूपीए ने कोई असंवैधानिक काम नहीं किया साथ ही अनुच्छेद 3 के मुताबिक ही काम किया था. लेकिन आज जम्मू कश्मीर के संदर्भ में संविधान का पालन नहीं हुआ. बगैर विधानसभा के विचार के कोई भी राज्य का गठन आजतक नहीं किया गया था

 

 

 

स्यमा प्रसाद मुखर्जी के आशीर्वाद से 370 बना :हसनैन मसूदी 

 

लोकसभा में जम्मू और कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के नेता हसनैन मसूदी ने कहा, “आप कहते हैं की नही जी, हमने कब कहा था…आप कहते हैं की ये टेम्परेरी था, टेम्परेरी था, आप गोपालस्वामी अय्यांगर की तक़रीर(स्पीच) पढ़िए. मुखर्जी (स्यमा प्रसाद मुखर्जी के आशीर्वाद से 370 बना

 

 

 

विधेयक के विरोध में DMK

लोकसभा में डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि कश्मीर की परिस्थिति विशेष हैं लेकिन आपने राज्य विधानसभा से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की, क्या यह सरकार लोकसभा के साथ वहां विधानसभा चुनाव नहीं कर सकती थी लेकिन इनकी मंशा ही नहीं थी. उन्होंने कहा कि संसद को संकल्प पास कर राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार है और यही वजह से है रोज 2-3 विधेयकों की पैदावारी यहां हो रही है. बगैर चर्चा और वाद-विवाद के कानून बनाए जा रहे हैं.

 

 

बालू ने कहा कि सरकार को इससे क्या हासिल होने वाला है आखिर उनका मकसद क्या है, ऐसे बिल पर हम या तो वॉक आउट करेंगे या खिलाफ में वोट करेंगे. आपने एक राज्य को 2 नगर पालिकाएं बना दिया, उन लोगों को फिक्र कौन करेगा.

 

 

उन्होंने कहा कि देश में कई और भी मुद्दे हैं, गरीबी है, सीमा सुरक्षित नहीं है, घुसपैठ हो रही है, रोज लोग मारे जा रहे हैं. बालू ने कहा कि इन दो विधेयकों को पारित करने का हक सिर्फ विधानसभा का है, संसद इसकी अधिकारी नहीं है. वहां की संविधान सभा इसे सुलझाने में सक्षम है लेकिन आपने सिर्फ अपने घोषणापत्र को लागू करते हुए 370 को हटा दिया, यह सिर्फ आपका मकसद है लेकिन जनता की मंशा कुछ और है. डीएमके ने इस बिल का विरोध किया है

 

 

कश्मीर के हालात और बिगड़ सकते हैं: सुदीप

टीएमसी सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने कहा कि इस हालात का असर सिर्फ जम्मू कश्मीर पर ही नहीं अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां के लोगों के लिए हमारे दिलों में खास संवेदना है. सुदीप ने कहा कि जब धारा 370 लागू की गई तब के नेताओं ने इस लागू करना जरूरी समझा होगा.

 

 

 

इसके बाद महाराज हरि सिंह ने भारत में विलय को हामी भरी. हमेशा धारा 370 को गलत तरीके से लागू करने की बात नहीं कहनी चाहिए. अगर वहां के लोगों को अपने संवैधानिक अधिकार और विधानसभा है तो उन्हें इस पर फैसले लेने का हक मिलना चाहिए. सरकार ने एक राज्य को केंद्र शासित क्यों बना दिया. अगर वहां अनिश्चितता और बढ़ जाएगी क्योंकि हजारों जवानों की तैनाती पहले ही की जा चुकी है. हालात खराब भी हो सकते हैं और देश भर में इसका खराब असर पड़ सकता है

 

 

 

जिन लोगों को कांग्रेस की हिस्टरी या जम्मू कश्मीर हिस्टरी नही पता, वो पहले हिस्टरी पढ़ लें, फिर कांग्रेस में रहें:गुलाम नबी आज़ाद 

 

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद से जब उनसे पूछा गया कि पार्टी के कुछ नेता आर्टिकल370 के उन्मूलन का समर्थन कर रहे हैं, तो इस पर उन्होने (गुलाम नबी आज़ाद आज़ाद) कहा कि ,जिन लोगों को जम्मू कश्मीर  की हिस्टरी या कॉंग्रेस की हिस्टरी पता नही उनसे मुझे कोई लेना देना नही है. वो पहले जम्मू कश्मीर और कॉंग्रेस की हिस्टरी पढ़ लें, फिर कॉंग्रेस में रहें.”

 

 

 

कांग्रेस ने लड़ी देश की आजादी की लड़ाई: थरूर

लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं को बंद कर आपने गैर लोकतांत्रिक लोगों के लिए रास्ते खोल दिए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा को आज खतरा है. थरूर ने कहा कि यह फैसला अतिवाद को बढ़ावा देगा और कश्मीर में युवाओं को आतंकवाद की ओर ढकेलना का काम करेगा.

 

 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर UN में जा रहा है, क्या यह हमारे लिए शर्म की बात नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार हमें एंटी नेशनल कहती रहती है लेकिन हमें इनसे राष्ट्रवाद का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है, हम ही एक ऐसी पार्टी हैं जो देश की आजादी के लिए लड़े थे, देश के मूल्यों की रक्षा के लिए लड़े थे. शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि गृह मंत्री एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के कश्मीर में लेकर जाएं और वहां की जमीनी हकीकत देखें

 

 

 

थरूर ने कहा कि, हम सभी को याद है कि पिछली बार पीएम ने देश को एक ऐसा फैसला सुनाया था, जो शुरू में उनकी निर्णायकता के लिए सराहा गया था, ठीक उसी तरह जैसे आज और विमुद्रीकरण की आपदा थी। राष्ट्र अब भी उस कार्रवाई के विनाशकारी परिणामों से निपट रहा है।

 

 

शशि थरूर, ने कहा कि, ​​हम क्यों सोचते हैं कि यह वास्तव में एक काला दिन है…? क्योंकि दो पूर्व J&K सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी हो रही है और हमारे अपने सहयोगी फारूक अब्दुल्ला का ठिकाना अभी भी स्पष्ट नहीं है। हम अब भी जानना चाहते हैं कि वह कहां है….?

 

 

 

टीडीपी ने किया बिल का समर्थन

टीडीपी ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल का समर्थन किया है. पार्टी के सांसद जयदेव गल्ला ने कहा कि धारा 370 एक अस्थाई प्रावधान था और इसे जम्मू कश्मीर की जनता के हित के लिए हटना सही फैसला है. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से पहले ही कश्मीर को काफी नुकसान हो चुका है और देश के कानून वहां लागू नहीं होते थे अब इस क्षेत्र के लिए नई शुरूआत होने जा रही है. गल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जल्द हालात सामन्य होने चाहिए और वहां के लोग शांति से रहें, ऐसे इंतजाम होना चाहिए.

 

 

 

सीपीएम ने किया बिल का विरोध

लोकसभा में सीपीएम सांसद अब्दुल मजीद आरिफ ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि बिल का विरोध करने वालों को पाकिस्तानी कहना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि आज देश अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है और सदन में UAPA, NIA बिल कैसे पास हुए यह सभी को पता है. मजीद ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और पूर्वोत्तर के राज्यों को भी विशेष दर्जा हासिल है उसे क्यों नहीं हटाया गया.

 

 

 

 

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