मध्य प्रदेश में कमल की सरकार, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके नाम का रखा प्रस्ताव

  • Line : kapil patel
  • 12 December,2018
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मध्य प्रदेश में कमल की सरकार, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके नाम का रखा प्रस्ताव

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री हो सकते हैं। विधायक दल की बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा है। हालांकि मुख्यमंत्री कौन होगा असका अंतिम फैसला राहुल गांधी को ही करना है। बता दें कि भोपाल में कई घंटों से चल रही कांग्रेस विधायकों की बैठक खत्म हो गई है।

 

 

 

भोपाल में बुधवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस मौके पर पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक ए के एंटोनी, प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नवनिर्वाचित विधायक भी मौजूद थे। नेता के चयन के लिए राहुल गांधी को अधिकृत करने संबंधी प्रस्ताव वरिष्ठ विधायक आरिफ अकील ने रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। अब यह प्रस्ताव लेकर एंटोनी कांग्रेस अध्यक्ष के पास जाएंगे और उन्हें बैठक के संबंध में अवगत कराएंगे।

 

 

प्रदेश कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने इस संबंध में बैठक के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एंटोनी ने विधायकों से भी चर्चा की। अब नेता के चयन का मामला राहुल गांधी तय करेंगे।

 

 

 

कमलनाथ, छिंदवाड़ा से सांसद हैं। वो नौ बार यहां से चुने गए। कुछ महीने पहले जब अरुण यादव से पार्टी की कमान छीनकर कमलनाथ को दी गई तो इसको लेकर काफी चर्चा हुई। कुछ धड़ों में नाराजगी भी दिखी। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखा जाए तो ये पार्टी के लिए खरा सौदा साबित हुआ।

 

 

 

 

कमलनाथ ने पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर अलग-अलग तबकों से बात की, मुलाकात की। जहां जरूरत थी वहां लोगों को समझाया। पुराने रिश्ते फिर खंगाले। नए रिश्तों को बनाने की कोशिश की। हालांकि, इन कोशिशों में कुछ वायरल होते वीडियो ने स्पीड ब्रेकर का काम भी किया लेकिन कांग्रेस की गाड़ी धीमे-धीमे ही सही आगे खिसकती रही।

 

 

 

 

कमलनाथ छिंदवाड़ा से शानदार जीत हासिल करते हुए 34 साल की उम्र में लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पूरी तरह छिंदवाड़ा के हो गए। वह इस सीट से 9 बार जीते, हालांकि 1997 में सिर्फ एक बार उन्हें सुंदरलाल पटवा के हाथों हार मिली।

 

 

 

केंद्रीय मंत्री रहते उन्होंने छिंदवाड़ा में कई काम कराए जिसका प्रतिसाद उन्हें हर बार चुनाव में जीत के रूप में मिला। 2014 में भी उन्होंने तब चुनाव जीता जब कांग्रेस की हालत बेहद बुरी थी और वह महज 44 सीटों पर ही सिमट गई थी।

 

 

 

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