नोएडा में हिंसक प्रदर्शन: क्यों सुलगी विरोध प्रदर्शन की आग, क्या हैं कर्मचारियों की मांगें? , 150 गाड़ियां तोड़ीं
नोएडा के औद्योगिक इलाकों में कई दिनों से simmer कर रहा श्रमिक असंतोष सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को खुलकर सड़कों पर आ गया। वेतन वृद्धि, तय कार्य-घंटे, ओवरटाइम भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर बड़ी संख्या में मजदूर Phase-2, Sector 60, Sector 62 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में जुटे। शुरुआत नारेबाजी और धरने से हुई, लेकिन कुछ जगह हालात तेजी से बिगड़े और मामला आगजनी, पथराव, तोड़फोड़ और सड़क जाम तक पहुंच गया। प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शन ने दिल्ली-नोएडा कनेक्टिविटी पर भी सीधा असर डाला और NH-9, चिल्ला बॉर्डर तथा लिंक रोड पर लंबी जाम की स्थिति बनी।
इस विरोध की जड़ में केवल एक दिन का गुस्सा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वेतन और कामकाजी शर्तों की शिकायतें हैं। कई श्रमिकों ने कहा कि 12 घंटे तक काम कराने के बावजूद मासिक आय इतनी कम है कि किराया, राशन, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। कुछ मजदूरों ने आठ घंटे की ड्यूटी पर 20,000 रुपये मासिक वेतन, तय ओवरटाइम और सरकारी श्रम मानकों के पालन की मांग रखी। कई बयान यह भी बताते हैं कि वेतन वृद्धि बहुत मामूली रही, जबकि महंगाई, किराया और घरेलू खर्च लगातार बढ़े हैं। यही वजह है कि आंदोलन एक फैक्ट्री या एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई औद्योगिक इकाइयों का साझा असंतोष बन गया।
सोमवार सुबह स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी समूहों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर वाहनों में आग लगा दी गई, पुलिस और निजी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई और पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस ने कहा कि हालात संभालने के लिए “न्यूनतम बल” का इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। अधिकारियों ने फायरिंग से इनकार किया और कहा कि हिंसा को सीमित दायरे में काबू किया गया। दिन चढ़ने के साथ PAC, RAF, QRT और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, जबकि वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर बातचीत और नियंत्रण की कोशिश करते रहे।
इस उग्र प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर ट्रैफिक पर पड़ा। दिल्ली से नोएडा आने-जाने वाले हजारों दफ्तर जाने वाले लोग सुबह के पीक आवर में फंस गए। चिल्ला बॉर्डर, DND से जुड़ने वाले मार्ग, लिंक रोड और NH-9 पर यातायात लंबे समय तक बुरी तरह प्रभावित रहा। दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक अधिकारियों को वैकल्पिक रूट एडवाइजरी जारी करनी पड़ी। हालांकि शाम तक राहत की तस्वीर सामने आई। ताज़ा अपडेट के अनुसार, चिल्ला बॉर्डर दोबारा खुल गया और दिल्ली-नोएडा सीमाओं पर ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य होने लगा। इससे संकेत मिला कि प्रशासन ने कम-से-कम तत्काल यातायात संकट को नियंत्रित कर लिया है, भले ही मूल श्रम विवाद अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।
हिंसा से पहले जिला प्रशासन ने रविवार को श्रमिकों की शिकायतें कम करने के लिए कुछ राहत उपाय घोषित किए थे। आधिकारिक बयानों के अनुसार, सभी फैक्ट्रियों को समय पर वेतन भुगतान, हर महीने की 10 तारीख तक सैलरी, सैलरी स्लिप देना, साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करना और छुट्टी के दिन काम कराने पर दोगुना भुगतान करने को कहा गया। ओवरटाइम पर डबल पे, बोनस को 30 नवंबर तक बैंक खाते में भेजने, कार्यस्थल सुरक्षा बढ़ाने और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए आंतरिक समिति बनाने जैसे कदम भी सामने आए। लेकिन सोमवार की घटनाओं ने दिखा दिया कि केवल आश्वासन भर से गुस्सा शांत नहीं हुआ और जमीनी भरोसे की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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