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”जिसे घंटा बजाना था, प्रवचन करना था, वह राज कर रहे हैं और हम यहाँ प्रवचन कर रहे हैं।” - शरद यादव

  • by: news desk
  • 15 September, 2019
”जिसे घंटा बजाना था, प्रवचन करना था, वह राज कर रहे हैं और हम यहाँ प्रवचन कर रहे हैं।”  - शरद यादव

बदलते राजनीतिक एवं सामाजिक परिदृश्य में सामाजिक न्याय की प्रासंगिकता पर लखनऊ में संगोष्ठी का आयोजन हुआ। अमित कुमार मंडल की रिपोर्ट।



पिछड़ों के मसीहा सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल जी की 101 वी जयंती पर सामाजिक चेतना फाउंडेशन द्वारा ”बदलते सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य में सामाजिक न्याय की प्रासंगिकता” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन लखनऊ में किया गया।



यह संगोष्ठी सामाजिक चेतना फाउंडेशन के बैनर तले उर्दू अकादमी गोमती नगर नगर में संपन्न हुई। जिसके मुख्य अतिथि मंडल मसीहा एवं अपने दार्शनिक प्रबोधन के प्रभाव से 90 के दशक में उत्तर भारत को अपने अधिकारों को लेकर आंदोलित कर देने वाले प्रसिद्ध समाजवादी नेता शरद यादव जी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह जी ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली से आए प्रोफ़ेसर सूरज मंडल, प्रोफेसर रतनलाल, अनिल जय हिंद जी एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत जी रहे। कार्यक्रम का संचालन छबीलाल अंबेडकर जी ने किया।



विदित हो कि सामाजिक चेतना फाउंडेशन (जिसके अध्यक्ष महेंद्र यादव जी हैं।) लगातार कई वर्षों से ऐसा कार्यक्रम करता आया है और इसी कड़ी में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।



कार्यक्रम के वक्ता सूरज मंडल जी (बी पी मंडल जी के पोते) ने विस्तार से मंडल कमीशन रिपोर्ट के बारे में बताया। इसके साथ ही हाल ही में हुए दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर मीडिया पर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चुनाव में भाजपा से संबंधित प्रत्याशी की बुरी तरह हार हुई है जो कि मीडिया नहीं दिखा रहा। यह चुनाव महत्वपूर्ण इसलिए भी रहा कि यह चुनाव बैलेट पेपर से हुआ है। आगे उन्होंने सामाजिक न्याय की पक्षधर पार्टियों के खत्म होने का कारण ईवीएम को बताया।



लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत जी ने बड़े ही संक्षिप्त व्याख्यान में बहुसंख्यक समाज को झकझोरने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े समाज को लोकशाही में भी अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है।



डॉक्टर संदीप ने अपने नेताओं को ही कटघरे में खड़ा किया और दुर्गति की सारी जिम्मेदारी उनके माथे मढ़ दी।



दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतन लाल जी ने कांशीराम जी को याद करते हुए आज के बहुजन नेताओं को आड़े हाथ लिया। साथ ही बहुसंख्यक समाज को सड़क पर उतरकर अपने अधिकार सुनिश्चित करवाने पर जोर दिया। इसी के साथ उन्होंने नेता पैदा करने की भी बात की। जिसके लिए ”बहुजन स्कूल आफ थॉट एंड पॉलीटिकल लीडर” जैसे विचार का भी प्रतिपादन किया। उन्होंने अपने भाषण के अंत में सामाजिक न्याय के साथ सेकुलरिज्म पर भी काम करने की हिदायत दी।



दिल्ली से चलकर आए अनिल जय हिंद जी ने आज के वक़्त को सामाजिक न्याय की लड़ाई का सबसे बुरा समय बताया और ऐसे समय में कार्यक्रम की सराहना की। इसके साथ ही मंडल कमीशन को लागू कराने में शरद यादव जी के दाँव-पेच के बारे में भी विस्तार से बताया।



जस्टिस राजाराम जी ने अपने आप को बोलने के बजाय सुनने का आदी बताया। बिसवा के पूर्व विधायक रामपाल यादव जी ने कहा कि आज कमंडल मंडल पर भारी हो गया है। जिसके लिए उन्होंने संघर्ष को एकमात्र रास्ता बताया।



कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शरद यादव जी ने प्रमुखता से तीन चार बड़ी महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमारे लोग जातियों में बट गए हैं। जो सामाजिक न्याय के लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने देश भर में घूम-घूम कर जातियों को जोड़कर जमात बनाई थी। जो अब बिल्कुल बिखर गयी है। इसलिए लड़ाई बहुत कठिन हो गई है। इस मौके पर उन्होंने तमाम महापुरुषों का नाम लेकर कहा कि सब लड़ते-लड़ते हार गए। लेकिन समाज में बहुत बदलाव नहीं आया।



उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए उत्तर भारत को उपयुक्त मानते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार ही इन्हें चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने इस चुनाव में हुए पराजय को बड़ी पराजय बताते हुए अपने नेताओं को जिम्मेदार ठहराया कि यह सारे लोग समाज को जोड़ने में असफल रहे। उन्होंने कहा हमने 3 प्रधानमंत्री बनाये। 6 से ज्यादा मुख्यमंत्री बनाए और हजारों विधायक, सांसद बनाए। लेकिन सब के सब ”घर चंगा करने में लग गए” जिसका हश्र सामने है।



उन्होंने देश में हो रही मॉब लिंचिंग और गाय के नाम पर लोगों को मार डालने का जिक्र करते हुए सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का मुसलमान डरा हुआ है। उसके साथ खड़े होने की अपील की और साथ ही साथ उन्होंने कहा कि 30 साल सामाजिक न्याय की पक्षधर पार्टियां सत्ता में रहीं। जिसमें अहम भूमिका मुसलमानों की रही। इसलिए इस वक्त में मुसलमानों के साथ खड़ा होने की जरूरत है।



 



उन्होंने पाखंड पर जोरदार हमला बोलते हुए बुद्ध के दर्शन को उपयुक्त बताया। साथ ही इंसान की पूजा को सबसे बड़ा धर्म बताया। उन्होंने हर कार्यक्रम में बहन, बेटियों तथा दलितों को अधिक से अधिक संख्या में बुलाने पर भी जोर दिया।



 



शरद यादव जी ने चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए मीडिया पर भी हमला किया और उन्होंने चौधरी साहब की बात को दोहराते हुए कहा कि मीडिया और अखबार की बात को उल्टा समझा करें।



 



अंत में शरद यादव जी ने वयस्क मताधिकार को सबसे बड़ा अधिकार बताते हुए कहा कि हमारे लोग इसे चंद पैसों में बेच देते हैं। जिसकी असली कीमत 24.5 लाख करोड़ है। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि एक योगी को यह बात समझ में आती है लेकिन हमारे लोगों को नहीं आती।



 



आगे उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ”जिसे घंटा बजाना था, प्रवचन करना था, वह राज कर रहे हैं और हम यहाँ प्रवचन कर रहे हैं।” यह सामाजिक न्याय की हार नहीं है तो और क्या है? शरद यादव जी अपने जमाने के दिनों को याद करते हुए मीडिया पर दोबारा बरसे और कहा कि ”कभी शरद यादव चलता था तो तूफान आता था और कल 100 से ज्यादा मीडिया चैनल वाले आए थे कॉन्फ्रेंस में। लेकिन कहीं जिक्र ही नहीं किया।”



 



आज के समय को उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए मुश्किल का दौर बताते हुए संभावनाएं तलाशने को कहा और ऐसे कार्यक्रमों की सराहना की।



 



कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह जी ने न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व के सवाल को महत्वपूर्ण बताया और साथ ही साथ ऐसे कार्यक्रमों के लिए आशीर्वाद दिया।



 



 



 


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