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Statue Of Unity: सरदार पटेल की जयंती पर दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति “एकता की प्रतिमा” का किया जाएगा उद्घाटन

  • 30 October,2018
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Statue Of Unity: सरदार पटेल की जयंती पर दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति “एकता की प्रतिमा” का किया जाएगा उद्घाटन

नई दिल्ली:  31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर  समारोह के दौरान 33 महीने के रिकॉर्ड समय में एक इंजीनियरिंग चमत्कार पूरा हुआ, दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति-सरदार पटेल की मूर्ति या एकता की प्रतिमा का उद्घाटन किया जाएगा। 31 अक्टूबर 2013 को परियोजना के लिए आधारशिला रखी गई ..प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इसका उद्घाटन करने वाले भी होंगे।

 

 

 

गुजरात: सरदार वल्लभभाई पटेल की StatueOfUnity का उद्घाटन 143 वीं जयंती पर किया जाएगा

 

 

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कहा, कल एक ऐतिहासिक दिन है जो दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है, सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा जो भारत को एकजुट करती है, देश को समर्पित होगी। गुजरात के मुख्यमंत्री के समय से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था। उनका सपना सच हो रहा है

 

 

 

 

न्यू यॉर्क में स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाई को दोगुना करें, गुजरात में नर्मदा बांध के पास सरदार पटेल की मूर्ति दुनिया में सबसे ऊंची नहीं है बल्कि यह भी कम से कम समय में पूरी की जाएगी। 182 मीटर की एकता की प्रतिमा ने पूरा होने में 33 महीने का समय लिया, जबकि चीन के वसंत मंदिर बुद्ध की मूर्ति में 11 साल लगे।

 

 

 

 

2,98 9 करोड़ रुपये की लागत से लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड द्वारा निर्मित, एकता की प्रतिमा 1,700 टन कांस्य और बाहरी पर 1,850 टन कांस्य cladding से बना है। इंटीरियर कंक्रीट सीमेंट (180,000 घन मीटर), प्रबलित स्टील (18,500 टन) और संरचित स्टील (6,500 टन) से भरा हुआ है।

 

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 मूर्ति के कोर में दो हाई स्पीड पैसेंजर लिफ्ट हैं जो आपको मूर्ति की छाती तक एक देखने वाली गैलरी में ले जाते हैं, जो एक समय में 200 पर्यटकों को समायोजित कर सकता है। यह नर्मदा नदी के सुरम्य परिवेशों और सतपुरा और विंध्याचल पहाड़ियों से घिरा हुआ बांध के पक्षी के नजरिए को देखने के लिए भी सबसे अच्छी जगह है।

 

 

 

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है और ऊंचाई 522 फिट यानी 182 मीटर है. प्रतिमा अपने आप में अनूठी है. इसके पैर की ऊंचाई 80 फिट, हाथ की ऊंचाई 70 फिट, कंधे की ऊंचाई 140 फिट और चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है

 

 

इस मूर्ति का निर्माण राम वी. सुतार की देखरेख में हुआ है. देश-विदेश में अपनी शिल्प कला का लोहा मनवाने वाले राम वी. सुतार को साल 2016 में सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था. इससे पहले वर्ष 1999 में उन्हें पद्मश्री भी प्रदान किया जा चुका है. इसके अलावा वे बांबे आर्ट सोसायटी के लाइफ टाइम अचीवमेंट समेत अन्य पुरस्कार से भी नवाजे गए हैं.  वह इन दिनों मुंबई के समुंदर में लगने वाली शिवाजी की प्रतिमा की डिजाइन भी तैयार करने में जुटे हैं. महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि यह प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को भी पीछे छोड़ देगी और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी.

 

 

चीन स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के नाम अब तक सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था. मगर सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ने अब चीन में स्थापित इस मूर्ति को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया है. 182 मीटर ऊंचे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का आकार न्यूयॉर्क के 93 मीटर उंचे ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुना है.

 

 

 

 

मूर्ति बनाने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने दावा किया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है और महज 33 माह के रिकॉर्ड कम समय में बनकर तैयार हुई है. जबकि  स्प्रिंग टेंपल के बुद्ध की मूर्ति के निर्माण में 11 साल का वक्त लगा. कंपनी के मुताबिक यह प्रतिमा न्यूयॉर्क में स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है.

 

 

 

सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया. कंपनी के मुताबिक, कांसे की परत चढ़ाने के  आशिंक कार्य को छोड़ कर बाकी पूरा निर्माण देश में ही किया गया है. यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कंपनी ने कहा कि रैफ्ट निर्माण का काम वास्तव में 19 दिसंबर, 2015 को शुरू हुआ था और 33 माह में इसे पूरा कर लिया गया.

 

 

इस स्मारक की आधारशिला  31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इसके लिये बीजेपी ने पूरे देश में लोहा इकट्ठा करने का अभियान भी चलाया गया.

 

 

सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये. वहीं 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएंगे. 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये.

 

 

 

बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल पटेल ) ने पटेल की प्रतिमा के अनावरण के मौके का पार्टी कार्यकर्ताओं को साक्षी बनाने के लिए ट्रेन से ले जाने की घोषणा की है. पार्टी ने बताया कि ‘यूनिटी ट्रेन’ नामक गाड़ी र वाराणसी से चलकर मिर्जापुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ और झांसी होते हुए गुजरात पहुंचेगी.

 

 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे के दौरान भी भारतीयों से बातचीत के दौरान दुनिया की इस सबसे ऊंची मूर्ति का जिक्र कर चुके हैं. साथ ही उन्हें इस मूर्ति को देखने के लिए आमंत्रित भी कर चुके हैं. बताया जाता है कि मूर्ति के उद्घाटन समारोह के लिए गुजरात सरकार ने देश की तमाम राजनीतिक व अन्य हस्तियों को आमंत्रित किया है.

 

 

 

 

 

Author : kapil patel
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