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महज़ 10 साल की उम्र में कंपनी का CEO! दुनिया को चौंकाने वाला बाल उद्यमी

By tvlnews January 29, 2026
महज़ 10 साल की उम्र में कंपनी का CEO! दुनिया को चौंकाने वाला बाल उद्यमी

दुनिया में अक्सर यह माना जाता है कि बड़ी जिम्मेदारियों के लिए बड़ी उम्र और लंबा अनुभव जरूरी होता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक खबर ने इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। महज़ 10 साल की उम्र में एक बच्चे ने अपनी कंपनी का CEO बनकर दुनिया को चौंका दिया है।
 यह कहानी न सिर्फ अजब-गजब है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी है।

कौन है यह 10 साल का CEO?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बच्चा कम उम्र में ही बिज़नेस आइडिया, टेक्नोलॉजी और लीडरशिप की समझ रखता है। उसने अपने माता-पिता और मेंटर्स की मदद से एक स्टार्टअप शुरू किया, जो डिजिटल प्रोडक्ट्स और बच्चों से जुड़े इनोवेटिव सॉल्यूशंस पर काम करता है।

शुरुआत में यह एक छोटा सा आइडिया था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक रजिस्टर्ड कंपनी में बदल गया—और उसी कंपनी का CEO बना यह 10 साल का बच्चा।

कैसे आई इतनी कम उम्र में बिज़नेस समझ?

विशेषज्ञों के मुताबिक, आज का डिजिटल दौर बच्चों को जल्दी सीखने का मौका देता है।

  • ऑनलाइन कोर्स

  • कोडिंग और गेम डेवलपमेंट

  • डिजिटल मार्केटिंग की बेसिक समझ

इन सबने इस बच्चे को कम उम्र में ही आगे बढ़ने का प्लेटफॉर्म दिया।

परिवार और मेंटर्स की भूमिका

हालांकि CEO की कुर्सी इस बच्चे के पास है, लेकिन कंपनी का संचालन पूरी तरह निगरानी और कानूनी ढांचे के तहत होता है। माता-पिता, बिज़नेस मेंटर्स और कानूनी सलाहकार कंपनी के फैसलों में मार्गदर्शन करते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना सही मार्गदर्शन के इतनी कम उम्र में बिज़नेस संभालना संभव नहीं

क्या कहता है कानून?

अधिकांश देशों में नाबालिग सीधे कानूनी रूप से कंपनी नहीं चला सकते। ऐसे मामलों में:

  • कंपनी ट्रस्ट या गार्जियनशिप मॉडल पर चलाई जाती है

  • सभी कानूनी दस्तावेज माता-पिता या अभिभावकों के नाम पर होते हैं

  • CEO का पद प्रतीकात्मक और रणनीतिक भूमिका में होता है

यही मॉडल इस बच्चे के केस में भी अपनाया गया है।

दुनिया क्यों हो रही है हैरान?

क्योंकि यह खबर उस सोच को चुनौती देती है कि उम्र ही काबिलियत का पैमाना है
 सोशल मीडिया पर लोग इस बच्चे को “Future Leader” और “Gen Alpha CEO” कह रहे हैं।

इस तरह की प्रेरक बाल उद्यमी कहानियों को पहले भी Forbes और Reuters जैसे प्रतिष्ठित मीडिया प्लेटफॉर्म कवर कर चुके हैं।

भारत के लिए क्या है संदेश?

भारत जैसे युवा देश के लिए यह खबर बेहद अहम है।
 यह दिखाती है कि:

  • सही शिक्षा और माहौल मिले तो बच्चे भी इनोवेटर बन सकते हैं

  • रटने वाली पढ़ाई से आगे सोचने की जरूरत है

  • स्किल-बेस्ड लर्निंग भविष्य की कुंजी है

शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत से भी ऐसे कई “Young CEOs” सामने आ सकते हैं।

आलोचना और सवाल भी

हालांकि कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इतनी कम उम्र में बच्चों पर बिज़नेस का दबाव सही है या नहीं।
 मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को:

  • पढ़ाई

  • खेल

  • सामाजिक जीवन

का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

फिर भी क्यों है यह कहानी खास?

क्योंकि यह सिर्फ CEO बनने की कहानी नहीं है, बल्कि सोच बदलने की कहानी है
 यह बताती है कि प्रतिभा उम्र नहीं देखती—बस अवसर चाहती है।


निष्कर्ष

10 साल की उम्र में कंपनी का CEO बनना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन यह चमत्कार मेहनत, सही मार्गदर्शन और आधुनिक शिक्षा का नतीजा है।
 यह खबर दुनिया को यह याद दिलाती है कि काबिलियत की कोई उम्र नहीं होती



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