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25 अगस्त 2026

बाराबंकी टोल प्लाजा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल: आरोपियों को जमानत, सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर

सुप्रीम कोर्ट ने बाराबंकी टोल प्लाजा प्रकरण में आरोपियों को निजी मुचलके पर जमानत देने और FIR No. 15/2026 से जुड़ी आगे की कार्यवाही दिल्ली की तीस हजारी अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। अदालत न…

बाराबंकी टोल प्लाजा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल: आरोपियों को जमानत, सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर
बाराबंकी टोल प्लाजा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल: आरोपियों को जमानत, सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर | फ़ोटो: TVL News

सुप्रीम कोर्ट ने बाराबंकी टोल प्लाजा प्रकरण में आरोपियों को निजी मुचलके पर जमानत देने और FIR No. 15/2026 से जुड़ी आगे की कार्यवाही दिल्ली की तीस हजारी अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपियों को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व और निष्पक्ष सुनवाई मिलनी चाहिए। आदेश में बाराबंकी बार के कुछ सदस्यों के आचरण पर कड़ी टिप्पणी भी की गई और उत्तर प्रदेश के डीजीपी को आरोपियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया।

बाराबंकी टोल प्लाजा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी टोल प्लाजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है, जिसने इस प्रकरण को सिर्फ एक आपराधिक विवाद से आगे बढ़ाकर निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़ दिया है। अदालत ने आरोपियों को निजी मुचलके पर तुरंत जमानत देने का निर्देश दिया और कहा कि FIR No. 15/2026 से जुड़ी आगे की कार्यवाही—रिमांड, जांच-नतीजे की फाइलिंग और ट्रायल—अब दिल्ली की तीस हजारी अदालत में होगी।

अदालत के 17 मार्च 2026 के आदेश के मुताबिक, यह ट्रांसफर इसलिए किया गया ताकि आरोपियों को “proper legal representation and a fair trial” मिल सके। आदेश में यह भी कहा गया कि तीस हजारी अदालत आवश्यकता पड़ने पर जमानत की अतिरिक्त शर्तें तय कर सकती है। साथ ही, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया गया कि आरोपियों की रिहाई के बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि 14 जनवरी 2026 की उस घटना से जुड़ी है, जब बाराबंकी के बारा-हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर वकील रत्नेश शुक्ला और टोल कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ। बाद की रिपोर्टों के अनुसार, टोल भुगतान को लेकर शुरू हुआ विवाद हाथापाई तक पहुंच गया और इसके बाद पुलिस ने टोल मैनेजर व कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। 16 जनवरी तक उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की बात भी रिपोर्ट हुई थी।

इस प्रकरण ने नया मोड़ तब लिया जब आरोपियों की ओर से पेश होने वाले एक वकील के खिलाफ स्थानीय स्तर पर हिंसक प्रतिक्रिया की खबरें सामने आईं। अदालत ने अपने आदेश में बाराबंकी बार के कुछ सदस्यों की भूमिका की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने bail application दाखिल करने वाले वकील के दफ्तर का सामान तोड़कर “hooliganism” किया। रिपोर्टों के मुताबिक, स्थानीय वकीलों के बीच यह भी माहौल बन गया था कि आरोपी टोल कर्मचारियों का केस कोई न ले।

यही वजह है कि यह आदेश केवल जमानत का आदेश नहीं रह गया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि यदि किसी राज्य या जिले में आरोपियों को वकील तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा, तो अदालत निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए असाधारण कदम उठा सकती है। इस फैसले का बड़ा संदेश यही है कि न्याय प्रक्रिया भीड़, दबाव या पेशेगत एकजुटता से नहीं, बल्कि कानून और निष्पक्षता से चलेगी।




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यह रिपोर्ट 18 मार्च 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 18 मार्च 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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