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23 सितंबर 2026

यूपी में हर अंडे पर एक्सपायरी डेट: ताजगी, ट्रेसबिलिटी और उपभोक्ता अधिकार की नई शुरुआत

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अंडा उत्पादकों के लिए हर अंडे पर लेइंग डेट और एक्सपायरी डेट अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। बिना तारीख वाले अंडों को नष्ट किया जा सकता है या “मानव उपभोग के लिए…

यूपी में हर अंडे पर एक्सपायरी डेट: ताजगी, ट्रेसबिलिटी और उपभोक्ता अधिकार की नई शुरुआत
यूपी में हर अंडे पर एक्सपायरी डेट: ताजगी, ट्रेसबिलिटी और उपभोक्ता अधिकार की नई शुरुआत | फ़ोटो: TVL News

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अंडा उत्पादकों के लिए हर अंडे पर लेइंग डेट और एक्सपायरी डेट अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। बिना तारीख वाले अंडों को नष्ट किया जा सकता है या “मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त” चिह्नित किया जा सकता है। यह कदम उपभोक्ताओं को ताजगी की जानकारी देने, खाद्य-सुरक्षा बढ़ाने और सप्लाई चेन में जवाबदेही लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। फिलहाल यह राज्य-स्तरीय कदम है; देशव्यापी नियम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलग निर्णय की जरूरत होगी।

यूपी में अब हर अंडे पर एक्सपायरी डेट लिखनी होगी

उत्तर प्रदेश में अंडा खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव आने जा रहा है। राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अंडा उत्पादकों को हर अंडे पर दो जानकारियां दर्ज करना अनिवार्य किया है—अंडा कब दिया गया और उसकी एक्सपायरी डेट क्या है। रिपोर्टों के अनुसार, नियम का पालन न करने पर ऐसे अंडों को नष्ट किया जा सकता है या “मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त” के रूप में चिह्नित किया जा सकता है।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ढीले या खुले अंडे खरीदते समय उपभोक्ता आमतौर पर यह नहीं जान पाते कि अंडा कितना पुराना है। पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर तारीख-चिह्नन के नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन खुले अंडों के मामले में यह पारदर्शिता अक्सर गायब रहती थी। FSSAI के लेबलिंग नियम broadly date marking की मांग करते हैं, लेकिन यूपी का यह आदेश loose eggs के स्तर पर ताजगी और traceability को अधिक सीधे तरीके से लागू करता दिख रहा है।

उपभोक्ता हित के लिहाज से यह बदलाव साधारण नहीं है। अंडा एक जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तु है, और उसकी ताजगी भंडारण, तापमान और सप्लाई चेन पर निर्भर करती है। जब shell पर ही laying date और expiry date होगी, तो ग्राहक दुकानदार के दावे पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा। इससे खरीद अधिक informed हो सकती है, और विक्रेताओं पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे पुराना स्टॉक नए माल के साथ न मिलाएं।

यह नियम व्यापार और आपूर्ति-श्रृंखला के लिए भी बड़ा संकेत है। हर अंडे पर stamping का मतलब है कि producer level पर sorting, marking और distribution systems को अधिक व्यवस्थित करना होगा। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि राज्य में egg cold storage infrastructure सीमित है, इसलिए labeling के साथ storage और logistics सुधार की चर्चा भी तेज हो सकती है। केवल तारीख लिख देना काफी नहीं होगा; ताजगी बनाए रखने के लिए handling standards भी मजबूत करने होंगे।

क्या यह नियम पूरे देश में लागू होना चाहिए? उपभोक्ता-अधिकार के दृष्टिकोण से इसका तर्क मजबूत है। अगर packaged foods पर manufacturing, packing, best before या expiry information दी जा सकती है, तो खुले अंडों पर कम-से-कम laying date और usability window बताना भी व्यावहारिक मांग लगती है. इससे खाद्य-सुरक्षा, traceability और consumer confidence तीनों को फायदा हो सकता है। लेकिन देशव्यापी लागू करने के लिए राष्ट्रीय नियामक या केंद्र/राज्यों के समन्वित निर्णय की जरूरत होगी; अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कदम उत्तर प्रदेश-विशेष है, ऑल-इंडिया नियम नहीं।




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यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 18 मार्च 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 23 सितंबर 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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