ओडिशा का बड़ा फैसला: बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी — सब पर पूर्ण प्रतिबंध जारी
भुवनेश्वर, 22 जनवरी 2026 — ओडिशा सरकार ने स्वास्थ्य-हित में एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाते हुए राज्य में सभी तंबाकू/निकोटिन-संबंधी उत्पादों — जिनमें गुटखा, पान-मसाला (जिसमें तंबाकू/निकोटिन हो), खैनी, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट और अन्य चबाने/स्मोक करने वाले उत्पाद शामिल हैं — के निर्माण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और विक्रय पर पूरी तरह प्रतिबंध (ban) लगा दिया है। यह नोटिफिकेशन स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग द्वारा 21 जनवरी 2026 को जारी किया गया (Notification No. 2065) और 2013 के आदेश को प्रतिस्थापित करता है।
नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध किसी भी नाम, ब्रांड, या पैकेजिंग में विक्रय होने वाले उत्पादों पर लागू होगा — चाहे वे फ्लेवर्ड/सेंटेड हों या अनपैकेज्ड; साथ ही अलग-अलग पैकेट में उपलब्ध ऐसे उत्पाद भी शामिल हैं, जिनका उपभोक्ता मिलाकर प्रयोग करते हैं। सत्ताधिकारियों का कहना है कि इन उत्पादों की व्यापक उपलब्धता और युवा वर्ग में बढ़ती खपत बड़े सार्वजनिक-स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन रही थी।
सरकार ने क्यों लिया यह निर्णय — सार्वजनिक स्वास्थ्य तर्क
स्वास्थ्य विभाग ने इस कदम का औचित्य मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों से जोड़ा है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC/WHO) ने स्मोकलेस तंबाकू उत्पादों को कैंसरजनक (carcinogenic) घोषित किया है; इससे मुँह, गला, पेट, अग्नाशय व गुर्दे जैसे आंतरिक अंगों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ओडिशा में स्मोकलेस तंबाकू का प्रचलन राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है — द्वितीय दौर के ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार राज्य में 42% से अधिक वयस्क स्मोकलेस तंबाकू उपयोग करते पाए गए थे — यही तमाम कारण सरकार ने गम्भीरता से उठाये।
सरकारी नोटिफिकेशन का स्वर सख्त है: नया भी नहीं बन सकता, पुराना भी नहीं बेचा या संग्रहीत (stock) नहीं रखा जा सकेगा। यानी दुकानदारों, थोक व्यापारियों और वितरकों के पास रखा वर्तमान इन्वेंटरी भी अब कानूनी दायरे में नहीं रहेगी और भंडारण/विक्री पर कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने कहा है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों व FSSAI मार्गदर्शिकाओं के अनुरूप है, ताकि बाजार में उपलब्धता तुरंत घटे।
प्रवर्तन और दंड — क्या होगा उल्लंघन पर?
नोटिफिकेशन में उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के प्रावधानों का हवाला है; साथ ही जब्त, लाइसेंस-रद्दीकरण और संभवतः आपराधिक कार्यवाही का भी अवसर बनेगा। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से निगरानी में जुटेंगे। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि राज्य स्तरीय ‘रैपिड एक्शन’ टीमें और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है ताकि सप्लाई-चेन को प्रभावी तरीके से रोका जा सके।
आर्थिक और सामाजिक असर — दुकानदार, किसान और मेहनतकश वर्ग पर क्या प्रभाव?
यह प्रतिबंध सीधे तौर पर विक्रेता-श्रेणी, छोटे ठेलों पर बिकने वाले उत्पादों के व्यापारियों और उन ठेकेदारों पर असर डालेगा जो गुटखा/पान-मसाला के थोक-आपूर्तिकर्ता हैं। दूसरी ओर, ओडिशा में तंबाकू-उद्योग से जुड़े कुछ स्थानीय रोजगार और आपूर्ति-श्रेणियाँ प्रभावित हो सकती हैं—सरकारी योजना के तहत इन लोगों के लिए वैकल्पिक स्वरोजगार/रिशफल सहायता की आवश्यकता पर विचार सम्भव है। शासन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य हित और दीर्घकालिक आर्थिक भार के तर्क को प्राथमिकता दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सख्त नियमन और आपूर्ति-उत्पादन पर रोक तंबाकू-उपयोग घटाने में अधिक प्रभावशाली होते हैं, खासकर यदि इससे युवाओं तक पहुँच घटे। IARC/WHO के निष्कर्षों और GATS के आँकड़ों का हवाला देते हुए नीतिगत विनियमन को सार्वजनिक-स्वास्थ्य बेहतरी के रूप में देखा जा रहा है। परन्तु नीति-विश्लेषक भी सुझाव देते हैं कि प्रवर्तन, वैकल्पिक आजीविका और वर्ग-विशेष जनजागरूकता अभियानों के साथ ही यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
नोटिफिकेशन के अनुसार खरीद/बेचना/भंडारण/परिवहन/निर्माण पर रोक है — व्यक्तिगत प्रयोजन के लिये छोटे-मात्र होना भी कानूनी जटिलता ला सकता है यदि वह संग्रहीत या बेचने के मकसद से पाया गया। नागरिकों को सलाह है कि वे सेल्फ-कम्प्लायन्स अपनाएँ और स्थानीय प्रशासन या हेल्थ डिपार्टमेंट की गाइडलाइन पर चलें; यदि पास पुराना स्टॉक है तो आधिकारिक अमल/राह-निर्देश का इंतज़ार या परमिट से संबंधित सरकारी घोषणा देखें। (इस लेख में कानूनी सलाह नहीं दी जा रही; कानूनी प्रश्नों के लिये विधिक परामर्श लें)।
ओडिशा का यह निर्णय अन्य राज्यों के लिये उदाहरण बन सकता है—सरकार ने कहा कि यह कदम बच्चों और युवा को तंबाकू-नशे से बचाने, कैंसर मामलों को घटाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य-खर्च को नियंत्रित करने के उद्देश्य से है। अब चुनौती यह है कि नोटिफिकेशन प्रभावी रूप से लागू हो, काली अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रहे और प्रवर्तन के साथ सामाजिक-आर्थिक समर्थन की व्यवस्था हो। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रचार, रोकथाम-प्रोग्राम और शराब/तंबाकू पर वैकल्पिक स्वस्थ विकल्प बताने वाले अभियान अनिवार्य हैं।
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