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दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री साँप — लंबाई और रहस्य

By tvlnews January 21, 2026
दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री साँप — लंबाई और रहस्य

वैज्ञानिकों ने हालिया और पुरालेखीय अध्ययनों के संयोजन से यह निष्कर्ष रखा है कि पृथ्वी पर अब तक मिलना वाला सबसे बड़ा समुद्री साँप Palaeophis colossaeus नामक एक प्राचीन प्रजाति थी, जिसकी संभावित लंबाई 8–12 मीटर (लगभग 27–40 फीट) के बीच आंकी जाती है — जो किसी भी आधुनिक समुद्री साँप से अभूतपूर्व रूप से बड़ी थी।

यह विशाल समुद्री साँप आज के अधिकांश समुद्री-जीवों से भी बड़ा था और जीवाश्म-हड्डियों (विशेषकर कशेरुका/वर्टेब्रा) के आकार व अनुपात के आधार पर शोधकर्ता अनुमान लगाते हैं कि यह समय के दौरान समुद्री शार्क और बड़े मछलियों को शिकार कर सकता था — यानी इसे अपने समय का एक शीर्ष शिकारी माना जाता है।

खोज और पृष्ठभूमि

Palaeophis वंश (Palaeophiidae) के जीवाश्म दुनिया भर के पेलियोजीन-युग के तलछटी शैलाशयों से मिलते हैं। विशेषकर उत्तरी अफ्रीका और ट्रांस-सहारा समुद्री तलछटों में पाए गए अवशेष इस समूह की विविधता और कभी-कभी अत्यधिक आकारवर्धन का संकेत देते हैं। हाल के पुनर्मूल्यन और फॉसिल-आकलन ने P. colossaeus को उस समूह का सबसे विशाल सदस्य बताया है।

यह अनुमान कैसे लगाया गया?

विज्ञानियों के पास अक्सर केवल अलग-थलग कशेरुक अंश होते हैं — एकल या कई वर्टेब्रे— जिनसे कुल शरीर-लंबाई का अनुमान लगाने के लिए सांख्यिकीय प्रतिगमन (regression) और वर्तमान ज्ञात साँपों के अनुपात-पैटर्न का उपयोग किया जाता है। Palaeophis के विशाल वर्टेब्रा के आकार व उनकी औसत-आकृति से अनुमान लगाया गया कि इस प्रजाति की कुल लंबाई 8.1 मीटर से लेकर 12.3 मीटर तक हो सकती है — यह सीमा विभिन्न नमूनों और गणनात्मक विधियों के मुताबिक बदलती रहती है।

क्या यह आधुनिक टाइटनोबोआ से बड़ा था?

टाइटनोबोआ (Titanoboa) — जो आमतौर पर वन भूमि-आश्रित दैत्य साँप के रूप में प्रसिद्ध है — के अनुमानित आकार लगभग 10–12 मीटर तक रहे हैं। Palaeophis colossaeus की अनुमानित अधिकतम लंबाई टाइटनोबोआ के समान या उससे कुछ अधिक भी बताई गई है, पर दोनों अलग-अलग पारिस्थितिक वातावरण (समुद्री बनाम मैदानी/जल-निकट) में रहे। ऐतिहासिक और जीवाश्म-साक्ष्य बताते हैं कि समुद्री जीवन ने कभी-कभी विशालकाय आकार को होस्ट किया है।

भोजन और पारिस्थितिकी — क्या शार्क इसका शिकार थीं?

उच्च कद के वर्टेब्रल आकार और जीवाश्म स्थानिक संदर्भ (शैल-तल की संरचना) यह संकेत देती है कि P. colossaeus ने बड़े मछलियों और छोटे शार्कों को भी दिए जा सकने वाले शिकार के रूप में लक्षित किया होगा। शोधों में यह भी बताया गया है कि प्राचीन उप-सतही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में ऐसे बड़े सरीसृपों का स्थान शीर्ष शिकारी या निकट-शीर्ष शिकारी के रूप में रहा होगा। हालांकि प्रत्यक्ष प्रमाण (उदाहरण: शिकारी-दंते या पेट की सामग्री प्राकृतिक रूप में संरक्षित) दुर्लभ हैं, शोधकर्ता कशेरुका संरचना व तुलनात्मक नृविज्ञान के आधार पर इन निष्कर्षों तक पहुँचते हैं।

आज के समुद्री साँप और तुलना

वर्तमान में जीवित सबसे लंबा समुद्री साँप पीलापन-सा होने वाली प्रजाति Hydrophis spiralis (येलो सी स्नेक) मानी जाती है, जिसकी अधिकतम रिकॉर्ड की गई लंबाई लगभग 2.7–3 मीटर तक है — जो प्राचीन दिग्गजों के केवल अंश मात्र है। आधुनिक समुद्री साँपों का पारिस्थितिकी और विषप्रणाली (venom system) अलग है — वे प्रायः छोटी मछलियों और उभयचर-प्रजातियों पर निर्भर होते हैं।

वैज्ञानिक महत्त्व और उत्तर खुली हुई बातें

  1. अवशेषीय प्राथमिकता: इतने बड़े सरीसृप के जीवाश्म हमें प्रारम्भिक कैनोज़ोज़िक समुद्री-पर्यावरण और तापमान, संसाधन-प्रचुरता और प्रजातिगत प्रतिस्पर्धा की समझ देते हैं।

  2. एवोल्यूशनरी संकेत: विशाल आकार का विकास समुद्री-आवासों में बार-बार देखा गया; यह बताते हुए कि तीव्र तापमान, उच्च जैविक उपलब्धता और अन्य पर्यावरणीय कारक बड़े आकार के पक्ष में रहे होंगे।

  3. सीमाएँ और असमर्थताएँ: जीवाश्म साक्ष्यों का असम्पूर्ण होना और कंकालों की अपर्याप्तता महत्वपूर्ण अनिश्चितताएँ प्रस्तुत करती हैं — इसलिए लंबाई के गणनात्मक अनुमान में भिन्नता बनी रहती है।

Palaeophis colossaeus जैसे प्राचीन समुद्री साँप यह याद दिलाते हैं कि पृथ्वी का जीवन-इतिहास कितनी विशाल विविधता और असाधारण आकारों से भरा रहा है। आधुनिक समुद्र आज भी कई आश्चर्यों का घर है, पर प्रागैतिहासिक महासागरों में रहने वाले ये दिग्गज हमें उस अनदेखी दुनिया की झलक देते हैं जहाँ कभी शार्क भी किसी अलग तरह के शिकारी का सामना कर रही थीं।



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