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23 अगस्त 2026

NDTV के संस्थापकों को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग पर लगाया ₹2 लाख का जुर्माना

दिल्ली हाईकोर्ट ने NDTV के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ वर्ष 2016 में जारी इनकम टैक्स री-असेसमेंट नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले में इनकम टैक्स डिपार…

NDTV के संस्थापकों को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग पर लगाया ₹2 लाख का जुर्माना
NDTV के संस्थापकों को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग पर लगाया ₹2 लाख का जुर्माना | फ़ोटो: TVL News

दिल्ली हाईकोर्ट ने NDTV के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ वर्ष 2016 में जारी इनकम टैक्स री-असेसमेंट नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनोद कुमार शामिल थे, ने सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि आयकर विभाग दोनों याचिकाकर्ताओं को ₹1-1 लाख की राशि टोकन कॉस्ट के रूप में अदा करे।

पुराना मामला दोबारा खोलना कानून के खिलाफ

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक ही मामले को बार-बार खोलना कानूनन गलत है और इसे “राय में बदलाव” (Change of Opinion) माना जाएगा, जो आयकर अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं है।

यह मामला NDTV की प्रमोटर कंपनी RRPR Holding Private Limited को दिए गए कुछ ब्याज-मुक्त लोन से जुड़े लेन-देन से संबंधित था। अदालत को बताया गया कि इन्हीं ट्रांज़ैक्शन की जांच पहले ही एक पूर्व असेसमेंट साइकिल में की जा चुकी थी, जिसका समापन मार्च 2013 में हो गया था।

कोर्ट का सख्त रुख

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
 “इन मामलों में कोई भी जुर्माने की राशि पर्याप्त नहीं हो सकती। लेकिन हम इन मामलों को बिना किसी दंड के नहीं छोड़ सकते। इसलिए प्रतिवादियों पर ₹1 लाख का टोकन जुर्माना लगाया जाता है, जो प्रत्येक याचिकाकर्ता को दिया जाएगा।”

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नोटिस के आधार पर शुरू की गई सभी संबंधित कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें स्वीकार

प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने नवंबर 2017 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि जुलाई 2011 में आयकर विभाग ने पहले ही उसी असेसमेंट वर्ष के लिए मामला फिर से खोला था और मार्च 2013 में उसका निपटारा हो चुका था। इसके बावजूद दोबारा नोटिस जारी करना कानून के विपरीत है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि एक बार री-असेसमेंट प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद विभाग उसी मुद्दे पर नई राय नहीं बना सकता।

विस्तृत फैसले का इंतजार

हालांकि अदालत का मौखिक आदेश आ चुका है, लेकिन विस्तृत लिखित निर्णय अभी आना बाकी है।



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यह रिपोर्ट 19 जनवरी 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 22 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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