रातें भी तप रहीं: 45°C हीटवेव में सबसे बड़ा खतरा अब सिर्फ दोपहर नहीं, गर्म रातें भी हैं
देश के कई हिस्सों में जारी हीटवेव अब सिर्फ दिन की समस्या नहीं रही। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो/पोस्ट में चेतावनी दी गई है कि करीब 45°C तापमान के बाद भी रात 8 बजे पारा 40°C से नीचे नहीं जा रहा और रात 11 बजे भी तापमान 36°C के आसपास रह सकता है। पोस्ट में सबसे गंभीर बात यह कही गई है कि शहरों में रातें ठंडी नहीं हो रहीं, इसलिए जिन लोगों के पास एसी या पर्याप्त कूलिंग की सुविधा नहीं है, उनका शरीर लगातार तनाव में रहता है—खासकर बुज़ुर्गों, हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति घातक हो सकती है। X पर उपलब्ध पोस्ट-स्निपेट में भी “रातें विशेषकर शहरों में काफी गर्म हो रही हैं” जैसी चेतावनी दिखती है।
यह चिंता मौजूदा मौसम-आंकड़ों से भी मेल खाती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 19 मई 2026 के हीटवेव बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, मध्य, उससे जुड़े पूर्वी और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत में अधिकतम तापमान 38°C से 47°C के दायरे में रहा, जबकि सबसे अधिक अधिकतम तापमान 47.6°C बांदा, उत्तर प्रदेश में दर्ज किया गया। उसी बुलेटिन में 19–25 मई के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति, तथा 19–20 मई को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में “वार्म नाइट” यानी असामान्य गर्म रातों की संभावना बताई गई है।
हीटवेव क्या है और “गर्म रात” क्यों अलग खतरा है?
IMD के अनुसार, मैदानों में किसी स्टेशन का अधिकतम तापमान 40°C या उससे ऊपर पहुंचने पर हीटवेव की स्थिति पर विचार किया जाता है। वास्तविक अधिकतम तापमान 45°C या उससे ऊपर हो तो “हीटवेव” और 47°C या उससे ऊपर हो तो “सीवियर हीटवेव” यानी भीषण लू की श्रेणी बनती है। “वार्म नाइट” तब मानी जाती है जब अधिकतम तापमान 40°C या उससे अधिक हो और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक रहे; इससे ऊपर की स्थिति “वेरी वार्म नाइट” कहलाती है।
दिन में 44–47°C तापमान शरीर पर सीधा हमला करता है, लेकिन गर्म रातें उस हमले से उबरने का मौका छीन लेती हैं। IMD की FAQ में साफ कहा गया है कि जब दिन और रात दोनों गर्म रहें, तो मानव शरीर दिन की गर्मी से रात में रिकवर नहीं कर पाता और हीट स्ट्रेस बढ़ता है। गर्म न्यूनतम तापमान अगले दिन की अधिकतम गर्मी को जल्दी और लंबे समय तक बना सकता है।
मौजूदा स्थिति: उत्तर भारत और मध्य भारत में लंबी हीटवेव बेल्ट
IMD के 18 मई 2026 के विशेष बुलेटिन में बताया गया था कि पिछले 24 घंटों में विदर्भ के कुछ इलाकों और पश्चिमी मध्य प्रदेश में हीटवेव की स्थिति रही। 17 मई को मध्य भारत, उत्तर प्रायद्वीपीय भारत, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा से लगे क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40–45°C के दायरे में था और बांदा में 46.4°C दर्ज किया गया था। इसी बुलेटिन में 18–24 मई के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ समेत कई इलाकों में हीटवेव/सीवियर हीटवेव की चेतावनी दी गई थी।
19 मई के अपडेट में हालात और गंभीर दिखे। IMD ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 19–25 मई तक, पूर्वी उत्तर प्रदेश और विदर्भ में 19–21 मई तक लू से भीषण लू की आशंका बताई। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 19–25 मई तक लू की संभावना तथा 19–20 मई को कुछ हिस्सों में भीषण लू की संभावना जारी की गई।
यानी वायरल वीडियो/पोस्ट में उठाई गई बात—कि रात में भी तापमान असामान्य रूप से ऊंचा रह सकता है—को केवल “सोशल मीडिया अलर्ट” मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। IMD ने भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों के लिए गर्म रातों की चेतावनी दी है।
शहरों में रातें क्यों नहीं ठंडी हो रहीं?
इस सवाल का एक बड़ा जवाब है—Urban Heat Island Effect यानी शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव। शहरों में कंक्रीट, डामर, घनी इमारतें, कम पेड़, कम खुला मैदान और वाहनों/एसी/मशीनों से निकलने वाली गर्मी दिनभर ऊर्जा सोखती है और रात में धीरे-धीरे छोड़ती है। इसका नतीजा यह होता है कि आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहर देर रात तक गर्म बने रहते हैं।
CEEW की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, बहुत गर्म रातें भारत में बहुत गर्म दिनों की तुलना में तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले दशक में लगभग 70% जिलों में प्रति गर्मी के मौसम पांच से अधिक अतिरिक्त “बहुत गर्म रातें” देखी गईं, जबकि बहुत गर्म दिनों में ऐसा इजाफा लगभग 28% जिलों में था। रिपोर्ट बताती है कि मुंबई में 15, बेंगलुरु में 11, भोपाल और जयपुर में 7-7, दिल्ली में 6 और चेन्नई में 4 अतिरिक्त बहुत गर्म रातें प्रति गर्मी दर्ज हुईं; इसे बड़े पैमाने पर अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव से जोड़ा गया है।
Springer Nature में प्रकाशित भारत के शहरी हीट आइलैंड पर एक समीक्षा के अनुसार, भारतीय शहरों में UHI की तीव्रता अक्सर रात में चरम पर जाती है और अलग-अलग अध्ययनों में यह अंतर 2°C से 10.3°C तक पाया गया है। इसका मतलब है कि अगर किसी शहर का बाहरी या ग्रामीण किनारा 34°C है, तो घने शहरी हिस्से में वास्तविक अनुभव इससे कई डिग्री अधिक हो सकता है।
गरीब और बिना एसी वाले घरों में रात की गर्मी ज्यादा खतरनाक
हीटवेव में सबसे ज्यादा असर उन घरों पर पड़ता है जहां एसी नहीं है, वेंटिलेशन कमजोर है, छत कंक्रीट की है और घर घनी बस्ती में है। Down To Earth ने Climate Trends के अध्ययन के आधार पर लिखा कि चेन्नई के 50 कम और मध्यम आय वाले घरों में indoor temperature रात में भी शायद ही 31°C से नीचे गिरा और कई बार सूर्यास्त के घंटों बाद भी 34°C से ऊपर बना रहा। अध्ययन में तापमान का delayed peak रात 8–9 बजे के आसपास 34.7°C तक पाया गया, क्योंकि कंक्रीट की दीवारें और फर्श दिनभर की गर्मी छोड़ते रहे।
यह केवल आराम की समस्या नहीं है, यह स्वास्थ्य संकट है। जब रात में शरीर ठंडा नहीं हो पाता, तो नींद खराब होती है, हृदय और किडनी पर तनाव बढ़ता है, डिहाइड्रेशन तेज होता है और अगले दिन की गर्मी झेलने की क्षमता घटती है। WHO कहता है कि लगातार ऊंचे दिन और रात के तापमान शरीर पर cumulative stress डालते हैं, जिससे बीमारी और मृत्यु का खतरा बढ़ता है।
बुज़ुर्ग, हृदय रोगी और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा जोखिम में क्यों?
वायरल पोस्ट में जिन समूहों का उल्लेख किया गया—बुज़ुर्ग, दिल के मरीज और गर्भवती महिलाएं—वास्तव में चिकित्सा दृष्टि से सबसे संवेदनशील समूहों में आते हैं। WHO के अनुसार, हीट स्ट्रेस cardiovascular disease, diabetes, mental health conditions और asthma जैसी बीमारियों को गंभीर बना सकता है; heatstroke मेडिकल इमरजेंसी है। WHO यह भी बताता है कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में heat-related mortality 2000–2004 से 2017–2021 के बीच लगभग 85% बढ़ी।
भारत सरकार की 18 मई 2026 की सार्वजनिक स्वास्थ्य एडवाइजरी में भी शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों, outdoor workers और heart disease/hypertension जैसे chronic illness वाले लोगों को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। एडवाइजरी में hydration, direct sunlight से बचाव, हल्के सूती कपड़े, shade/rest breaks और danger signs पर तुरंत medical attention की सलाह दी गई है।
हृदय रोगियों के लिए गर्मी इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि शरीर को ठंडा रखने के लिए blood circulation और sweating बढ़ती है। इससे heart rate और cardiovascular load बढ़ सकता है। WHO बताता है कि शरीर जब अत्यधिक गर्म वातावरण में heat gain को खत्म नहीं कर पाता, तो heat exhaustion, heatstroke, heart और kidney stress जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
नमी यानी humidity: तापमान से भी ज्यादा खतरनाक “महसूस होने वाली गर्मी”
कई बार मौसम ऐप पर 42°C दिखता है, लेकिन शरीर को वह 46–48°C जैसा महसूस होता है। इसकी बड़ी वजह humidity है। IMD की FAQ के अनुसार, उच्च relative humidity पसीने के evaporation को धीमा करती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक cooling mechanism कमजोर पड़ती है। यही कारण है कि गर्म और नम मौसम शरीर पर ज्यादा भारी पड़ता है।
CEEW के अध्ययन में बताया गया है कि उत्तर भारत और Indo-Gangetic Plain में relative humidity पिछले दशक में 10% तक बढ़ी है। दिल्ली, चंडीगढ़, कानपुर, जयपुर और वाराणसी जैसे परंपरागत रूप से शुष्क शहरों में humidity बढ़ने से heat stress बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार humidity felt temperature को 3–5°C तक अधिक खतरनाक बना सकती है।
चेतावनी के लक्षण: कब समझें कि मामला गंभीर है?
हीटवेव में सामान्य थकान और गंभीर heat illness के बीच फर्क समझना जरूरी है। IMD की FAQ के अनुसार heat exhaustion में fatigue, weakness, dizziness, headache, nausea, vomiting, muscle cramps और sweating जैसे लक्षण दिख सकते हैं। Heatstroke में body temperature 40°C या उससे अधिक, delirium, seizures या coma हो सकता है और यह संभावित रूप से घातक स्थिति है।
भारत सरकार की 18 मई 2026 की एडवाइजरी dizziness, headache, nausea, altered mental status, high body temperature, dehydration, seizures और fainting जैसे danger signs पर सतर्क रहने और severe cases में 108/102 emergency helpline call करने की सलाह देती है।
लू सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, बिजली-पानी-काम-कृषि का भी संकट
हीटवेव का असर अस्पतालों से लेकर बिजली मांग, पानी की कमी और खेती तक जाता है। WHO के अनुसार heatwaves public health emergencies बना सकती हैं, excess mortality, work capacity loss, labour productivity decline और power shortages जैसी cascading socioeconomic impacts ला सकती हैं।
IMD के 19 मई बुलेटिन में कृषि के लिए भी अलग सलाह दी गई है—राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र/विदर्भ, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में फसलों के लिए हल्की और बार-बार सिंचाई, mulching, shade nets और मिट्टी की नमी बचाने के उपाय सुझाए गए हैं। यह दिखाता है कि हीटवेव अब केवल “लोगों को छांव में रहने” की चेतावनी नहीं, बल्कि food security और rural livelihoods से जुड़ा विषय भी है।
प्रशासन क्या कर रहा है और क्या कमी रह गई है?
NCDC/MoHFW की 2026 heatwave advisory राज्यों को Heat-Health Action Plan लागू करने, district/city level heat-health plans तैयार करने, ambulance और health facility preparedness सुनिश्चित करने, public cooling और drinking water facilities पर विचार करने तथा heatstroke cases/deaths की daily surveillance reporting करने को कहती है।
NCDC के अनुसार, भारत में National Action Plan on Heat-Related Illnesses 2021 में शुरू हुआ, HRI preparedness guidelines 2023 में जारी हुईं, emergency cooling guidelines 2024 में प्रकाशित हुईं और Heat-Related Illnesses & Death Surveillance digital platform पर 2023 से जारी है।
लेकिन अब चुनौती बदल रही है। पुराने heat action plans अक्सर दिन के अधिकतम तापमान और outdoor exposure पर अधिक केंद्रित रहे हैं, जबकि नए evidence से साफ है कि indoor heat, nighttime heat और humidity को भी बराबर प्राथमिकता देनी होगी। CEEW ने भी heat action plans को granular data के आधार पर अपडेट करने और nighttime heat तथा humidity stress को शामिल करने की सिफारिश की है।
लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
इस हीटवेव में केवल दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर न निकलना काफी नहीं है। अगर रात में भी कमरा गर्म है तो शरीर पर दबाव जारी रहता है। घर में cross-ventilation, छत/दीवार पर सफेद या reflective coating, पर्दे/खस/गीले कपड़े से heat blocking, दिन में खिड़कियां बंद और शाम को बाहर का तापमान कम होने पर ventilation, बार-बार पानी, ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी जैसे उपाय मदद कर सकते हैं। IMD orange alert क्षेत्रों में “drink sufficient water even if not thirsty” और ORS/घरेलू पेय लेने की सलाह देता है।
WHO भी बताता है कि सबसे गर्म समय में बाहर न जाएं, shade में रहें, आधिकारिक heat warnings पर नजर रखें, घर को दिन में direct sunlight से बचाएं, हल्के कपड़े पहनें, cool shower लें और vulnerable लोगों—खासकर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों तथा heart, lung या kidney conditions वाले लोगों—की नियमित checking करें। WHO यह भी चेतावनी देता है कि 40°C से ऊपर तापमान में पंखा शरीर को और गर्म कर सकता है, इसलिए cooling strategy समझदारी से अपनानी चाहिए।
खतरा सूरज डूबने के बाद भी खत्म नहीं होता
वायरल वीडियो/पोस्ट की सबसे अहम बात यही है कि हीटवेव का खतरनाक चेहरा अब रात में दिख रहा है। 45°C दिन के बाद 36–40°C रात केवल “असुविधा” नहीं, बल्कि body recovery failure की स्थिति है। जिन घरों में एसी नहीं है, जहां छत कंक्रीट की है, जहां कमरे में हवा नहीं आती, जहां बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे या हृदय/किडनी/डायबिटीज के मरीज हैं—वहां गर्म रातें स्वास्थ्य आपातकाल बन सकती हैं।
भारत को अब heatwave response को “दोपहर की लू” से आगे बढ़ाकर “24 घंटे के heat stress” के रूप में देखना होगा। शहरों में cool roofs, shade corridors, पेड़, पानी, public cooling shelters, ward-level heat mapping, night-time relief centres और indoor temperature monitoring जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं। गर्मी अब केवल मौसम नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी नियोजन और सामाजिक असमानता का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
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