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25 अगस्त 2026

R. Madhavan: इंडिया छोड़कर दुबई क्यों शिफ्ट हुए आर माधवन? बेटे वेदांत के करियर के लिए लिया बड़ा फैसला

भारतीय सिनेमा के दमदार अभिनेता आर माधवन सिर्फ अपनी फिल्मों और अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार पिता के रूप में भी लगातार चर्चा में रहते हैं। हाल ही में अभिनेता ने खुलासा किया कि उन्होंने मुंब…

R. Madhavan: इंडिया छोड़कर दुबई क्यों शिफ्ट हुए आर माधवन? बेटे वेदांत के करियर के लिए लिया बड़ा फैसला
R. Madhavan: इंडिया छोड़कर दुबई क्यों शिफ्ट हुए आर माधवन? बेटे वेदांत के करियर के लिए लिया बड़ा फैसला | फ़ोटो: TVL News

भारतीय सिनेमा के दमदार अभिनेता आर माधवन सिर्फ अपनी फिल्मों और अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार पिता के रूप में भी लगातार चर्चा में रहते हैं। हाल ही में अभिनेता ने खुलासा किया कि उन्होंने मुंबई छोड़कर दुबई में बसने का फैसला क्यों लिया। यह फैसला किसी लग्जरी लाइफस्टाइल या टैक्स प्लानिंग के लिए नहीं, बल्कि अपने बेटे वेदांत माधवन के भविष्य और उसके स्विमिंग करियर को बचाने के लिए लिया गया था।

आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन भारत के उभरते हुए फ्रीस्टाइल तैराकों में गिने जाते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं और देश का नाम रोशन किया है। माधवन कई बार सोशल मीडिया पर बेटे की उपलब्धियों को लेकर भावुक पोस्ट साझा कर चुके हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बेटे के सपनों को जिंदा रखने के लिए इस अभिनेता ने अपना पूरा जीवन बदल दिया।

कोविड लॉकडाउन बना सबसे बड़ा कारण

आर माधवन ने एक इंटरव्यू में बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भारत में सभी स्विमिंग पूल बंद कर दिए गए थे। उस समय वेदांत किशोरावस्था में तेजी से आगे बढ़ रहे थे और उनका प्रोफेशनल ट्रेनिंग रुकना उनके करियर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता था।

माधवन के मुताबिक, अगर उस समय वेदांत लगातार ट्रेनिंग नहीं कर पाते, तो उनका अंतरराष्ट्रीय स्विमिंग करियर लगभग खत्म हो जाता। यही वह दौर था जब परिवार ने दुबई शिफ्ट होने का कठिन लेकिन जरूरी फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और चीन जैसे देशों ने अपने एथलीट्स के लिए कोविड के दौरान भी नियंत्रित वातावरण में ट्रेनिंग सुविधाएं चालू रखी थीं। दुबई में भी सख्त निगरानी के बीच स्विमिंग पूल दोबारा खुल चुके थे, जिससे वेदांत को लगातार ट्रेनिंग मिल सकी।

पहले सरिता गईं, फिर पहुंचे माधवन

आर माधवन ने बताया कि सबसे पहले उनकी पत्नी सरिता वेदांत के साथ दुबई चली गई थीं। कुछ समय बाद माधवन भी वहां जाकर परिवार के साथ रहने लगे। अभिनेता का मानना है कि यह फैसला पूरी तरह सही साबित हुआ क्योंकि उसके बाद वेदांत का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।

उन्होंने यह भी बताया कि उस दौरान भारतीय स्विमिंग टीम भी दुबई में ट्रेनिंग कर रही थी, जिससे वेदांत को प्रतिस्पर्धी माहौल और बेहतर सुविधाएं मिलीं।

“मैं खुद को 10 में से 6 नंबर दूंगा”

एक पिता के रूप में खुद को लेकर माधवन बेहद ईमानदार नजर आए। उन्होंने कहा कि वे अपने बेटे के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं, लेकिन अपने पेशे और शूटिंग शेड्यूल के कारण हमेशा मौजूद नहीं रह पाते।

माधवन ने मजाकिया लेकिन भावुक अंदाज में कहा कि अगर उन्हें खुद को पिता के रूप में नंबर देने हों, तो वे खुद को 10 में से सिर्फ 6 अंक देंगे। उनके मुताबिक, उनकी पत्नी सरिता एक अधिक सक्रिय अभिभावक हैं, जबकि वे सलाह देने और मानसिक रूप से प्रेरित करने की भूमिका निभाते हैं।

बेटे की सफलता पर गर्व

आज वेदांत माधवन सिर्फ एक स्टार किड नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से पहचान बनाने वाले युवा एथलीट के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग आर माधवन की पैरेंटिंग और बेटे के सपनों के लिए किए गए त्याग की सराहना कर रहे हैं।

माधवन ने कहा कि कम उम्र में मिली पहचान कई बार दबाव भी बनाती है। इसलिए वे लगातार इस बात को लेकर सतर्क रहते हैं कि वेदांत जमीन से जुड़े रहें और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखें।

दुबई में आलीशान जिंदगी, लेकिन वजह सिर्फ करियर

हालांकि दुबई में आर माधवन का शानदार घर और लग्जरी लाइफस्टाइल भी चर्चा में रहता है, लेकिन अभिनेता ने साफ किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य केवल बेटे का भविष्य था। वेदांत को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, बेहतर ट्रेनिंग और सुरक्षित माहौल दिलाने के लिए परिवार ने यह कदम उठाया।

सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा

आर माधवन के दुबई शिफ्ट होने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे “ब्रेन ड्रेन” बताया, जबकि अधिकतर यूजर्स ने इसे एक जिम्मेदार पिता का साहसी फैसला कहा।

कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर भारत में एथलीट्स को वह बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पातीं, जिनके लिए उन्हें विदेश जाना पड़ता है। यह बहस अब सिर्फ एक अभिनेता की निजी जिंदगी तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय खेल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।

भारतीय खेल व्यवस्था पर बड़ा सवाल

वेदांत माधवन की कहानी इस बात का उदाहरण बन गई है कि प्रतिभा को बचाने के लिए परिवारों को कितने बड़े फैसले लेने पड़ते हैं। अगर भारत में खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और निरंतर सुविधाएं उपलब्ध हों, तो शायद कई युवा खिलाड़ियों को विदेश नहीं जाना पड़े।

आर माधवन का यह फैसला एक पिता की भावनाओं के साथ-साथ देश की खेल व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर करता है।




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यह रिपोर्ट 19 मई 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 25 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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