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ईरान युद्ध से तेल बाजार में भूचाल, क्या रूस बन रहा है सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला खिलाड़ी?

By tvlnews March 19, 2026
ईरान युद्ध से तेल बाजार में भूचाल, क्या रूस बन रहा है सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला खिलाड़ी?

ईरान से जुड़ी लड़ाई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। तेल कीमतें मार्च 2026 में तेज़ी से उछलीं, और रूसी तेल को एशियाई खरीदारों से अधिक मांग मिली। लेकिन तस्वीर एकतरफा नहीं है: रूस को ऊंची कीमतों का लाभ दिख रहा है, फिर भी उसके निर्यात पर मौसम, ड्रोन हमलों और राजस्व गणना की देरी जैसे दबाव भी हैं। इसलिए “रूस सबसे बड़ा विजेता” वाला दावा आंशिक रूप से सही है, मगर पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है।

ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में तेज उथल-पुथल देखी जा रही है। 19 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड एक समय 119.13 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, हालांकि बाद में यह 113.40 डॉलर पर बंद हुआ। यह उछाल इसलिए आया क्योंकि खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना पर हमले बढ़े और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई। यही कारण है कि बाजार में अचानक “सप्लाई शॉक” का डर बढ़ गया है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में है। इसी रास्ते से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। मौजूदा संकट में इसे प्रभावी रूप से अवरुद्ध या बेहद बाधित माना जा रहा है। इससे सिर्फ तेल निर्यात नहीं, बल्कि खाद्य, दवाइयों और औद्योगिक सामान की सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। खाड़ी देशों को वैकल्पिक बंदरगाह, सड़क परिवहन और महंगी लॉजिस्टिक्स का सहारा लेना पड़ रहा है।

यहीं से रूस के लिए अवसर बनता दिख रहा है। युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में रूसी उराल्स क्रूड, जो पहले ब्रेंट के मुकाबले छूट पर बिकता था, भारत पहुंचने वाली डिलीवरी में पहली बार ब्रेंट पर प्रीमियम के साथ बिकता दिखा। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत जैसे खरीदारों ने मध्य पूर्व की आपूर्ति बाधित होने के बाद रूसी तेल की ओर रुख किया। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि संकट का सबसे बड़ा कारोबारी लाभ रूस उठा सकता है।

लेकिन यह कहना कि “पूरी दुनिया अब सिर्फ रूस से तेल खरीद रही है” या “रूस पूरी तरह मुनाफे में है”, तथ्यात्मक रूप से अधूरा होगा। 18 मार्च की रिपोर्टों में कहा गया कि रूस बढ़ती कीमतों का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा, क्योंकि उसके निर्यात ढांचे पर ड्रोन हमले, खराब मौसम और बंदरगाह संबंधी अड़चनें असर डाल रही हैं। उसके तीन प्रमुख पश्चिमी बंदरगाहों से लोडिंग मार्च में घटने की आशंका जताई गई। यानी ऊंची कीमतें अपने-आप अधिक भौतिक निर्यात या रिकॉर्ड कमाई में नहीं बदल रहीं।

रूस के सरकारी राजस्व की तस्वीर भी मिश्रित है। एक ओर ऊंचे अंतरराष्ट्रीय दाम उसके लिए सकारात्मक हैं, और मार्च में उसके प्रमुख तेल-कर से आय दोगुनी होने जैसी गणनाएं सामने आईं। दूसरी ओर 17 मार्च की अलग गणना में रूस की मार्च तेल-गैस आय साल-दर-साल 52% तक गिरने का अनुमान भी दिखा, क्योंकि बजटीय गणना पिछली अवधि के दामों पर आधारित होती है और रूबल की मजबूती भी असर डालती है। इसलिए अल्पकालिक बाजार लाभ और वास्तविक सरकारी आय के बीच अंतर समझना जरूरी है।

तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगा या नहीं, इस पर भी राय बंटी हुई है। ईरानी पक्ष और कुछ बाजार विश्लेषकों ने इसे संभावित जोखिम परिदृश्य के रूप में उठाया है, खासकर अगर होर्मुज़ में लंबा गतिरोध बना रहा। लेकिन यह अभी सर्वसम्मत आधारभूत अनुमान नहीं है; कुछ अधिकारियों ने इसे कम संभावना वाला परिदृश्य भी बताया है। अभी की ठोस सच्चाई यह है कि बाजार में जोखिम प्रीमियम तेज है, आपूर्ति असुरक्षित है, और रूस को इससे लाभ के मौके मिल रहे हैं—मगर उसे “असली विजेता” घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी।




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