मुख्य सामग्री पर जाएँ
11 सितंबर 2026

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान पर नई चेतावनी, क्या मिसाइल कार्यक्रम अब वॉशिंगटन की चिंता बन गया है?

अमेरिकी खुफिया समुदाय की 2026 वार्षिक खतरा-आकलन रिपोर्ट में पाकिस्तान को रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ उन देशों में रखा गया है, जो ऐसे मिसाइल delivery systems पर काम कर रहे हैं जिनसे अमेरिकी…

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान पर नई चेतावनी, क्या मिसाइल कार्यक्रम अब वॉशिंगटन की चिंता बन गया है?
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान पर नई चेतावनी, क्या मिसाइल कार्यक्रम अब वॉशिंगटन की चिंता बन गया है? | फ़ोटो: TVL News

अमेरिकी खुफिया समुदाय की 2026 वार्षिक खतरा-आकलन रिपोर्ट में पाकिस्तान को रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ उन देशों में रखा गया है, जो ऐसे मिसाइल delivery systems पर काम कर रहे हैं जिनसे अमेरिकी homeland को भविष्य में खतरा बढ़ सकता है। लेकिन रिपोर्ट की भाषा यह भी साफ करती है कि पाकिस्तान के मामले में बात मौजूदा सिद्ध ICBM क्षमता की नहीं, बल्कि उस दिशा में संभावित विकास की है; इसी कारण यह मुद्दा सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सामरिक बहस का विषय बन गया है।

अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सीनेट की सुनवाई में पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में चिन्हित किया, जिसकी बढ़ती लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिकी इलाके तक पहुंचने वाली क्षमता विकसित कर सकती है। उनके आधिकारिक बयान में कहा गया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु तथा पारंपरिक payloads वाले नए, उन्नत या पारंपरिक missile delivery systems पर काम कर रहे हैं, जो अमेरिकी homeland को range में ला सकते हैं। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के बारे में अलग से कहा कि उसकी long-range ballistic missile development “potentially could include ICBMs” यानी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल कर सकती है।

यही वह बिंदु है, जहां इस बयान की असली गंभीरता छिपी है। अमेरिकी आकलन पाकिस्तान को अभी उत्तर कोरिया जैसी श्रेणी में नहीं रखता, क्योंकि उसी गवाही में यह भी कहा गया कि उत्तर कोरिया की ICBMs पहले से अमेरिकी जमीन तक पहुंच सकती हैं। पाकिस्तान के मामले में भाषा अधिक सावधान और भविष्य-उन्मुख है। इसका मतलब यह हुआ कि वॉशिंगटन की चिंता तत्काल operational reach से ज्यादा उस तकनीकी दिशा को लेकर है, जिसमें पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम आगे बढ़ सकता है। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी homeland के खिलाफ कुल मिसाइल खतरा 2035 तक 3,000 से बढ़कर 16,000 से अधिक हो सकता है।

यह चिंता अचानक पैदा नहीं हुई। दिसंबर 2024 में अमेरिका ने पाकिस्तान के ballistic missile programme से जुड़े चार संस्थानों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। उन कदमों में पाकिस्तान की सरकारी National Development Complex और तीन कारोबारी संस्थाओं को निशाना बनाया गया था, यह कहते हुए कि उन्होंने लंबी दूरी के ballistic missile programme में योगदान दिया। इससे साफ है कि वॉशिंगटन का संदेह कम-से-कम पिछले डेढ़ साल से बन रहा था, और अब 2026 की threat assessment ने उसे अधिक औपचारिक रूप दे दिया है।

हालांकि इस अमेरिकी आकलन पर सर्वसम्मति नहीं है। पाकिस्तान पहले भी ऐसी अमेरिकी चिंताओं को “बेबुनियाद” और “तार्किक आधार से रहित” बता चुका है। उसके विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसकी strategic capabilities केवल संप्रभुता की रक्षा और दक्षिण एशिया में credible minimum deterrence के लिए हैं, न कि किसी अन्य देश को धमकाने के लिए। 2025 की एक आधिकारिक ब्रीफिंग में भी इस बात को दोहराया गया कि पाकिस्तान की missile और defence capabilities उसके अपने defense और regional deterrence के लिए हैं।

कई विश्लेषक भी यही तर्क देते हैं कि पाकिस्तान का परमाणु और मिसाइल ढांचा मूल रूप से भारत-केंद्रित रहा है। कुछ arms-control विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा longer-range systems पहले से भारत के भीतर किसी भी लक्ष्य को cover करने में सक्षम हैं; इसलिए अगर Islamabad सचमुच ICBM-class range की दिशा में जाता है, तो वह दक्षिण एशिया से बाहर की एक अलग रणनीतिक सोच का संकेत होगा. दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञ अभी इस दावे पर भी सवाल उठाते हैं कि पाकिस्तान के पास फिलहाल अमेरिका तक पहुंचने वाली operational capability मौजूद है।

कुल मिलाकर, तुलसी गबार्ड का बयान सिर्फ एक headline नहीं, बल्कि एक policy signal है। यह संकेत देता है कि अमेरिका अब पाकिस्तान को केवल दक्षिण एशियाई nuclear equation के हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि लंबी अवधि के homeland missile threat debate में भी देखने लगा है। फिर भी, तथ्यात्मक रूप से सबसे अहम बात यही है कि मौजूदा अमेरिकी आकलन पाकिस्तान को आज की स्थापित ICBM शक्ति नहीं, बल्कि संभावित भविष्य के जोखिम के रूप में पेश करता है। इसी अंतर को समझे बिना यह पूरी बहस अधूरी रह जाएगी।




Powered by Froala Editor

tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

विदेश की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 19 मार्च 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 8 सितंबर 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।