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24 अगस्त 2026

हिसार के रोहताश खिलेरी का कारनामा: माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताकर रचा इतिहास

हिसार (हरियाणा) — गांव मलापुर से निकलकर दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में से एक पर अपनी क्षमता साबित करना किसी भी साधारण व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। लेकिन रोहताश खिलेरी ने वही कर दिखाया, जिसे…

हिसार के रोहताश खिलेरी का कारनामा: माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताकर रचा इतिहास
हिसार के रोहताश खिलेरी का कारनामा: माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताकर रचा इतिहास | फ़ोटो: TVL News

हिसार (हरियाणा) — गांव मलापुर से निकलकर दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में से एक पर अपनी क्षमता साबित करना किसी भी साधारण व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। लेकिन रोहताश खिलेरी ने वही कर दिखाया, जिसे पर्वतारोहण की दुनिया में असाधारण साहस और शारीरिक-मानसिक दृढ़ता का उदाहरण माना जा रहा है। रोहताश खिलेरी ने माउंट एल्ब्रुस पर 18,510 फीट की ऊंचाई पर बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के लगातार 24 घंटे बिताए और इसके बाद स्वयं वीडियो शूट कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि को दर्ज किया।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर इतनी ऊंचाई पर मानव शरीर को ऑक्सीजन की भारी कमी (Hypoxia) का सामना करना पड़ता है, जहां लंबे समय तक रहना जानलेवा साबित हो सकता है।


माउंट एल्ब्रुस: यूरोप की सबसे ऊंची और खतरनाक चोटी

माउंट एल्ब्रुस रूस के काकेशस पर्वत श्रृंखला में स्थित है और इसे यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई लगभग 18,510 फीट (5,642 मीटर) है। अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण संस्थाओं और भूगोल विशेषज्ञों के अनुसार, एल्ब्रुस पर मौसम अत्यंत अस्थिर रहता है, जहां तेज़ हवाएं, बर्फीले तूफान और माइनस तापमान किसी भी समय हालात बदल सकते हैं।

यही कारण है कि अधिकतर पर्वतारोही यहां पूरक ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लेते हैं। बिना ऑक्सीजन इतनी ऊंचाई पर 24 घंटे रुकना न केवल तकनीकी चुनौती है, बल्कि शरीर की सहनशक्ति की भी कड़ी परीक्षा है।


बिना ऑक्सीजन 24 घंटे: शरीर पर पड़ने वाला प्रभाव

चिकित्सा और खेल विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, 18,000 फीट से ऊपर की ऊंचाई को “डेथ ज़ोन के निचले सिरे” के रूप में देखा जाता है। यहां:

  • ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत से भी कम रह जाता है

  • सांस लेने में कठिनाई

  • सिरदर्द, चक्कर, मतली

  • हाइपोथर्मिया और हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडेमा (HAPE) का खतरा

इन परिस्थितियों में 24 घंटे तक टिके रहना आम पर्वतारोहियों के लिए असंभव के करीब माना जाता है। रोहताश खिलेरी ने इस जोखिम को स्वीकार करते हुए खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से महीनों तक तैयार किया।


रोहताश खिलेरी की तैयारी और रणनीति

सूत्रों और पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अभियान से पहले लंबी अवधि की तैयारी जरूरी होती है, जिसमें शामिल हैं:

  1. हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग – शरीर को कम ऑक्सीजन में काम करने का अभ्यास

  2. कार्डियो और रेस्पिरेटरी फिटनेस – फेफड़ों और हृदय की क्षमता बढ़ाना

  3. मानसिक मजबूती – एकांत, ठंड और शारीरिक पीड़ा से जूझने की क्षमता

  4. न्यूट्रिशन और हाइड्रेशन प्लान – शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखना

रोहताश खिलेरी ने इन्हीं वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर खुद को तैयार किया और जोखिम को न्यूनतम रखते हुए यह कारनामा अंजाम दिया।


वीडियो शूट कर दी दुनिया को जानकारी

इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह रही कि 24 घंटे पूरे करने के बाद रोहताश खिलेरी ने खुद वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वे पूरी तरह होश में और संतुलित दिखाई देते हैं। यह वीडियो न केवल उनके साहस का प्रमाण है, बल्कि इस बात का भी संकेत देता है कि उनका शरीर उस ऊंचाई पर खुद को अनुकूलित कर चुका था।

पर्वतारोहण समुदाय में इसे डॉक्यूमेंटेड हाई-एल्टीट्यूड एंड्योरेंस अचीवमेंट के रूप में देखा जा रहा है।

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tvlnews

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यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 23 जनवरी 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 24 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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