नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ 22 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन के बीच गुरुवार को दिल्ली विधानसभा की कार्रवाई शुरू हुई तो यहां काफी हंगामा मचा। CM अरविंद केजरीवाल और आप विधायक महेंद्र गोयल ने कृषि कानूनों की प्रतियां सदन में फाड़ दीं और कहा कि मैं इन काले कानूनों को नहीं मानता क्योंकि ये किसानों के खिलाफ है। इसके बाद सदन में जय जवान जय किसान के नारे लगाए गए।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा पारित विवादित कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ डालीं और चेतावनी देते हुए कहा कि आप 'अंग्रेजों से भी बदतर' न बनें|
दिल्ली विधानसभा के एक विशेष सत्र में किसान आंदोलन पर दिल्ली CM ने कहा कि,''केंद्र सरकार कह रही है कि किसानों को कृषि कानूनों का फायदा समझ नहीं आ रहा इसलिए अपने दिग्गज़ नेताओं को उतारा है। योगी आदित्यनाथ एक रैली में कह रहे थे कि इन कानूनों से किसी की ज़मीन नहीं जाएगी, ये फायदा है क्या..?
CM अरविंद केजरीवाल ने कहा कि,भाजपा वाले कहते हैं कि किसान अब अपनी फसल पूरे देश में कहीं भी बेच सकता है। धान का MSP 1868 रुपये है, ये बिहार और उत्तर प्रदेश में 900-1000 रुपये में बिक रहा है। मुझे बता दीजिए कि ये किसान देश में कहां अपनी फसल बेचकर आएं|
उन्होंने कहा, "मैं केंद्र से पूछना चाहता हूं कि किसानों को कितनी कुर्बानियां देनी पड़ेंगी, जिससे उनकी आवाज सुनी जा सकेगी। केजरीवाल ने कहा कि"हर किसान भगत सिंह बन गया है। सरकार कह रही है कि वे किसानों तक पहुंच रहे हैं और फार्म बिलों के लाभों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी के सीएम ने किसानों से कहा कि वे इन बिलों से लाभान्वित होंगे क्योंकि उनकी जमीन नहीं छीनी जाएगी। क्या यह एक लाभ है?
CM अरविंद केजरीवाल ने कहा कि,''फार्म लॉ को महामारी के दौरान संसद में पारित करने की क्या जल्दी थी? यह पहली बार हुआ है कि राज्यसभा में मतदान के बिना 3 कानून पारित किए गए ... मैंने इस विधानसभा में 3 कानूनों को फाड़ दिया और अपील की कि ब्रिटिशों की तुलना में केंद्र सरकार बदतर' न बनें|
भाजपा कह रही है कि किसानों को गुमराह किया जा रहा है। इन क़ानूनों के फ़ायदे बताने के लिए भाजपा ने अपने सारे दिग्गज नेता उतारे हैं पर इन भाजपा नेताओं को भी नहीं पता कि इन क़ानूनों का क्या फ़ायदा है? क्योंकि दरअसल इन क़ानूनों से किसानों को कोई फ़ायदा है ही नहीं।1907 में अंग्रेजों के समय भी तीन किसान विरोधी क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का ऐसा ही आंदोलन हुआ था। अंग्रेज सरकार भी पहले कुछ संशोधन के लिए तैयार हुई पर फिर अंग्रेजों ने सभी क़ानून वापिस ले लिए हमारी सरकार कब किसानों की माँगे मानेगी?
विधानसभा से निकले के बाद केजरीवाल ने कहा कि,'दिल्ली विधानसभा ने आज सभी 3 कृषि कानूनों को खारिज कर दिया और केंद्रीय सरकार से अपील की कि वह इन काले कानूनों को वापस ले। 20 दिनों के विरोध के दौरान 20 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। इस आंदोलन में औसतन एक किसान प्रतिदिन शहीद हो रहा है|