नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 22 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का समर्थन किया है और कहा है कि सरकार दो कदम पीछे हटे तो हम भी दो कदम पीछे हटें| सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ,''हम कभी रास्ता बंद नहीं करते, पुलिस रास्ता बंद करती है। वे(केंद्र सरकार) बुलाएंगे तो हम जाएंगे(बातचीत के लिए)|
अखिल भारतीय किसान सभा के अशोक धवले ने कहा कि ,सुप्रीम कोर्ट को सरकार को निर्देश देना चाहिए कि वह इन कानूनों को रद्द करने के लिए इन तीन कानूनों को तुरंत संसद सत्र में रखे। उसके बाद, MSP जैसी अन्य चीजों के लिए एक समिति बनाई जा सकती है|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जगह-जगह किसानों को रोका गया। लड़ते हुए किसान दिल्ली आ रहे हैं। सरकार आंदोलन को हिंसक करना चाहती है।
आज तीन कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि वो फिलहाल कानूनों की वैधता तय नहीं करेगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज हम जो पहली और एकमात्र चीज तय करेंगे, वो किसानों के विरोध प्रदर्शन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर है। कानूनों की वैधता का सवाल इंतजार कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि उनमें से कोई भी फेस मास्क नहीं पहनता है, वे बड़ी संख्या में एक साथ बैठते हैं। COVID-19 एक चिंता का विषय है, वे गांव जाएंगे और वहां कोरोना फैलाएंगे। किसान दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
भारत के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि दिल्ली को ब्लॉक करने से यहां के लोग भूखे रह सकते हैं। आपका(किसानों) मकसद बात करके पूरा हो सकता है। सिर्फ विरोध प्रदर्शन पर बैठने से कोई फायदा नहीं होगा।भारत के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि सभी प्रदर्शनकारी किसान संगठनों को नोटिस जाना है और सुझाव दिया है कि इस मामले को शीतकालीन अवकाश के लिए अदालत की अवकाश पीठ के समक्ष रखा जाए।