दिन में वकील, शाम को पोल डांसर: 52 की अनोखी कहानी
दिन में काले कोट में अदालत की सीढ़ियां चढ़ने वाली बैरिस्टर और शाम होते ही डांस स्टूडियो में पोल डांस की प्रैक्टिस करने वाली कलाकार—ब्रिटेन के वॉरविकशायर की लीशा बॉन्ड की यह दोहरी पहचान इन दिनों चर्चा में है। 52 साल की उम्र में उन्होंने अपने पेशेवर जीवन के साथ एक ऐसा शौक चुना, जिसे समाज अक्सर गलत नजर से देखता है। लेकिन लीशा का कहना है कि यह उनके लिए सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि फिटनेस, आत्म-अभिव्यक्ति और मानसिक संतुलन का जरिया है।
काम की थकान से जन्मा नया जुनून
लंबे समय से वकालत के क्षेत्र में काम कर रहीं लीशा बॉन्ड बताती हैं कि कोर्टरूम का दबाव, लगातार बैठकर काम और मानसिक तनाव ने उन्हें किसी रचनात्मक गतिविधि की तलाश में लगा दिया। इसी दौरान उन्होंने पोल डांस की फिटनेस क्लास जॉइन की। शुरुआत में यह सिर्फ व्यायाम था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनका जुनून बन गया।
उनका अनुभव बताता है कि पोल डांस ने उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया और आत्मविश्वास भी बढ़ाया। उन्होंने माना कि पहले उन्हें डर था कि लोग क्या कहेंगे, लेकिन अब वे इसे अपनी पहचान का हिस्सा मानती हैं।
पोल डांस: सिर्फ नाच नहीं, पूरा फिटनेस सिस्टम
आज पोल डांस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक फिटनेस डिसिप्लिन माना जाता है। इसमें कोर स्ट्रेंथ, लचीलापन और संतुलन तीनों विकसित होते हैं।
ब्रिटिश मीडिया संस्थानों जैसे BBC और The Guardian ने भी पोल डांस को आधुनिक फिटनेस ट्रेंड के रूप में रिपोर्ट किया है और इसे जिम्नास्टिक्स व डांस का मिश्रण बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वर्कआउट हड्डियों की मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।
उम्र और रूढ़ियों को दी चुनौती
लीशा बॉन्ड की कहानी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने 50 की उम्र पार करने के बाद इस शौक को अपनाया। आमतौर पर इस उम्र में महिलाओं से “शांत” और सीमित जीवन की उम्मीद की जाती है। लेकिन उन्होंने यह दिखाया कि सीखने और खुद को नया रूप देने की कोई समय-सीमा नहीं होती।
उनके अनुसार,
“मैं दिन में कानून की दुनिया में काम करती हूं और शाम को खुद को अभिव्यक्त करने के लिए डांस करती हूं। दोनों मेरी पहचान हैं।”
कोर्ट और स्टूडियो का संतुलन
लीशा का दैनिक जीवन अनुशासन का उदाहरण है। सुबह केस की तैयारी, दोपहर कोर्ट में बहस और शाम को डांस स्टूडियो में ट्रेनिंग—यह संतुलन उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय और मानसिक रूप से तरोताजा रखता है।
वे मानती हैं कि पोल डांस ने उन्हें बेहतर फोकस, धैर्य और आत्म-नियंत्रण सिखाया, जो वकालत जैसे पेशे में भी मदद करता है।
महिलाओं के लिए संदेश
उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने शौक को उम्र या सामाजिक दबाव के कारण दबा देती हैं। लीशा का मानना है कि हर महिला को अपनी पसंद का रास्ता चुनने का अधिकार है, चाहे वह रास्ता परंपरा से अलग ही क्यों न हो।
विशेषज्ञों की राय
फिटनेस ट्रेनर्स का कहना है कि पोल डांस जैसे फंक्शनल वर्कआउट 40+ उम्र की महिलाओं के लिए भी सुरक्षित हो सकते हैं, बशर्ते सही प्रशिक्षण और गाइडेंस मिले।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रचनात्मक गतिविधियां तनाव कम करने और आत्म-सम्मान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
क्यों बन रही है यह खबर सुर्खियां?
लीशा बॉन्ड की कहानी इसलिए वायरल हो रही है क्योंकि यह दो दुनियाओं—कानून और नृत्य—को जोड़ती है। यह दिखाती है कि करियर और जुनून एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।
वॉरविकशायर की 52 वर्षीय बैरिस्टर लीशा बॉन्ड ने यह साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। दिन में कोर्टरूम की जिम्मेदारी और शाम को पोल डांस की आज़ादी—उनकी यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि अपनी पहचान खुद गढ़ी जा सकती है।
Powered by Froala Editor
