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25 अगस्त 2026

‘एप्स्टीन फाइल्स’ विवाद पर मंत्री हरदीप पुरी बोले—एप्स्टीन से 3–4 प्रोफेशनल मुलाकातें हुईं , राहुल गांधी के आरोपों को बताया निराधार

नई दिल्ली, 11 फरवरी 2026 — लोकसभा में “एप्स्टीन फाइल्स” का जिक्र होते ही राजनीति का तापमान बढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कह…

‘एप्स्टीन फाइल्स’ विवाद पर मंत्री हरदीप पुरी बोले—एप्स्टीन से 3–4 प्रोफेशनल मुलाकातें हुईं , राहुल गांधी के आरोपों को बताया निराधार
‘एप्स्टीन फाइल्स’ विवाद पर मंत्री हरदीप पुरी बोले—एप्स्टीन से 3–4 प्रोफेशनल मुलाकातें हुईं , राहुल गांधी के आरोपों को बताया निराधार | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली, 11 फरवरी 2026 — लोकसभा में “एप्स्टीन फाइल्स” का जिक्र होते ही राजनीति का तापमान बढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जेफ्री एप्स्टीन से उनकी “सिर्फ 3–4 मुलाकातें” हुईं और वे पूरी तरह पेशेवर थीं। पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि उनके संपर्क से जुड़े तथ्य पहले से सार्वजनिक डोमेन में हैं।

इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को “बिना सबूत/बिना नोटिस” बताया और कहा कि सरकार/बीजेपी विशेषाधिकार हनन (Privilege) नोटिस/प्रस्ताव आगे बढ़ाएगी।


5 प्वाइंट्स में मामला क्या है

  • पुरी का दावा: एप्स्टीन से 3–4 मुलाकातें, “पूरी तरह प्रोफेशनल”, IPI/ICM जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के संदर्भ में।

  • राहुल गांधी की टिप्पणी: लोकसभा भाषण में एप्स्टीन फाइल्स का संदर्भ लेते हुए पुरी का नाम लिया गया; इस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई।

  • सरकार का कदम: “भ्रामक/बेबुनियाद बयान” और “बिना नोटिस गंभीर आरोप” के आधार पर विशेषाधिकार नोटिस की बात।

  • ‘एप्स्टीन फाइल्स’ क्या हैं: अमेरिकी DoJ ने कानून के तहत करीब 3.5 मिलियन पेज जारी करने की जानकारी दी।

  • अगला चरण: स्पीकर की स्वीकार्यता पर निर्भर—मामला विशेषाधिकार समिति को जा सकता है।


हरदीप पुरी ने क्या कहा: “मेरी बातचीत का अपराधों से कोई लेना-देना नहीं”

पुरी ने कहा कि संसद सत्र के दौरान उनका नाम “एप्स्टीन फाइल्स” से जुड़े “कुछ डेवलपमेंट” के संदर्भ में लिया गया, इसलिए वे “रिकॉर्ड पर तथ्य” रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत/मुलाकातों से जुड़ी बातें पब्लिक हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी ने बताया कि वे International Peace Institute (IPI) से जुड़े रहे हैं और Independent Commission on Multilateralism (ICM) के संदर्भ में उनकी मुलाकातें हुईं, जहां वे सचिव-जनरल जैसी भूमिका में रहे। उन्होंने यह भी कहा कि IPI में उनके वरिष्ठ टेर्जे रोड-लार्सेन (Terje Rød-Larsen) एप्स्टीन को जानते थे और वे एप्स्टीन से डेलिगेशन के हिस्से के तौर पर मिले।

पुरी ने यह भी कहा कि लिंक्डइन के सह-संस्थापक/उद्यमी रीड हॉफमैन से उनकी मुलाकात भी पेशेवर संदर्भ में थी और इसका किसी “गलत काम” से संबंध नहीं।
 (ICM की पृष्ठभूमि पर IPI का सार्वजनिक दस्तावेज भी इसे एक बहुपक्षीय सुधार पहल के रूप में दर्ज करता है।)


राहुल गांधी के आरोप और सत्ता पक्ष की आपत्ति

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी ने राहुल गांधी पर “बेबुनियाद आरोप” लगाने और “संसदीय जिम्मेदारी” नहीं निभाने का आरोप लगाया।
 वहीं रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने बजट चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री/सरकार और मंत्री पुरी पर गंभीर आरोप बिना सबूत लगाए और बिना नोटिस सदन में आरोप लगाना नियमों/परंपराओं के खिलाफ है।


‘एप्स्टीन फाइल्स’ आखिर हैं क्या — और अभी क्यों चर्चा में हैं?

यह विवाद ऐसे समय उठा है जब अमेरिका में एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों का नया बड़ा हिस्सा सार्वजनिक हुआ है। अमेरिकी Department of Justice ने 30 जनवरी 2026 की प्रेस रिलीज में कहा कि उसने Epstein Files Transparency Act के पालन में कुल मिलाकर करीब 3.5 मिलियन पेज जारी किए हैं, जिनमें हजारों वीडियो और बड़ी संख्या में छवियां शामिल हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक, इन दस्तावेज़ों में रेडैक्शन और रिलीज़ प्रक्रिया को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक/संसदीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
 यानी भारत में बहस का संदर्भ सिर्फ घरेलू राजनीति नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़-रिलीज़ की ताज़ा घटनाक्रम भी है।


विशेषाधिकार हनन (Privilege) की प्रक्रिया क्या होती है?

लोकसभा नियमों के मुताबिक, विशेषाधिकार का प्रश्न स्पीकर की सहमति से उठाया जाता है।
 यदि सदन में “leave” पर आपत्ति हो, तो नियमों में न्यूनतम 25 सदस्यों के समर्थन जैसी शर्तें भी बताई जाती हैं।

स्पीकर चाहे तो मामले को Committee of Privileges (विशेषाधिकार समिति) को भेज सकते हैं। लोकसभा के आधिकारिक परिचय नोट के अनुसार यह समिति 15 सदस्यों की होती है और वह तय करती है कि तथ्य/परिस्थितियों के आधार पर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं, फिर अपनी सिफारिश देती है।

महत्वपूर्ण: विशेषाधिकार मामलों का नतीजा केस-टू-केस होता है—कभी स्पष्टीकरण/खेद, कभी रिकॉर्ड से अंश हटाना, या समिति की सिफारिशों पर सदन का निर्णय। PRS के अनुसार “ब्रीच ऑफ प्रिविलेज/कॉन्टेम्प्ट” का दायरा परंपरा और संदर्भ से तय होता है।


आगे क्या देखना चाहिए

  1. क्या स्पीकर नोटिस को स्वीकार कर समिति को भेजते हैं?

  2. क्या राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़/आधार रखते हैं—जैसा कि रिजिजू ने मांग की?

  3. क्या सदन की कार्यवाही से विवादित हिस्से रिकॉर्ड से हटाए जाते हैं? (रिजिजू ने “हटाने” की मांग भी कही है।)

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यह रिपोर्ट 11 फ़रवरी 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 23 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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