India Economy 2025: भारत की इकोनॉमी 6वें स्थान पर फिसली, रुपये की कमजोरी बनी बड़ी वजह
IMF के अप्रैल 2026 अनुमान के मुताबिक भारत 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ छठे स्थान पर है, जबकि यूके 4 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। यह बदलाव घरेलू अर्थव्यवस्था के अचानक कमजोर पड़ने से ज्यादा डॉलर में मापी जाने वाली GDP, रुपये की कमजोरी और नए GDP बेस ईयर के बाद हुए सांख्यिकीय पुनर्मूल्यांकन से जुड़ा है।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर 2025 की सबसे चर्चित बहसों में एक यह है कि तेज वृद्धि के बावजूद देश IMF की ताजा रैंकिंग में एक पायदान नीचे क्यों खिसक गया। अप्रैल 2026 के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसी अवधि में यूनाइटेड किंगडम लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के साथ भारत से आगे निकल गया, जबकि जापान 4.43 ट्रिलियन डॉलर के साथ उससे ऊपर बना हुआ है। 2026 के लिए भी IMF के अनुमान भारत को छठे स्थान पर ही दिखाते हैं।
इस बदलाव को “भारत की अर्थव्यवस्था गिर गई” कहकर समझना अधूरा होगा। सरकारी राष्ट्रीय आय के नए आंकड़े बताते हैं कि FY 2025-26 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.6% और नाममात्र GDP वृद्धि 8.6% आंकी गई है। यानी घरेलू मुद्रा में अर्थव्यवस्था बढ़ी है, सिकुड़ी नहीं। इसलिए रैंकिंग में गिरावट को सीधे आर्थिक कमजोरी का प्रमाण मानना सही नहीं होगा; यह ज्यादा हद तक वैश्विक तुलना के तरीके का मामला है, जहां अर्थव्यवस्थाओं की तुलना मौजूदा अमेरिकी डॉलर में की जाती है।
असल झटका दो मोर्चों से आया। पहला, रुपये की कमजोरी। जब किसी देश की GDP रुपये में बढ़ती है, लेकिन डॉलर के मुकाबले उसकी मुद्रा कमजोर पड़ती है, तो डॉलर में उसका आकार उतना बड़ा नहीं दिखता। हाल की IMF representative exchange rate series में 15 अप्रैल 2026 को रुपया 93.3885 प्रति डॉलर के आसपास दिखा, जो इस व्यापक कमजोरी की दिशा को रेखांकित करता है। यही वजह है कि रुपये में मजबूत विस्तार के बावजूद डॉलर-आधारित वैश्विक रैंकिंग में भारत की बढ़त सीमित दिखी।
दूसरा कारण GDP की नई बेस-ईयर श्रृंखला है। सांख्यिकी मंत्रालय ने 2011-12 के बजाय 2022-23 को नया base year चुना है। मंत्रालय के FAQ के मुताबिक 2022-23 को इसलिए चुना गया क्योंकि इसे अपेक्षाकृत “normal” आर्थिक वर्ष माना गया और इस वर्ष के लिए जरूरी सर्वे डेटा उपलब्ध था। नई श्रृंखला में पद्धति, डेटा स्रोत और deflation strategy बदली गई है, और मंत्रालय ने साफ कहा है कि revised series के साथ 2022-23 से 2025-26 तक के अनुमान बदले हैं। यही revision nominal GDP के आकार को फिर से परिभाषित करता है, जिसका असर वैश्विक ranking पर पड़ा।
यानी headline यह नहीं है कि भारत की विकास कहानी पटरी से उतर गई। headline यह है कि nominal GDP ranking, खासकर current US dollars में, केवल growth rate से तय नहीं होती। उसमें exchange rate, statistical revisions और दूसरे देशों की relative currency strength भी भूमिका निभाती है। यही वजह है कि भारत 8% से ऊपर nominal growth दिखाने के बावजूद यूके से पीछे चला गया। कुछ विश्लेषणों में इसी combination—base-year revision और currency effects—को इस बदलाव की मुख्य वजह बताया गया है।
आगे की तस्वीर फिर भी नकारात्मक नहीं दिखती। IMF के अप्रैल 2026 अनुमानों में भारत की growth outlook अभी भी मजबूत है; 2026 और 2027 के लिए 6.5% real growth projection दी गई है। इसी dataset पर आधारित हालिया विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि भारत का चौथे स्थान तक पहुंचना केवल टला है, रद्द नहीं हुआ; अब यह छलांग FY28 के आसपास दिखती है, न कि उससे पहले। दूसरे शब्दों में, ranking slip short-term optics है, जबकि medium-term trajectory अभी भी upward मानी जा रही है।
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