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Pygmy Marmoset: यह है दुनिया का सबसे छोटा बंदर — हथेली में समाने वाला चहकता करिश्मा

By tvlnews January 22, 2026
Pygmy Marmoset: यह है दुनिया का सबसे छोटा बंदर — हथेली में समाने वाला चहकता करिश्मा

दुनिया के सबसे छोटे बंदरों में शुमार पिग्मी मार्मोसेट (Pygmy marmoset, Cebuella pygmaea) को अक्सर “हथेली में समाने वाला बंदर” कहा जाता है। दक्षिण अमेरिका के अमेज़न बेसिन के घने जंगलों में रहने वाला यह न्यूनतम आकार का प्राइमेट न केवल आकार में अनूठा है, बल्कि व्यवहार, सामाजिक रचना और खाद्य-विशेषीकरण के कारण भी वैज्ञानिकों का ध्यान खींचता है। इस रिपोर्ट में हमने प्रामाणिक स्रोतों और हालिया शोध के आधार पर पिग्मी मार्मोसेट का संक्षेप, आवास, व्यवहार, संरक्षण स्थिति और मानव-संपर्क के जोखिमों का विश्लेषण प्रस्तुत किया है।




किसे कहते हैं पिग्मी मार्मोसेट — शारीरिक विशेषताएँ

पिग्मी मार्मोसेट विश्व के सबसे छोटे ‘सच्चे बंदर’ (true monkey) माने जाते हैं। वयस्कों का सिर-शरीर लंबाई सामान्यतः 12–16 सेंटीमीटर और पूँछ लंबाई लगभग 17–23 सेंटीमीटर होती है, जबकि औसत वजन लगभग 100–120 ग्राम के बीच रहता है — इतना हल्का कि वे आसानी से हथेली पर आराम से बैठ सकते हैं। इनकी फर (बाल) पीत-भूरे और सुनहरे मिश्रण की होती है, चेहरे पर सफेद धब्बे और लम्बी पूँछ पर काले-बेड़े होते हैं, जो इन्हें पहचाने में मदद करते हैं।

पिग्मी मार्मोसेट पश्चिमी अमेज़न बेसिन के निम्न-उपजाऊ वर्षावनों और नदी-किनारे की झाड़ियों में पाये जाते हैं — ब्राज़ील, पेरू, इक्वाडोर, कोलम्बिया और बोलिविया के कुछ हिस्सों में उनकी उपस्थिति दर्ज है। हाल के जीनोमिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रजाति में भिन्न-विभिन्न समूह लगभग तीन मिलियन वर्ष से अलग-अलग विकास कर रहे हैं, और दो उप-प्रजातियों/समूहों का बायोग्राफ़ी में वर्णन हुआ है। आवास-सीमाएँ अक्सर नदियों द्वारा परिभाषित होती हैं।

पिग्मी मार्मोसेट अधिकतर गम (tree gum, sap) पर निर्भर होते हैं — इन्हें गम्मिवोर्स कहा जाता है। इनके दाँत और मॉर्फोलॉजी विशेष रूप से पेड़ों को खरोंच कर गोंद-वह निकाले जाने के लिये अनुकूल हैं; इसके अलावा वे कीड़े, फल और छोटे-छोटे वनस्पति भाग भी खाते हैं। इन्हें भोजन के लिये पेड़ों के छोटे-छोटे ‘फॉरनैजिंग पॉइंट्स’ चाहिए होते हैं, इसलिए उनकी उपस्थिति और घनत्व खाद्य-ट्री उपलब्धता से सीधा जुड़ा होता है।


सामाजिक संरचना और व्यवहार

ये छोटे प्राइमेट परिवार-आधारित झुंडों में रहते हैं — सामान्यत: 2 से 9 सदस्यों के समूह और अक्सर एक प्रमुख नर व एक प्रजननशील मादा होते हैं, साथ ही सहायक सदस्य भी होते हैं जो बच्चे पालन में मदद करते हैं। पिग्मी मार्मोसेट बहुत जटिल वोकलाइजेशन (कॉल सिस्टम) का उपयोग करते हैं — तीन प्रकार के कॉल दूरी के अनुसार बदलते हैं — और वे विजुअल तथा केमिकल संकेतों के माध्यम से भी संवाद करते हैं। समूह-जीवन, सहकारी प्रजनन और सामुदायिक रक्षा इनके जीव-जैविक सफलता के महत्वपूर्ण अंग हैं।


प्रजनन और जीवनकाल

आम तौर पर गर्भधारण लगभग 130–140 दिनों का होता है और प्रायः जुड़वाँ बच्चों का जन्म होता है। माँ के साथ-साथ समूह के अन्य सदस्य (विशेषकर बड़े बच्चे या सहायक) बच्चा पालन में जुट जाते हैं — यह सहकारी पालन Callitrichidae कुल के अनुकूल व्यवहार है। प्रकृति में इनका औसत जीवनकाल करीब 11–16 वर्ष तक हो सकता है, जबकि सीमांत कैद-स्थितियों में उचित देखभाल पर अधिक भी हो सकता है।

IUCN (अंतरराष्ट्रीय रेड लिस्ट) के अनुसार पिग्मी मार्मोसेट की स्थिति पर विचार परिवर्तनशील है; व्यापक रेंज होने के कारण इन्हें अभी “Least Concern” माना गया है, पर हालिया रोग-प्रकोपों और आवासीय दबाव के कारण विशेषज्ञों ने कुछ भौगोलिक आबादी व कुछ उप-प्रजातियों के लिये चिंता जताई है। वनों की कटाई, नदी-किनारे के विस्तार और अवैध पालतू व्यापार इनके लिये मुख्य खतरे हैं। कुछ शोध समूहों ने स्थानीय आबादी-प्रवृत्तियों पर निगरानी बढ़ाने और IUCN स्थिति की पुन: समीक्षा की सलाह दी है।

छोटा और ‘प्यारा’ होने के कारण पिग्मी मार्मोसेट पारंपरिक पालतू जानवर की तरह लोकप्रिय रहे हैं, पर विशेषज्ञों और चिड़ियाघरों का रुख स्पष्ट है: ये जंगली पशु हैं — इनके लिए जटिल आहार, विशाल और उपयुक्त सामाजिक वातावरण व वर्गीकृत संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। कई देशों में पालतू रखने की कानूनी पाबंदियाँ और CITES/स्थानीय नियम लागू हैं; अवैध व्यापार और विदेशी बाज़ारों में माँग ने कभी-कभी गैरकानूनी निर्यात को बढ़ावा दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इन्हें खरीदना न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि पशु-कल्याण के दृष्टिकोण से भी हानिकारक है।


वैज्ञानिक महत्व और संरक्षण का संदेश

पिग्मी मार्मोसेट छोटे आकार के बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये महत्वपूर्ण मॉडल हैं — विकासवादी छोटेपन (dwarfism) के अध्ययनों, सहकारी प्रजनन, और गम्मिवोर व्यवहार पर उन्होंने बहुमूल्य जानकारी दी है। संरक्षण-संदेश सरल है: भारतीय व वैश्विक पाठकों के लिये यह जानना ज़रूरी है कि ‘प्यारा’ हमेशा ‘पालतू’ नहीं होना चाहिए; जंगलों और स्थानीय समुदायों के साथ-संरक्षण इन नन्हे प्राइमेट्स की रक्षा का रास्ता है।



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