नई दिल्ली:केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 23वें दिन है। गुरुवार को किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई| गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।इस बीच आज यानि शुक्रवार को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने किसानों को निशुल्क कानूनी सलाह देने के लिए 15 अधिवक्ताओं की नियुक्ति की।
कांग्रेस नेता अलका लांबा ने किसानों को निशुल्क कानूनी सलाह देने के लिए दिल्ली कांग्रेस द्वारा 15 अधिवक्ताओं की नियुक्ति का स्वागत किया| उन्होंने ट्वीट कर लिखा-''Well Done''
गुरुवार को तीनों कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। किसान आंदोलन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि,''सभी प्रदर्शनकारी किसान संगठनों को नोटिस जाना है और सुझाव दिया है कि इस मामले को शीतकालीन अवकाश के लिए अदालत की अवकाश पीठ के समक्ष रखा जाए| फिलहाल अदालत ने केंद्र से कहा कि वह कानून को होल्ड पर रखने की संभावनाएं तलाशे।
तीन कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि वो फिलहाल कानूनों की वैधता तय नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज हम जो पहली और एकमात्र चीज तय करेंगे, वो किसानों के विरोध प्रदर्शन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर है। कानूनों की वैधता का सवाल इंतजार कर सकता है।
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि दिल्ली को ब्लॉक करने से यहां के लोग भूखे रह सकते हैं। आपका(किसानों) मकसद बात करके पूरा हो सकता है। सिर्फ विरोध प्रदर्शन पर बैठने से कोई फायदा नहीं होगा| भारत के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि सभी प्रदर्शनकारी किसान संगठनों को नोटिस जाना है और सुझाव दिया है कि इस मामले को शीतकालीन अवकाश के लिए अदालत की अवकाश पीठ के समक्ष रखा जाए।
सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि, हम कानूनों के विरोध में मौलिक अधिकार को मान्यता देते हैं और इसे रोकने के लिए कोई सवाल नहीं उठाते। केवल एक चीज जिस पर हम गौर कर सकते हैं, वह यह है कि इससे किसी के जीवन को नुकसान नहीं होना चाहिए|सीजेआई ने कहा कि,''किसानों को विरोध करने का अधिकार है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे लेकिन विरोध का तरीका कुछ ऐसा है जिस पर हम गौर करेंगे। हम केंद्र से पूछेंगे कि विरोध का तरीका क्या है, इसे थोड़ा बदलने के लिए, ताकि यह नागरिकों के आंदोलन के अधिकार को प्रभावित न करे|
सीजेआई ने कहा कि, एक विरोध तब तक संवैधानिक है जब तक वह संपत्ति या संकटपूर्ण जीवन को नष्ट नहीं करता। केंद्र और किसानों से बात करनी होगी; हम एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समिति के बारे में सोच रहे हैं, जिसके समक्ष दोनों पक्ष अपनी कहानी का पक्ष दे सकते हैं| समिति एक खोज देगी जिसका पालन किया जाना चाहिए। सीजेआई का कहना है कि इस बीच विरोध जारी हो सकता है|सीजेआई का सुझाव है कि स्वतंत्र समिति में पी साईनाथ, भारतीय किसान यूनियन और अन्य सदस्य हो सकते हैं| साथ हीं उन्होंने कहा कि,'आप (किसान) हिंसा भड़का नहीं सकते हैं और इस तरह एक शहर को ब्लॉक नहीं कर सकते|