नई दिल्ली: कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि, किसान 21 दिन से सर्दी में, लाखों की संख्या में, दिल्ली के चारों तरफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं। मोदी सरकार अब ईस्ट इंडिया कंपनी से भी बड़ी व्यापारी कंपनी बन गई है। जो किसान की मेहनत की गंगा को मैली कर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को पैसा कमवाना चाहती है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'दिल्ली की सीमा पर बैठे लाखों किसानों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस से मध्य प्रदेश में किसानों से वार्तालाप का ढोंग और प्रपंच कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि हिमालय की चोटी से ऊँचे अहंकार में डूबी मोदी सरकार के हाथ चौबीस अन्नदाताओं के खून से सने हैं, जो 23 दिन से लाखों की संख्या में देश की राजधानी, दिल्ली के चारों ओर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि,मोदी सरकार अब ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ से भी बडी व्यापारी बन गई है, जो किसान की मेहनत की गंगा को मैली कर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को पैसा कमवाना चाहती है। सरकार को किसानों से छल, कपट, ढोंग और प्रपंच बंद करना चाहिए|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 खेती विरोधी काले कानूनों की दीवारों की दरार को सरकारी दुष्प्रचार और झूठे इश्तिहारों से ढँकना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा सरकार ने इन काले कानूनों के क्रूर प्रहार से पहली बार किसानों पर वार किया है। सत्ता संभालते ही मोदी सरकार पूँजीपतियों पर सारे सरकारी संसाधन वार कर किसानों को दरकिनार कर रही हैै|
1) पहला वार: 12 जून 2014 को मोदी सरकार ने सारे राज्यों को पत्र लिखकर फरमान जारी कर दिया कि MSP के ऊपर अगर किसी भी राज्य ने कानूनों को बोनस दिया तो उस राज्य का अनाज समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा और कानून भाइयों को बोनस से वंचित कर दिया गया।
2) दुसरा वार: दिसंबर 2014 में सरकार सरकार ने किसानों की भूमि के उचित मुआवजे कानून 2013 को ख़त्म करने के लिए एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाये ताकि किसानों की जमीन आसानी से छीनकर पूंजीपतर्यों को सौंपी जा सके।
3) 3rd वार:फरवरी 2015 में सरकार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर साफ़ इंकार कर दिया कि अगर किसानों को समर्थन मूल्य लागत का 50% ऊपर दिया गया, तो बाजार ख़राब हो जाएगा अथार्त फिर पूंजी पतियों के पक्ष में खड़े हो गए।
4) 4th वार: 2016 में खरीफ सीजन से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लेकर आए और कहा कि,यह विश्व की सबसे अच्छी योजना है। जबकि सच्चाई यह है कि 2016 से लेकर 2019 तक लगभग 26 हजार करोड रु का मुनाफा चंद पूंजीपतर्यों की निजी कंपनियों ने इस योजना से कमाया है।
5) 5t वार: जून, 2017 में देश की संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि,मोदी सरकार किसानों का कर्जा माफ नहीं करेगी। मोदी सरकार चंद उद्योगपतर्यों का 3,75,000 करोड रूपये कर्जा माफ कर सकती, पर देश के किसानों का नहीं।
6 ) 6th वार: प्रधानमंत्री जी ने कहा कि, 6 हजार रु. किसान सम्मान निधि किसानों को दे रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि आपने पछले 6 सालों में खेती की लागत 15 हजार रु. एकड बढा दी है| डीजल के दामों में 25 रु. लीटर की वृद्धि कर दी है।कीटनाशक से लेकर कृषि यंत्रों तक पर जीएसटी 18% लगा दिया,खाद बीज की कीमतों में वृद्धि कर दी। अथार्त एक तरफ आप किसानों की पॉकेट मार रहे हा और दूसरी तरफ उन्हे आटों का भाड़ा देने का स्वांग रचा रही है|
बता दें कि मध्य प्रदेश में एक किसान सम्मेलन में किसानों को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर किसान कानूनों का समर्थन किया|उन्होंने कहा,''अगर हमें MSP हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते? हमारी सरकार MSP को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले MSP की घोषणा करती है|नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है। फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है? सच्चाई तो ये है कि हमारी सरकार APMC को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज़्यादा खर्च कर रही है|
प्रधानमंत्री ने कहा,''ये कानून लागू हुए 6-7 महीने से ज्यादा हो रहे हैं। लेकिन अब अचानक भ्रम और झूठ का जाल बिछाकर, अपनी राजनीतिक जमीन जोतने के खेल खेले जा रहे हैं। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किए जा रहे हैं| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,'मैं देश के व्यापारी जगत, उद्योग जगत से आग्रह करूंगा कि भंडारण की आधुनिक व्यवस्थाएं बनाने में, कोल्ड स्टोरेज बनाने में, फूड प्रोसेसिंग के नए उपक्रम लगाने में अपना योगदान, अपना निवेश और बढ़ाएं।
वही भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पीएम मोदी की बात को गलत बताते हुए कहा कि किसानों से चर्चा की बात गलत है। किसान संगठनों से कानून को लेकर कोई चर्चा नहींं की गई। टिकैत ने ये भी कहा कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने का दावा सरासर झूठ है। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट विस्तृत है। स्वामीनाथन की सिफारिश में लागत में C2+ 50% जोड़कर देने की है। भाजपा ने चालाकी दिखाकर फार्मूला बदलकर A2+FL कर दिया, जिससे किसानों का हक मारा जा रहा है।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मोदी जी भंडारण हेतु ढांचे की बात कर रहे हैं। लेकिन अपील कॉरपोरेट से कर रहे हैं, इसका मतलब मोदी जी किसान को नहीं एग्री बिजनेस को बढ़ावा दे रहे हैं। खेती में निजीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। नवरत्न कंपिनयों के निजिकरण के बाद मोदी जी की निगाह अब खेती के निजीकरण पर है।
पीएम मोदी के संबोधन के बाद भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि, मोदी जी के संबोधन में सबसे बड़ा झूठ ये है कि गन्ना किसानों को 16 करोड़ की मदद की जा रही है। यह मदद नहीं शुगर मिल पर किसानों का बकाया है उसका भुगतान शुगर मिल को करना था। अगर सरकार उसको दे रही है तो शुगर मिलों को मदद मिल रही है। सरकार अगर इसे इंसेंटिव के रूप में देती तो कोई लाभ होता है|