लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीन लेबर कोड विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि,''पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए पहले किसानों के शोषण का बिल लाई और अब अपने उद्योगपतियों को ही लाभ पहुँचाने के लिए श्रमिक-शोषण के एकतरफ़ा बिल लाई है| जिनके लिए भाजपा बिल लाई उनकी तो सुनें|
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि 'भाजपा सरकार अपने चंदा देनेवाले पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए पहले किसानों के शोषण का बिल लाई और अब अपने उद्योगपतियों को ही लाभ पहुँचाने के लिए श्रमिक-शोषण के एकतरफ़ा बिल लाई है. जिनके लिए बिल, भाजपा उनकी तो सुनें| उन्होंने कहा कि,''भाजपा सत्ता की खुमारी में रायशुमारी की हत्या कर रही है.
अखिलेश यादव के निर्देश पर 25 सितम्बर 2020 को समाजवादी पार्टी सभी जनपदों में शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए किसानों एवं श्रमिकों के हितों पर आघात पहुंचाने वाले कृषि एवं श्रम कानूनों के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन सौपेगी।
किसानों के हितों की अनदेखी करने वाला जो कृषि विधेयक भारत सरकार लाई है उससे किसान अपनी जमीन का मालिक न रहकर मजदूर हो जाएगा। कृषि उत्पादन मण्डी की समाप्ति और विधेयक में न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना सुनिश्चित न होने से किसान अब औनेपौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होगा। गेहूं, धान की फसल को आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटाये जाने से किसान को बड़े आढ़तियों और व्यापारिक घरानों की शर्तों पर अपनी फसल बेचना मजबूरी होगी। समाजवादी पार्टी किसानों की आवाज दबने नहीं देगी।
संसद से पारित श्रमिक कानून से श्रमिकों के हित बुरी तरह प्रभावित होंगे। अभी तक 100 कर्मचारियों वाले उद्योगों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी का अधिकार नहीं था, नया कानून 300 कर्मचारियों वाले उद्योगों को भी जब चाहे छंटनी करने का अधिकार दे रहा है। इससे श्रमिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और वे अपनी जायज मांग भी नहीं उठा सकेंगे। उद्योगपति के वे बंधुआ मजदूर रह जाएंगे।
भाजपा सरकार के प्रति इन जनविरोधी कानूनों को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। किसान जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा सरकार श्रमिकों को रोजगार तो दे नहीं पा रही है, उल्टे उनको पूंजी घरानों की दया पर आश्रित बनाने की साजिश कर रही है। समाजवादी पार्टी इन साजिशों का पुरजोर विरोध करेगी।
बता दें कि,''बुधवार को राज्यसभा ने श्रम कानून में सुधारों से संबंधित तीन प्रमुख विधेयकों को पारित किया। राज्यसभा ने 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य की स्थिति कोड, 2020', 'औद्योगिक संबंध कोड 2020' और ' सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' को पारित कर दिया है। लोकसभा ने मंगलवार इन विधेयकों को पारित कर दिया था।
संसद ने बुधवार को तीन प्रमुख श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी दे दी, जिनके तहत कंपनियों को बंद करने की बाधाएं खत्म होंगी और अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की इजाजत के बिना कर्मचारियों को निकालने की अनुमति होगी|राज्यसभा ने ध्वनि मत से औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा पर शेष तीन श्रम संहिताओं को पारित किया| इस दौरान आठ सांसदों के निष्कासन के विरोध में कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा की कार्रवाई का बहिष्कार किया|