मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए केंद्रीय ब्यूरो जांच (CBI) अपनी सहमति वापस ले ली है| सीबीआई को अब महाराष्ट्र सरकार से राज्य में case-to-case के आधार पर जांच करने की अनुमति लेनी होगी। CBI को जांच से पहले महाराष्ट्र सरकार की अनुमति लेनी होगी पर शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि,'CBI छोटे-छोटे मामलों में भी घुसने लगी, CBI का अपना एक वजूद है। महाराष्ट्र जैसे राज्य में अगर कोई राष्ट्रीय कारण है तो CBI को जांच करने का अधिकार है|
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि, राष्ट्रीय मुद्दे के मामले में, सीबीआई को जांच करने का अधिकार है। राज्य के मामलों में पहले से ही हमारी पुलिस द्वारा जांच की जा रही है, इसके हस्तक्षेप के कारण हमें यह निर्णय लेना पड़ा|
संजय राउत ने कहा कि,'''मुंबई या महाराष्ट्र पुलिस ने किसी विषय पर जांच शुरू की, किसी और राज्य में FIR दाखिल की जाती है वहां से केस CBI को जाता है और CBI महाराष्ट्र में आ जाती है। अब ये नहीं चलेगा, महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस का अपना एक अधिकार है जो संविधान ने दिया है|
बता दें कि,''महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में किसी जांच के लिए आने के पहले केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के मंजूरी लेने का आदेश पारित किया है| इस आदेश के पारित होने के बाद अब महाराष्ट्र में CBI को कोई भी जांच शुरू करने से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी|इससे पहले 22 फरवरी 1989 को जारी आदेश के मुताबिक, सीबीआई को राज्य में जांच करने की मंजूरी मिली हुई थी और इस आदेश के बाद उन्हें अब किसी केस के सिलसिले में राज्य सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी|
महाराष्ट्र सरकार के आदेश के मुताबिक दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1946 के सेक्शन 6 के तहत सीबीआई को मिले अधिकारों को रद्द किया गया है|
सीबीआई को राज्य में जांच के इस्तेमाल की शक्ति होम डिपॉर्टमेंट द्वारा 22 फरवरी 1989 को एक आदेश के जरिए दिया गया था| इन अधिकारों के रद्द होने के बाद अगर सीबीआई को राज्य में किसी भी प्रकार की कार्रवाई करनी है तो पहले उसे राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी| आदेश के मुताबिक यह फैसला अब हर मामले के लिए अलग-अलग यह फैसला लिया जाएगा कि किस मामले में सीबीआई को मंजूरी देनी है|
बता दें कि पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्य भी CBI जांच को लेकर यह फैसला ले चुके हैं|