मुंबई: Maha Political crisis: महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक संकट (Brewing Political crisis in maharashtra) पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि,'मेरी तबीयत खराब होने के चलते मैं लोगों से नहीं मिल रहा था लेकिन अब मैं लोगों से मिल रहा हूं। मैंने पहली कैबिनेट मीटिंग अस्पताल से की थी। 'उन्होंने कहा,'' शिवसेना कभी हिंदुत्व से दूर नही रही और ना कभी रहेगी|
उद्धव ठाकरे ने कहा कि, खबरें चल रही हैं कि शिवसेना के कुछ विधायक गायब हैं। आज सुबह कमल नाथ और शरद पावर का कॉल आया था और उन्होंने मुझपर विश्वास दिखाया है लेकिन मेरे लोग ही सवाल उठा रहे हैं तो मैं क्या करूँ? सूरत और दूसरी जगह जाने से अच्छा मेरे सामने आकर बोलते तो बेहतर था|
उद्धव ने कहा कि शिवसेना बोलोगे तो शिवसेना और हिंदुत्व आपस में मिले हुए हैं। शिवसेना हिंदुत्व और हिंदुत्व शिवसेना से अलग नहीं हो सकता। हिंदुत्व हमारी सांस है और यह बात बाबासाहब ने कही थी। हमने हिंदुत्व के लिए क्या-क्या किया है, यह भी बताने का यह समय नहीं है।
हिंदुत्व के संबंध में विधानसभा में बोलने वाला मैं पहला मुख्यमंत्री हूं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह बालासाहेब की शिवसेना नहीं है। मैंने ऐसा क्या किया, जो यह सवाल उठ रहे हैं। 2012 में बालासाहेब का निधन हुआ।
2014 का चुनाव हमने अपने दम पर और हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा था। हमने उस वक्त भी कठिन परिस्थियों में चुनाव लड़ा था। उस समय 63 विधायक जीतकर आए। उस समय भी हम हिंदू थे, अब भी हिंदू हैं। इस बात का ध्यान रहे कि 2014 के बाद जो लोग बोल रहे हैं कि शिवसेना बाला साहेब ठाकरे वाली नहीं रही। वो लोग ध्यान रखें कि नई शिवसेना से ही हमें मंत्री पद मिले।